क्या पहले सरकार पेसा एक्ट लागू करने की तारीख बताएगी, तभी हटेगी बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर लगी रोक: झारखंड हाईकोर्ट?

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क्या पहले सरकार पेसा एक्ट लागू करने की तारीख बताएगी, तभी हटेगी बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर लगी रोक: झारखंड हाईकोर्ट?

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पेसा अधिनियम की नियमावली लागू करने की तिथि पूछी है। जब तक स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता, बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर रोक बनी रहेगी। यह मामला आदिवासियों के अधिकारों से जुड़ा है। जानें, इस पर अदालत का क्या कहना है।

Key Takeaways

  • झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट जवाब की मांग की है।
  • पेसा अधिनियम की नियमावली की तिथि जानना आवश्यक है।
  • बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर रोक बनी रहेगी।
  • आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।
  • अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।

रांची, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से एक बार फिर पूछताछ की है कि पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया) अधिनियम, 1996 की नियमावली कब लागू की जाएगी? चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने इस संबंध में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस उत्तर नहीं मिलता, तब तक बालू और लघु खनिजों के लीज आवंटन पर अदालत द्वारा लगाई गई रोक नहीं हटाई जाएगी।

अदालत ने पेसा एक्ट के कार्यान्वयन से संबंधित जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। पहले इस प्रारूप को कैबिनेट को-आर्डिनेशन कमेटी को भेजा गया था। आपत्तियों के बाद इसे संशोधित करने के लिए ड्राफ्ट कमेटी को फिर से भेजा गया है। वहां से इसे कैबिनेट को भेजा जाएगा। सरकार ने बालू और लघु खनिज के आवंटन पर लगी रोक को हटाने का अनुरोध किया है।

इस पर अदालत ने कहा कि पेसा एक्ट लागू करने की तिथि की जानकारी दी जाए। झारखंड हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को दो माह के भीतर पेसा नियमावली अधिसूचित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि संविधान के 73वें संशोधन और पेसा कानून की भावना के अनुसार नियमावली तैयार कर लागू की जाए। इसके बाद अब तक नियमावली अधिसूचित नहीं की गई है।

इस पर आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई है। प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता तान्या सिंह ने पक्ष रखा।

जानकारी के लिए बता दें कि वर्ष 1996 में केंद्र ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम संसद में पारित किया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है। अनुसूचित क्षेत्रों वाले अधिकांश राज्यों में यह कानून लागू हो चुका है। झारखंड में यह कानून तब लागू होगा जब राज्य सरकार इसके लिए स्थानीय आदिवासी परंपराओं के अनुसार नियमावली को अंतिम रूप देकर उसे अधिसूचित करे। लंबे समय से यह मामला लटकता रहा है। वर्ष 2019 और 2023 में राज्य सरकार ने पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका है।

Point of View

बल्कि पूरे राज्य की विकास प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
NationPress
24/02/2026

Frequently Asked Questions

पेसा अधिनियम क्या है?
पेसा अधिनियम एक कानून है जो आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा करता है और इसे 1996 में लागू किया गया था।
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से क्या पूछा?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पेसा अधिनियम की नियमावली लागू करने की तिथि मांगी है।
बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर रोक क्यों है?
जब तक पेसा अधिनियम की नियमावली लागू नहीं होती, तब तक बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर रोक बनी रहेगी।
अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
क्या राज्य सरकार ने कोई कदम उठाया है?
राज्य सरकार ने पेसा नियमावली का प्रारूप तैयार किया है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
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