क्या झारखंड की शासन व्यवस्था भ्रष्टाचारियों के संरक्षण में लगी हुई है?
सारांश
Key Takeaways
- भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
- राजनीतिक हस्तक्षेप से जांच एजेंसियों का कार्य प्रभावित होता है।
- सार्वजनिक धन का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
- सीबीआई जांच की आवश्यकता है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।
- भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना राज्य की शासन व्यवस्था के लिए घातक है।
रांची, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय राज्यमंत्री संजय सेठ ने ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय को रांची पुलिस द्वारा घेरने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पूरी शासन व्यवस्था भ्रष्टाचारियों के संरक्षण में लगी हुई है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने उल्लेख किया कि पेयजल घोटाले में एक कर्मचारी, जो पहले ही 18 महीने जेल में बिता चुका है, अब एक संवैधानिक संस्था को बदनाम करने के लिए मनगढ़ंत कहानियाँ फैला रहा है। इन्हीं झूठे दावों के आधार पर ईडी के कार्यालय को घेर लिया गया। जबकि, कर्मचारी बिना किसी समन के ईडी ऑफिस पहुंचा और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। मैं स्पष्ट रूप से कहता हूँ कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। जनता के पैसे का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मैं कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच का पूरा समर्थन करता हूँ ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।
संजय सेठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि झारखंड में पेयजल एवं स्वच्छता सहित अनेक भ्रष्टाचार की जांच कर रही ईडी कार्यालय को रांची पुलिस ने घेर लिया है। ऐसी सूचना मिली है कि भ्रष्टाचार के आरोपी द्वारा ईडी पर मुकदमा दर्ज किया गया है। रांची पुलिस की यह कार्रवाई जांच एजेंसियों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष कार्य में बाधा डालने का कुत्सित प्रयास है। ऐसा करके झारखंड का शासन झारखंड को बंगाल बनाने पर आमादा है। जांच एजेंसियों का कार्य भ्रष्टाचार की जांच और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि यदि यह कार्य झारखंड पुलिस की होती तो केंद्रीय एजेंसी को झारखंड में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। झारखंड की पूरी शासन व्यवस्था भ्रष्टाचारियों के संरक्षण में लगी है और ईडी कार्यालय को पुलिस द्वारा घेरना उसी का एक हिस्सा है। इससे पूर्व भी जेल में बैठे भ्रष्टाचारियों द्वारा ईडी पर हमले की योजना का खुलासा हो चुका है। ऐसी स्थिति में राज्य की शासन व्यवस्था का भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना बहुत ही गलत है। इस बात की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि ईडी कार्यालय का घेराव कर भ्रष्टाचार के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट किया जा सकता है। यह भी जानकारी मिली है कि ईडी ने किसी भी व्यक्ति को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय नहीं बुलाया। इसके बावजूद भी उक्त व्यक्ति ने ईडी पर मुकदमा दर्ज किया है। झारखंड में ईडी की सुरक्षा सुनिश्चित हो और भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई जारी रहे, यह मेरा आग्रह है।