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21 जुलाई 'चलो संसद' मार्च: सुधा प्रसाद का आह्वान — ओबीसी महिलाओं को मिले अलग आरक्षण

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21 जुलाई 'चलो संसद' मार्च: सुधा प्रसाद का आह्वान — ओबीसी महिलाओं को मिले अलग आरक्षण

सारांश

21 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च से पहले झारखंड महिला कांग्रेस की सह-प्रभारी सुधा प्रसाद ने ओबीसी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की माँग को केंद्र में रखा। उनका कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक बिना ओबीसी कोटे के अधूरा है — और यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी।

मुख्य बातें

झारखंड महिला कांग्रेस की सह-प्रभारी सुधा प्रसाद ने 21 जुलाई के 'चलो संसद' अभियान में सभी महिलाओं और इंडिया गठबंधन के दलों से भाग लेने की अपील की।
ओबीसी महिलाओं को महिला आरक्षण विधेयक में अलग से आरक्षण देने की माँग; कांग्रेस का कहना है कि बिना इसके सामाजिक न्याय अधूरा रहेगा।
BJP की महिला सांसदों और विधायकों से भी अभियान का समर्थन करने की अपील की गई।
केंद्र सरकार पर आरोप — लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी और आंदोलनकारियों की सुनवाई न करना।
वायनाड भूस्खलन पर कहा — पार्टी टीम राहत कार्यों में जुटी है; प्रियंका गांधी शीघ्र दौरा करेंगी।

झारखंड महिला कांग्रेस की सह-प्रभारी सुधा प्रसाद ने 14 जुलाई को रांची में कहा कि 21 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' अभियान में देशभर की महिलाओं और इंडिया गठबंधन के सभी दलों को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने के साथ-साथ ओबीसी महिलाओं को उसमें अलग से आरक्षण का प्रावधान किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा सामाजिक न्याय अधूरा रहेगा।

अभियान की तैयारियाँ और माँगें

सुधा प्रसाद ने बताया कि 'चलो संसद' अभियान की तैयारियाँ पूरे देश में हर जिले, हर प्रखंड और हर प्रदेश में बैठकों तथा प्रेस वार्ताओं के माध्यम से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने में जुटे हैं। उनका कहना था कि महिला आरक्षण पूरी तरह लागू होने तक और उसमें सामाजिक न्याय का समुचित ध्यान रखे जाने तक कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।

इंडिया गठबंधन और भाजपा से अपील

सुधा प्रसाद ने कहा कि यह अभियान केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन का होगा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसदों और विधायकों से भी इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की, ताकि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। उनके अनुसार, पुरुषवादी सोच को समाप्त करने के लिए महिलाओं को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।

लोकतंत्र और केंद्र सरकार पर आरोप

सुधा प्रसाद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह लोकतांत्रिक अधिकारों को कमज़ोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर आंदोलन और अनशन करने वालों की सरकार सुनवाई नहीं कर रही। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे संविधान की प्रति लेकर देशभर में लोगों को जागरूक कर रहे हैं और संविधान को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर प्रतिक्रिया

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों पर सुधा प्रसाद ने कहा कि भगवान राम के नाम पर आस्था का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए और किसी एक वर्ग या समुदाय को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, लगातार सामने आने वाले ऐसे विवादों से पुजारियों और ब्राह्मण समाज की छवि प्रभावित होती है।

वायनाड भूस्खलन और भाजपा पर पलटवार

वायनाड भूस्खलन प्रभावितों से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नहीं मिलने के आरोपों पर सुधा प्रसाद ने कहा कि पार्टी की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर राहत कार्यों में जुटी है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी भी शीघ्र ही प्रभावित लोगों से मिलने जाएँगी। भाजपा पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि पुलवामा और पहलगाम जैसी घटनाओं में दोषियों को अभी तक सज़ा नहीं मिली, इसलिए भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपनी खामियों पर ध्यान देना चाहिए। 'चलो संसद' अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इंडिया गठबंधन के दल किस हद तक एकजुट होकर महिला आरक्षण की माँग को संसद तक पहुँचाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली राजनीतिक परीक्षा ओबीसी कोटे की माँग में है — जो इंडिया गठबंधन के भीतर भी सर्वसम्मत नहीं है। महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पास हो चुका है, मगर परिसीमन की शर्त के चलते लागू नहीं हुआ; ओबीसी उपकोटे की माँग उस पर एक और पेच जोड़ती है। कांग्रेस के लिए यह अभियान झारखंड समेत उन राज्यों में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने का भी प्रयास है जहाँ 2025-26 में चुनावी चुनौतियाँ हैं। बिना ठोस संसदीय रणनीति के, यह मार्च प्रतीकात्मक दबाव से आगे नहीं जा सकता।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'चलो संसद' अभियान क्या है और यह कब होगा?
'चलो संसद' कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का 21 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करवाना और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की माँग करना है। इसकी तैयारियाँ देशभर के जिलों और प्रखंडों में बैठकों के ज़रिए चल रही हैं।
ओबीसी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की माँग क्यों की जा रही है?
कांग्रेस का तर्क है कि महिला आरक्षण विधेयक में ओबीसी महिलाओं के लिए अलग उपकोटा न होने पर वे इस व्यवस्था से वंचित रह जाएँगी। सुधा प्रसाद के अनुसार, सामाजिक न्याय तभी पूरा होगा जब पिछड़े वर्ग की महिलाओं को आरक्षण का समुचित लाभ मिले।
क्या यह अभियान केवल कांग्रेस तक सीमित रहेगा?
नहीं। सुधा प्रसाद ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पूरे इंडिया गठबंधन से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील करेगी। उन्होंने BJP की महिला सांसदों और विधायकों से भी समर्थन माँगा है।
वायनाड भूस्खलन पर कांग्रेस का क्या रुख है?
सुधा प्रसाद ने कहा कि पार्टी की टीम वायनाड के प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में जुटी है और प्रियंका गांधी शीघ्र ही पीड़ितों से मिलने पहुँचेंगी। उन्होंने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए पुलवामा और पहलगाम में दोषियों को सज़ा न मिलने का मुद्दा उठाया।
महिला आरक्षण विधेयक अभी तक लागू क्यों नहीं हुआ?
महिला आरक्षण विधेयक 2023 में संसद में पारित हो चुका है, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकेगा। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर इसे टाल रही है और 'चलो संसद' मार्च इसी देरी के विरोध में है।
राष्ट्र प्रेस
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