जितिया व्रत 2026: नहाय-खाय 2 अक्टूबर, पारण 4 अक्टूबर सुबह 7:32 बजे के बाद — शिप्रा सचदेव से जानें पूरी विधि
सारांश
मुख्य बातें
जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जितिया व्रत इस वर्ष 2 अक्टूबर 2026 को नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा और 4 अक्टूबर 2026 को पारण के साथ संपन्न होगा। सनातन धर्म में यह तीन दिवसीय व्रत माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और विघ्न-निवारण की कामना से रखा जाता है। प्रयागराज की प्रसिद्ध पंडित शिप्रा सचदेव ने इस व्रत के महत्व, मुहूर्त और विधि के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की है।
जितिया व्रत का धार्मिक महत्व
पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं द्वारा अपने पुत्र की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना से रखा जाने वाला सबसे कठोर व्रतों में से एक है। मान्यता है कि इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमनिष्ठा से रखने पर संतान के जीवन में आने वाले समस्त कष्ट और विघ्न दूर हो जाते हैं। यह व्रत केवल पुत्र ही नहीं, बल्कि संतान की समग्र वृद्धि और मंगल के लिए भी फलदायी माना जाता है।
गौरतलब है कि यह व्रत मुख्यतः बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्रचलित है। इसे सबसे कठिन व्रतों में इसलिए गिना जाता है क्योंकि मुख्य व्रत के दिन 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास रखा जाता है — अर्थात अन्न और जल दोनों का पूर्ण त्याग।
नहाय-खाय: व्रत का पहला दिन — 2 अक्टूबर
व्रत की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती महिलाएं प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करती हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। शिप्रा सचदेव ने बताया कि इस दिन विशेष पूजन के साथ मन को अगले दिन के कठिन निर्जला उपवास के लिए तैयार किया जाता है। यह दिन आत्मशुद्धि और संकल्प का प्रतीक है।
मुख्य व्रत दिवस: 3 अक्टूबर — 24 घंटे से अधिक निर्जला उपवास
व्रत का मुख्य और सबसे कठोर दिन 3 अक्टूबर 2026 को है। पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस दिन प्रातःकाल उठकर व्रत का संकल्प लिया जाता है और तत्पश्चात संपूर्ण दिन अन्न एवं जल का पूर्णतः त्याग किया जाता है। प्रदोष काल में इस व्रत की विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिसमें महिलाएं समूहों में एकत्र होकर जितिया व्रत कथा सुनती हैं और अपनी संतान के दीर्घायु व मंगलमय जीवन की प्रार्थना करती हैं।
यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब सामाजिक और पारिवारिक उत्सव माताओं की इस अटूट श्रद्धा और समर्पण को रेखांकित करते हैं। निर्जला व्रत की कठोरता इसे अन्य व्रतों से अलग और अत्यंत पुण्यदायी बनाती है।
पारण मुहूर्त: 4 अक्टूबर, सुबह 7 बजकर 32 मिनट के बाद
व्रत का समापन 4 अक्टूबर 2026 को नवमी तिथि पर पारण के साथ होगा। पंडित शिप्रा सचदेव ने स्पष्ट किया कि इस दिन सूर्योदय के पश्चात सुबह 7 बजकर 32 मिनट के बाद ही पारण करना शुभ माना गया है। इस शुभ मुहूर्त के बाद ही व्रती महिलाएं अन्न-जल ग्रहण कर अपना उपवास खोलेंगी।
पारण के समय सही मुहूर्त का पालन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार निर्धारित समय से पहले व्रत खोलने पर व्रत का फल क्षीण हो सकता है।
व्रत की तिथियाँ एक नज़र में
इस वर्ष जितिया व्रत का संक्षिप्त कार्यक्रम इस प्रकार है: 2 अक्टूबर — नहाय-खाय (व्रत का प्रथम दिन, सात्विक भोजन); 3 अक्टूबर — मुख्य व्रत दिवस (संपूर्ण निर्जला उपवास, प्रदोष काल में पूजन और कथा); 4 अक्टूबर — पारण (सुबह 7:32 बजे के बाद उपवास समाप्ति)। व्रती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे पारण से पहले किसी जानकार पंडित से स्थानीय मुहूर्त की पुष्टि अवश्य कर लें।