20 अक्टूबर 2026
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कर्नाटक में एसआईआर के खिलाफ किसान-दलित संगठन एकजुट, 23 अक्टूबर को राज्यभर में रैलियाँ

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कर्नाटक में एसआईआर के खिलाफ किसान-दलित संगठन एकजुट, 23 अक्टूबर को राज्यभर में रैलियाँ

सारांश

कर्नाटक के किसान और दलित संगठन 23 अक्टूबर को एसआईआर के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे। अभिनेता प्रकाश राज और किसान नेता बडागलपुरा नागेंद्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रक्रिया रद्द करने की माँग की। यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते एसआईआर विरोध का कर्नाटक विस्तार है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के किसान और दलित संगठनों ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के खिलाफ 23 अक्टूबर 2026 को राज्यव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया।
अभिनेता व कार्यकर्ता प्रकाश राज ने बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदर्शन की घोषणा की और दिल्ली में कथित पुलिस बर्बरता की निंदा की।
किसान नेता बडागलपुरा नागेंद्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की माँग की।
प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि दिल्ली में कथित तौर पर 30,000 पुलिसकर्मी तैनात हैं और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही।
संगठनों ने हर जिले और गाँव में जनसभाएँ आयोजित करने की योजना बनाई है।

कर्नाटक के किसान और दलित संगठनों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में 23 अक्टूबर 2026 को राज्यव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है। बेंगलुरु में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी जिला मुख्यालयों पर जनसभाएँ आयोजित करने की घोषणा की।

मुख्य घोषणाएँ और आह्वान

अभिनेता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि किसान और दलित संगठन एसआईआर के विरोध में चल रहे आंदोलन से जुड़ेंगे और 23 अक्टूबर, शुक्रवार को कर्नाटक भर में रैलियाँ होंगी। उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों की तर्ज पर हर जिले और गाँव में प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया।

प्रकाश राज ने कहा, 'लोग आपके कुशासन से तंग आ चुके हैं। किसान फिर से सड़कों पर उतरेंगे।' उन्होंने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन का स्मरण कराते हुए कहा कि निरंतर विरोध के बाद सरकार को अंततः वे कानून वापस लेने पड़े थे।

दिल्ली में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध के आरोप

प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शनकारियों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है और राष्ट्रीय राजधानी को एक 'पुलिस शहर' में बदला जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनों को रोकने के लिए कथित तौर पर 30,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं और महिला पत्रकारों को पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा तथा प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय ध्वज लेकर मार्च करने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है। यह सभी आरोप अब तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

किसान नेता की माँगें

किसान नेता बडागलपुरा नागेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में राजनीतिक पूर्वाग्रह हावी रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने और एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की माँग की। नागेंद्र ने एक पारदर्शी व निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की भी माँग की।

नागेंद्र ने सवाल उठाया कि अगर सरकार जनविरोधी नीतियाँ अपनाती रहे, तो लोग अपनी आवाज़ कहाँ उठाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में एसआईआर के विरोध में आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है।

आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण विपक्षी दलों और नागरिक समाज के निशाने पर है, जिनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं — विशेषकर दलितों, किसानों और हाशिए के वर्गों — के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। प्रकाश राज ने कहा कि देशभर में युवा शिक्षा व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर भी सड़कों पर हैं, और एसआईआर विरोधी अभियान उसी व्यापक असंतोष का हिस्सा है।

क्या होगा आगे

23 अक्टूबर को कर्नाटक के सभी जिला मुख्यालयों पर जनसभाएँ आयोजित होने की संभावना है। किसान, दलित और प्रगतिशील संगठन इस प्रदर्शन को राज्यव्यापी एकजुटता के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं। यह देखना बाकी है कि इन प्रदर्शनों का चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे दीर्घकालिक दबाव की राजनीति की शक्ल दे सकती है। हालाँकि, प्रकाश राज के कई आरोप — जैसे 30,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती और जेल से रिहा लोगों को हथियार देना — स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं, और मीडिया को इन दावों की जाँच सतर्कता से करनी चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि एसआईआर का असल खतरा तकनीकी प्रक्रिया में नहीं, बल्कि उन करोड़ों मतदाताओं के लिए है जिनके पास दस्तावेज़ीकरण की सुविधा नहीं — और यही वह बिंदु है जो इस आंदोलन को चुनावी राजनीति से परे ले जाता है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा की एक प्रक्रिया है जिसे चुनाव आयोग संचालित करता है। किसान, दलित और विपक्षी संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताएँ हैं जिनसे बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं — खासकर हाशिए के वर्गों — के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
23 अक्टूबर को कर्नाटक में क्या होगा?
23 अक्टूबर 2026 को किसान, दलित और प्रगतिशील संगठनों ने कर्नाटक के सभी जिला मुख्यालयों पर जनसभाएँ और रैलियाँ आयोजित करने की घोषणा की है। यह प्रदर्शन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए राष्ट्रीय विरोध की तर्ज पर किए जाएंगे।
किसान नेता बडागलपुरा नागेंद्र की मुख्य माँगें क्या हैं?
किसान नेता बडागलपुरा नागेंद्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की माँग की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में राजनीतिक पूर्वाग्रह का आरोप लगाते हुए पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की भी माँग की।
प्रकाश राज ने दिल्ली में प्रदर्शनों पर क्या आरोप लगाए?
अभिनेता और कार्यकर्ता प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही और कथित तौर पर 30,000 पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्होंने युवाओं व महिला पत्रकारों पर कथित पुलिस बर्बरता और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय ध्वज लेकर मार्च न करने देने का भी आरोप लगाया, हालाँकि ये दावे अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
कर्नाटक के एसआईआर विरोध का राष्ट्रीय आंदोलन से क्या संबंध है?
कर्नाटक के संगठनों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए राष्ट्रीय एसआईआर विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में यह राज्यव्यापी आंदोलन घोषित किया है। संगठनों का मानना है कि यह देशव्यापी आंदोलन का कर्नाटक विस्तार है, जिसमें हर जिले और गाँव तक विरोध को ले जाने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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