क्या झारखंड सरकार ने बजट को लेकर आम लोगों से सुझाव मांगे?
सारांश
Key Takeaways
- हर नागरिक को बजट निर्माण में शामिल करने का अवसर।
- पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ावा देने की कोशिश।
- राज्य की आमदनी बढ़ाने वाले सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- विशेषज्ञों और आम जनता की राय को महत्व दिया जाएगा।
रांची, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट के निर्माण में आम जनता को शामिल करने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में “अबुआ दिशोम बजट पोर्टल और मोबाइल ऐप” का उद्घाटन किया।
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, आम नागरिक राज्य के बजट से संबंधित अपने विचार सीधे सरकार के सामने रख सकेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी राज्य केवल योजनाएं बनाकर मजबूत नहीं होता, बल्कि लोगों की भागीदारी से उसकी नींव मजबूत होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार चाहती है कि बजट में हर वर्ग की आवश्यकताएं और आकांक्षाएं शामिल हों, चाहे वह गांव का किसान हो, शहर का श्रमिक हो, युवा हो या महिलाएं। इसी विचार के साथ यह पोर्टल और ऐप शुरू किया गया है, ताकि लोगों की राय सीधे बजट निर्माण प्रक्रिया में समाहित हो सके।
जानकारी के अनुसार, आम जनता, विशेषज्ञों, छात्रों, व्यापारियों, किसानों और कर्मचारियों को इस पोर्टल, मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स के माध्यम से 17 जनवरी 2026 तक अपने सुझाव भेजने का अवसर मिलेगा। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि सर्वोत्तम तीन सुझाव देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। ऐसे सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो राज्य की आमदनी बढ़ाने या योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट केवल राजधानी या बड़े शहरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसकी झलक हर गांव और हर परिवार तक पहुंचनी चाहिए। सरकार का मानना है कि इस पहल से बजट निर्माण प्रक्रिया अधिक खुली और पारदर्शी होगी। जनता को यह अनुभव होगा कि उनकी राय की भी अहमियत है और सरकार उनकी बात सुन रही है। इससे सरकार और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
बजट पोर्टल और ऐप के उद्घाटन के मौके पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और वित्त विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।