नेपाल चुनाव में पर्यटन का उभार, राजनीतिक दलों ने घोषणापत्र में दी महत्वता
सारांश
Key Takeaways
- पर्यटन नेपाल चुनाव का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
- राजनीतिक दलों ने घोषणापत्र में पर्यटन को प्राथमिकता दी है।
- 2023 में नेपाल का पर्यटन क्षेत्र 327.9 बिलियन रुपए का राजस्व अर्जित किया।
- 2023 में जीडीपी में पर्यटन का योगदान 6.6 प्रतिशत रहा।
- नेपाली मीडिया के अनुसार, 2019 के बाद से पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है।
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। इस चुनाव में पर्यटन एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरा है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने मेनिफेस्टो में नेपाल चुनाव पर खास ध्यान केंद्रित किया है।
चार प्रमुख राजनीतिक दलों ने टूरिज्म को अपने घोषणापत्र में प्राथमिकता दी है, जिसमें विमानन सुरक्षा में बड़े सुधार, भारत के साथ एयर एंट्री रूट को सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास और अगले पांच वर्षों में पर्यटकों की संख्या और खर्च को दोगुना करने के बड़े लक्ष्य का वादा किया गया है।
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, राजनीतिक दलों के मेनिफेस्टो में एक सामान्य मुद्दा है- नेपाल को यूरोपीय कमीशन की एयर सेफ्टी सूची से बाहर करने और देश के दो नए अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बढ़ाने की प्रतिबद्धता।
रबी लामिछाने की अगुवाई वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अगले पांच वर्षों में पर्यटकों की संख्या और उनके औसत खर्च को दोगुना करने का वादा किया है। साथ ही, उनके रुकने की अवधि बढ़ाने का भी आश्वासन दिया गया है।
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, नेपाल में पिछले तीन सालों में हर बार 1 मिलियन से अधिक पर्यटक आए हैं। यह संख्या अभी भी 2019 के स्तर पर नहीं पहुंची है। उद्योग के हितधारकों का मानना है कि पर्यटन में आई गिरावट का मुख्य कारण बार-बार होने वाले विमान दुर्घटनाएं, खराब राजमार्ग बुनियादी ढांचा और कमजोर अंतरराष्ट्रीय प्रचार है।
लंदन के वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल के अनुसार, नेपाल के पर्यटन क्षेत्र ने 2023 में 327.9 बिलियन रुपए (2.5 बिलियन डॉलर) का राजस्व अर्जित किया और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 1.19 मिलियन नौकरियां प्रदान कीं, जो कुल रोजगार का 15.2 प्रतिशत है। 2023 में जीडीपी में इस क्षेत्र का कुल योगदान 358.9 बिलियन रुपए (2.7 बिलियन डॉलर) या 6.6 प्रतिशत रहा, जो कि कोविड-19 महामारी से पहले 2019 में 6.7 प्रतिशत से थोड़ा कम है।