क्या कन्नड़ लेखिका और प्रकाशक आशा रघु ने आत्महत्या की?

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क्या कन्नड़ लेखिका और प्रकाशक आशा रघु ने आत्महत्या की?

सारांश

बेंगलुरु की प्रसिद्ध कन्नड़ लेखिका और प्रकाशक आशा रघु ने आत्महत्या कर ली। उनके इस कदम के पीछे अवसाद का कारण बताया गया है। यह घटना उनके जीवन के कई पहलुओं को उजागर करती है।

Key Takeaways

  • आशा रघु का जीवन साहित्यिक योगदान से भरा था।
  • उन्होंने कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत को समझना आवश्यक है।
  • साहित्य में उनकी रचनाएँ हमेशा याद की जाएंगी।
  • उनका निधन एक बड़ा नुकसान है।

बेंगलुरु, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कन्नड़ लेखिका और प्रकाशक आशा रघु (46) ने शनिवार को मल्लेश्वरम में अपने निवास पर आत्महत्या की। पुलिस ने इस मामले की पुष्टि की।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आशा अपने घर के एक कमरे में फांसी पर लटकी हुई पाई गईं। यह घटना तब उजागर हुई जब परिवार के सदस्यों ने दरवाजा तोड़कर देखा, क्योंकि कोई जवाब नहीं मिल रहा था।

आशा के पीछे एक बेटी है। उनके पति, केसी रघु, का दो साल पहले निधन हो गया था। पुलिस ने बताया कि आशा अपने पति की मृत्यु के बाद से अवसाद से ग्रस्त थीं।

इस अस्वाभाविक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

18 जून, 1979 को केशवा अयंगर और सुलोचना के घर जन्मीं आशा रघु ने बेंगलुरु विश्वविद्यालय से कन्नड़ में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने पहले एक लेक्चरर के रूप में कार्य किया और रंगमंच, टेलीविजन तथा सिनेमा में संवाद लेखक और सहायक निर्देशक के रूप में योगदान दिया।

बाद में, उन्होंने साहित्यिक कार्यों को पूरी तरह से समर्पित कर दिया और कई वर्षों तक पुस्तक प्रकाशन क्षेत्र में सक्रिय रहीं।

आशा रघु ने कई प्रशंसित उपन्यास लिखे, जिनमें 'अवर्ता', 'गाता', 'माये', और 'चित्तरंगा' शामिल हैं।

उनके लघु कहानी संग्रहों में 'आराने बेरालू', 'बोगासेयल्ली काथेगलु' और 'अपरूपा पुराण काथेगलु' शामिल हैं। उन्होंने 'चूड़ामणि', 'क्षमादान', 'बंगारदा पंजारा' और 'पूतानी और अन्य नाटक' जैसे नाटक भी लिखे।

उनके उपन्यास 'आवर्त' पर आधारित 'आवर्त-मंथना' नामक एक आलोचनात्मक कृति भी प्रकाशित हुई है।

आशा रघु को कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार, सूर्यनारायण चाडगा पुरस्कार, कन्नड़ साहित्य परिषद से पलाकला सीतारमभट्ट पुरस्कार, रायचूर कन्नड़ साहित्य परिषद से राजलक्ष्मी बारगुरु रामचंद्रप्पा पुरस्कार, अम्मा पुरस्कार, कर्नाटक लेखाकियारा संघ से त्रिवेणी बंदोबस्ती पुरस्कार और मांड्या जिला कन्नड़ साहित्य से 'साहित्यमृत सरस्वती' जैसे कई सम्मान प्राप्त हुए।

आशा रघु को एक गर्मजोशीपूर्ण, निपुण और विनम्र व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाएगा। पुलिस आगे की जांच में जुटी है।

Point of View

NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

आशा रघु का जन्म कब हुआ था?
आशा रघु का जन्म 18 जून, 1979 को हुआ था।
उन्होंने किस विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की?
उन्होंने बेंगलुरु विश्वविद्यालय से कन्नड़ में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।
आशा रघु ने कौन-कौन से उपन्यास लिखे हैं?
उन्होंने 'अवर्ता', 'गाता', 'माये', और 'चित्तरंगा' जैसे कई उपन्यास लिखे हैं।
क्या आशा रघु को कोई पुरस्कार मिला था?
हाँ, उन्हें कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार और कई अन्य पुरस्कार मिले थे।
आशा रघु के परिवार में कौन-कौन है?
आशा के पास एक बेटी है और उनके पति का निधन दो साल पहले हुआ था।
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