भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) नेताओं को हाउस अरेस्ट, जंतर-मंतर धरने से पहले पुलिस की रोकथाम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरने में शामिल होने से रोकने के लिए ग्रेटर नोएडा में पुलिस ने हाउस अरेस्ट का प्रयास किया। किसान नेताओं के अनुसार, जिला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें उनके घरों पर ही रोक दिया, जिससे किसानों में तीव्र आक्रोश फैल गया। यूनियन ने इस कार्रवाई को 'सरकारी तानाशाही' करार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रवक्ता पवन खटाना को पुलिस ने हाउस अरेस्ट किया। खटाना ने बताया कि यूनियन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें घरों पर ही रोक लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई से आंदोलन नहीं रुकेगा।
पवन खटाना ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे यमुना एक्सप्रेसवे के निकट चपरगढ़ स्थित कैंप कार्यालय पर एकत्रित हों और वहाँ से आगे की रणनीति के अनुसार कदम बढ़ाएँ। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं और अपनी आवाज़ केंद्र सरकार तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
बैठक और तैयारियाँ
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला अध्यक्ष मनोज मावी के नेतृत्व में गाँव बिरौंडी स्थित यूनियन कार्यालय पर एक बैठक आयोजित की गई। इसमें पदाधिकारियों के साथ-साथ आसपास के गाँवों से सैकड़ों किसान शामिल हुए। बैठक में दिल्ली कूच की तैयारियों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
मनोज मावी ने कहा कि देश में किसानों की आवाज़ दबाने का प्रयास किया जा रहा है, परंतु यूनियन हर परिस्थिति में किसानों के हक और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली कूच का उद्देश्य किसानों की जायज माँगों को केंद्र सरकार के सामने रखना और उनके हित में ठोस निर्णय कराना है।
पुलिस की रोकथाम पर किसानों की प्रतिक्रिया
किसान नेताओं के मुताबिक, जिला अध्यक्ष मनोज मावी सहित यूनियन के अन्य पदाधिकारियों को भी हाउस अरेस्ट करने की कोशिश की गई। इससे किसानों में गहरी नाराज़गी देखी गई। यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रशासन से अपील की कि किसानों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाए तथा उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से धरने और प्रदर्शन में शामिल होने दिया जाए।
किसानों ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी माँगों को सरकार के सामने रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। मनोज मावी ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनियन का संघर्ष किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
आगे की राह
किसान नेताओं ने घोषणा की है कि वे अपनी माँगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। दिल्ली कूच को लेकर किसानों की तैयारियों और पुलिस की रोकथाम की कार्रवाई के बीच ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में किसान संगठनों की गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार किसानों की माँगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों पक्षों के बीच संवाद का कोई रास्ता निकलता है।