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बीसी आरक्षण बिल पास न हुआ तो दिल्ली कूच करेंगे कार्यकर्ता — के. कविता की कांग्रेस-BJP को चेतावनी

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बीसी आरक्षण बिल पास न हुआ तो दिल्ली कूच करेंगे कार्यकर्ता — के. कविता की कांग्रेस-BJP को चेतावनी

सारांश

टीआरएस अध्यक्ष के. कविता ने एक्स पर और सामाजिक न्याय संकल्प सभा में कांग्रेस व BJP को सीधी चेतावनी दी — बजट सत्र तक बीसी आरक्षण बिल पास करें, वरना दिल्ली ठप। 50% आरक्षण की माँग के साथ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान।

मुख्य बातें

कविता ने 6 अगस्त को चेतावनी दी कि अगले बजट सत्र तक बीसी आरक्षण बिल पास न हुआ तो टीआरएस कार्यकर्ता दिल्ली कूच करेंगे।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया — 'अगर हम सड़कों पर उतर आए तो दिल्ली ठप हो जाएगी।' तेलंगाना में 'सामाजिक न्याय संकल्प सभा' में हज़ारों लोग एकत्रित हुए; विधायी निकायों में बीसी के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की माँग।
महात्मा ज्योतिराव फुले को भारत रत्न, एससी-एसटी बैकलॉग रिक्तियाँ भरने, महिलाओं को 33% आरक्षण सहित कई माँगें रखी गईं।
टीआरएस ने समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन चलाने का संकल्प लिया।

तेलंगाना रक्षा सेना (टीआरएस) की अध्यक्ष के. कविता ने 6 अगस्त को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगले बजट सत्र तक पिछड़ा वर्ग (बीसी) आरक्षण विधेयक संसद में पारित नहीं हुआ, तो टीआरएस के हज़ारों कार्यकर्ता दिल्ली की ओर मार्च करेंगे। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'अगर हम सड़कों पर उतर आए तो दिल्ली ठप हो जाएगी।'

चेतावनी का स्वर और लक्ष्य

कविता ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) — दोनों को एक साथ निशाने पर लिया। उनका कहना था कि दोनों प्रमुख दलों ने पिछड़े वर्गों के आरक्षण के मुद्दे पर दशकों तक केवल वादे किए, ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने 'जेन-जी' आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि जबरदस्ती थोपी जाने वाली राजनीति अब नहीं चलेगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब बीसी आरक्षण का मुद्दा कई राज्यों में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और संसद के आगामी बजट सत्र से पहले विभिन्न सामाजिक संगठनों का दबाव बढ़ रहा है।

सामाजिक न्याय संकल्प सभा के प्रमुख माँगें

तेलंगाना में आयोजित 'सामाजिक न्याय संकल्प सभा' में हज़ारों लोग एकत्रित हुए। कविता ने इस मंच से कई माँगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं:

विधायी निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना। महात्मा ज्योतिराव फुले और उनकी पत्नी को भारत रत्न से सम्मानित करना। केंद्र और राज्य सरकारों में एससी-एसटी के लिए बैकलॉग रिक्तियाँ भरने हेतु विशेष अधिसूचना जारी करना।

इसके अतिरिक्त, आदिवासियों को वन भूमि पर पूर्ण अधिकार, परिसीमन से स्वतंत्र महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण, मुस्लिम समुदाय के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और एक व्यापक वक्फ बोर्ड अधिनियम, सिख और ईसाई समुदायों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पूर्ण अधिकार, तथा दिव्यांग व्यक्तियों की पेंशन में वृद्धि की माँगें भी सभा में रखी गईं।

शिक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण पर ज़ोर

एक सभा को संबोधित करते हुए कविता ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति के लिए तीन स्तंभ अनिवार्य हैं — शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व। उनके अनुसार, शिक्षा से जागरूकता, आर्थिक सशक्तिकरण से आत्म-सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से न्याय मिलता है।

उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं के विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व की वकालत करते हुए कहा कि उनकी आवाज़ कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल होनी चाहिए।

आगे की रणनीति

टीआरएस ने घोषणा की है कि वह समान विचारधारा वाले संगठनों और दलों के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन चलाएगी। कविता ने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक विधायी निकायों में बीसी वर्गों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण कानूनी रूप से सुनिश्चित नहीं हो जाता। गौरतलब है कि यह माँग सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा के संदर्भ में संवैधानिक जटिलताओं को भी जन्म देती है, जिस पर राष्ट्रीय बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि विधायी निकायों में 50 प्रतिशत बीसी आरक्षण की माँग सर्वोच्च न्यायालय की 50 प्रतिशत की कुल सीमा के भीतर संवैधानिक रूप से कैसे संभव होगी — यह बिंदु सभा में अनुत्तरित रहा। दोनों प्रमुख दलों — कांग्रेस और BJP — को एक साथ निशाना बनाना रणनीतिक है, क्योंकि यह टीआरएस को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करता है। हालाँकि, देशव्यापी आंदोलन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि टीआरएस कितने सहयोगी जुटा पाती है — अभी तक केवल इरादे घोषित हुए हैं, गठबंधन नहीं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

के. कविता ने बीसी आरक्षण बिल पर क्या चेतावनी दी?
के. कविता ने कहा कि यदि अगले बजट सत्र तक पिछड़ा वर्ग आरक्षण विधेयक संसद में पारित नहीं हुआ, तो टीआरएस के हज़ारों कार्यकर्ता दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने एक्स पर लिखा कि 'अगर हम सड़कों पर उतर आए तो दिल्ली ठप हो जाएगी।'
टीआरएस की बीसी आरक्षण में क्या माँग है?
टीआरएस विधायी निकायों में पिछड़े वर्गों (बीसी) के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की माँग कर रही है। इसके साथ महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण, एससी-एसटी बैकलॉग रिक्तियाँ भरने और महात्मा ज्योतिराव फुले को भारत रत्न देने की माँगें भी रखी गई हैं।
सामाजिक न्याय संकल्प सभा क्या थी?
यह तेलंगाना में टीआरएस द्वारा आयोजित एक बड़ी रैली थी जिसमें हज़ारों लोग एकत्रित हुए। सभा में बीसी आरक्षण सहित कई सामाजिक न्याय से जुड़े संकल्प लिए गए और देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तय की गई।
कविता ने कांग्रेस और BJP को एक साथ क्यों निशाना बनाया?
कविता का कहना था कि दोनों प्रमुख दलों ने दशकों तक पिछड़े वर्गों के आरक्षण पर केवल वादे किए, ठोस कदम नहीं उठाए। दोनों को एक साथ चुनौती देकर टीआरएस खुद को बीसी समुदायों के लिए एकमात्र विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश कर रही है।
टीआरएस का अगला कदम क्या होगा?
टीआरएस ने घोषणा की है कि वह समान विचारधारा वाले दलों और संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन चलाएगी। यदि बजट सत्र तक बीसी आरक्षण बिल पारित नहीं हुआ, तो दिल्ली मार्च की कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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