कर्नाटक में वन्यजीव नसबंदी प्रस्ताव पर किसानों का विरोध: वन मंत्री निशाने पर

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कर्नाटक में वन्यजीव नसबंदी प्रस्ताव पर किसानों का विरोध: वन मंत्री निशाने पर

सारांश

कर्नाटक में प्रस्तावित वन्यजीव नसबंदी योजना पर किसानों ने विरोध जताया है। इस कदम को अवैज्ञानिक और अमानवीय मानते हुए, किसान नेताओं ने वन मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या यह विवाद नए राजनीतिक मोड़ लेगा?

Key Takeaways

  • कर्नाटक में वन्यजीव नसबंदी का प्रस्ताव विवाद में है।
  • किसान संघ ने इसे अवैज्ञानिक और अमानवीय बताया।
  • वन मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने भी वन्यजीवों की नसबंदी का विरोध किया है।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान नसबंदी नहीं हो सकता।

चामराजनगर, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन्यजीवों की नसबंदी (स्टरलाइजेशन) या एनिमल बर्थ कंट्रोल उपायों को लागू करने का प्रस्ताव विवादों में घिर गया है। राज्य गन्ना किसान संघ ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए वन मंत्री ईश्वर खंड्रे पर सीधा निशाना साधा है।

संघ के अध्यक्ष भाग्यराज ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार का यह कदम अवैज्ञानिक और अमानवीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन्यजीवों की नसबंदी के बहाने उन्हें मारने की योजना बनाई जा रही है। उनका कहना है कि यह योजना असल में जानवरों की खाल और दांतों की तस्करी से संबंधित हो सकती है और जंगलों का दुरुपयोग करने का प्रयास है।

यह उल्लेखनीय है कि वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने हाल ही में राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए कुछ वन्यजीव प्रजातियों की नसबंदी या इम्यूनो-कॉन्ट्रासेप्शन के उपायों का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव अप्रैल २०२६ में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य हाथियों और तेंदुओं से जुड़ी बढ़ती घटनाओं के बीच मानव जीवन की रक्षा करना और पशु आबादी को बिना क्रूरता के नियंत्रित करना बताया गया है।

किसानों ने पहले मैसूर-चामराजनगर हाईवे को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया और मंत्री के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने इस प्रस्ताव को न केवल अवैज्ञानिक बल्कि अमानवीय भी कहा। किसानों ने यहां तक कहा कि इस तरह का सुझाव देने वाले विशेषज्ञ को मानसिक उपचार की आवश्यकता है।

किसानों ने स्थानीय विधायकों पुट्टरंगशेट्टी और ए.आर. कृष्णमूर्ति पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि ये नेता राज्य के हितों की अनदेखी कर कैबिनेट पदों के लिए दिल्ली में लॉबिंग कर रहे हैं।

पत्रकारों से बातचीत में भाग्यराज ने कहा कि यह योजना वन्यजीवों को मारने की साजिश है और इसे तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी वन्यजीवों की नसबंदी का विरोध किया है, इसलिए मंत्री का बयान अनुचित है और उन्हें इसे वापस लेकर माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष सरकारों की विफलता का परिणाम है और इसका समाधान नसबंदी नहीं हो सकता। उन्होंने वन मंत्री के फैसले को पूरी तरह अवैज्ञानिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग दोहराई।

भाग्यराज ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नसबंदी लागू करनी ही है, तो इसे भ्रष्ट लोगों, अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों, और युवाओं को राजनीति में आने से रोकने वालों पर लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जंगलों में रहने वाले जानवर स्वभाव से हिंसक नहीं होते, लेकिन सफारी, जंगल लॉज, होमस्टे और रिसॉर्ट जैसी गतिविधियों के कारण उनका प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है, जिससे वे रिहायशी इलाकों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं।

किसानों का यह भी कहना है कि गर्मियों में पानी की कमी के कारण भी वन्यजीव जंगलों से बाहर निकलते हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि अन्य राज्यों में इस तरह के नसबंदी प्रयोगों के नकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

इस बीच, इस प्रस्ताव को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई है और विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

Point of View

बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

किसानों ने वन्यजीव नसबंदी प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
किसानों ने इसे अवैज्ञानिक और अमानवीय बताया है और आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य वन्यजीवों को मारना है।
वन मंत्री ने यह प्रस्ताव क्यों पेश किया?
वन मंत्री का कहना है कि यह प्रस्ताव मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है?
हां, भाग्यराज का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी वन्यजीवों की नसबंदी का विरोध किया है।
किसानों का क्या कहना है?
किसानों ने कहा है कि यह प्रस्ताव अवैज्ञानिक है और इससे वन्यजीवों के साथ संघर्ष बढ़ सकता है।
क्या इस प्रस्ताव के अन्य राज्य में नकारात्मक परिणाम हुए हैं?
किसानों का दावा है कि अन्य राज्यों में नसबंदी प्रयोगों के नकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
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