संयुक्त किसान मोर्चा का एसआईआर आंदोलन को समर्थन, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर प्रदर्शन का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले एसआईआर (मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण) विरोधी आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। एसकेएम ने दिल्ली पुलिस और भाजपा-आरएसएस के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को कड़ी चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण जन प्रदर्शनों पर किसी भी प्रकार की रोक या दमनात्मक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
एसकेएम का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के ज़रिये नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, जिसके विरोध में आवाज़ उठाना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। संगठन ने केंद्र सरकार पर पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग और देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि यह आंदोलन ऐसे समय में उभरा है जब एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिकता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों में व्यापक बहस छिड़ी हुई है।
कार्यकर्ताओं पर दमन के आरोप
एसकेएम के अनुसार, विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बना रहे कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखा जा रहा है। संगठन ने महिला विद्यार्थियों सहित कई कार्यकर्ताओं को नज़रबंद किए जाने, कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर उठाए जाने और मस्जिदों के आसपास विशेष अभियान चलाकर लोगों को डराने के आरोप लगाए हैं। इसके अतिरिक्त, संगठन ने सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री के प्रसार पर चिंता जताई है जिसके ज़रिये, उसके दावे के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हिंसा भड़काने का प्रयास किया जा रहा है।
मोर्चा ने दिल्ली पुलिस के साथ-साथ गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड सहित भाजपा-शासित राज्यों के पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर आपत्ति
एसकेएम ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक हज़रत निज़ामुद्दीन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनें रद्द करने तथा नई दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। संगठन ने इन कदमों को सरकार की 'घबराहट भरी प्रतिक्रिया' बताते हुए आपत्तिजनक करार दिया। प्रदर्शन के दौरान 26 हज़ार पुलिसकर्मियों की तैनाती की चर्चा करते हुए एसकेएम ने कहा कि इस पैमाने की व्यवस्था राजनीतिक असुरक्षा को दर्शाती है।
संवैधानिक अधिकारों और न्यायपालिका से अपील
एसकेएम ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बिना हथियार शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार लोकतंत्र के बुनियादी स्तंभ हैं। मोर्चा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि किस कानून के तहत पुलिस अधिकारी नागरिकों के निजी घरों में प्रवेश कर उन्हें नज़रबंद कर सकते हैं। संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय और संबंधित उच्च न्यायालयों से कथित अवैध कार्रवाइयों पर स्वतः संज्ञान लेने की माँग भी की है।
एसकेएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रावधान शांतिपूर्ण सभाओं पर व्यापक या स्थायी प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं है। संगठन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ कथित दुर्व्यवहार पर भी आपत्ति जताई और कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ बलपूर्वक व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।
प्रमुख माँगें और आगे की राह
एसकेएम ने अपने बयान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अभियोजन, एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने और नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने की माँग रखी है। संगठन ने बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में एसआईआर लागू होने के बाद हुए चुनावों को रद्द करने की भी माँग उठाई। इसके अलावा, निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी चयन समिति में मनोनीत केंद्रीय मंत्री के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने के लिए कानून में संशोधन की माँग भी की गई है।
एसकेएम ने देशभर के किसानों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार पर किसी भी बल प्रयोग का सामूहिक रूप से विरोध करें। संगठन ने स्पष्ट किया है कि मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा।