जिशु सेनगुप्ता ने प्रियदर्शन के साथ 'भूत-बंगला' में काम करने का अनुभव साझा किया
सारांश
Key Takeaways
- जिशु सेनगुप्ता ने प्रियदर्शन के साथ काम करने को अद्वितीय अनुभव बताया।
- फिल्म 'भूत-बंगला' 10 अप्रैल को रिलीज होगी।
- अक्षय कुमार और वामिका गब्बी भी इस फिल्म में हैं।
- बंगाली और हिंदी सिनेमा के बीच बड़ा बजट अंतर है।
- जिशु का खुद का बैंड है और वे म्यूजिक में रुचि रखते हैं।
मुंबई, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अक्षय कुमार और वामिका गब्बी की आगामी हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत-बंगला' १० अप्रैल को बड़े पर्दे पर दस्तक देने जा रही है। इस फिल्म को यूए-१६ की रेटिंग के साथ प्रदर्शित करने की अनुमति मिली है। बंगाली अभिनेता जिशु सेनगुप्ता ने भी इस फिल्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने फिल्म में अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ काम करने को सपने के सच होने जैसा बताया है।
राष्ट्र प्रेस के साथ विशेष बातचीत में जिशु सेनगुप्ता ने कहा, डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ काम करना उनके लिए एक सपने के साकार होने जैसा अनुभव है, क्योंकि जब वे गंभीर फिल्में बनाते हैं, तो सेट पर गंभीरता का स्तर अपने आप ऊँचा हो जाता है। वहीं, जब वे कॉमेडी फिल्म का निर्देशन करते हैं, तो सेट पर हास्य के नए आयाम खुलते हैं। मेरी पहली मुलाकात प्रियदर्शन से सीसीएल में हुई थी, जब मैंने उनके साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि इसमें थोड़ा समय लगा, लेकिन उनके साथ काम करना मेरे लिए गर्व की बात है।
प्रियदर्शन के साथ सेट पर काम करने के अनुभव के बारे में जिशु सेनगुप्ता ने बताया, "पहले कुछ दिन अजीब लगते हैं, मैं नर्वस नहीं था, लेकिन समझ नहीं पा रहा था क्योंकि सेट पर लगातार शॉट लिए जा रहे थे और मुझे नहीं पता था कि सीन में कोई कमी तो नहीं है। जब मैंने पूछा तो पता चला कि सब कुछ परफेक्ट है। जब सब कुछ सही होता था तो डायरेक्टर कुछ नहीं बोलते थे, और जब कमी होती थी, तो वे खुद आकर बताते थे। उन्होंने कहा कि डायरेक्टर सेट पर सभी की बात सुनते हैं। यदि अक्षय सर कोई सुझाव देते हैं, तो वे तुरंत उसे मान लेते हैं।"
'भूत-बंगला' के लिए 'हां' करने के सवाल पर अभिनेता ने कहा कि भले ही फिल्म में कई किरदार हैं, लेकिन हर किरदार का अपना एक विशेष महत्व है। मेरे लिए अच्छा किरदार बहुत महत्वपूर्ण है और यही कारण है कि मैंने इस फिल्म के लिए 'हां' कहा।
हिंदी सिनेमा और बंगाली सिनेमा के बीच के वित्तीय अंतर के बारे में जिशु ने बताया कि दोनों सिनेमा में बजट का बड़ा फर्क है। उन्होंने कहा, "बंगाली सिनेमा में फिल्म ३ करोड़ में बन जाती है और इसे शूट करने के लिए १६-१८ या २० दिन काफी हैं, जबकि बॉलीवुड में फिल्म का बजट बहुत अधिक होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संजय लीला भंसाली की फिल्म का एक गाना ही १० दिन में शूट होता है, क्योंकि वहां भव्य सेट बनाए जाते हैं। इतने समय में बंगाली सिनेमा में आधी फिल्म शूट हो चुकी होती है।"
अपने करियर की शुरुआत के बारे में जिशु ने कहा कि वे कभी भी एक्टिंग में नहीं आना चाहते थे, क्योंकि उनके पिता एक थिएटर अभिनेता थे। उन्होंने कहा, "मेरी मां नहीं चाहती थीं कि मैं फिल्मों में आऊं और न ही मैं आना चाहता था। मुझे म्यूजिक पसंद है और मेरा अपना बैंड भी है, लेकिन किस्मत ने मुझे सिनेमा में लाकर खड़ा कर दिया।" उन्होंने यह भी बताया कि वे कभी अपनी खुद की फिल्में नहीं देखते हैं।