जंतर-मंतर गिरफ्तारी: पटियाला हाउस कोर्ट ने 17 छात्रों-पत्रकारों को दी जमानत, DCP से रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 17 लोगों को पटियाला हाउस कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को जमानत दे दी। गिरफ्तार लोगों में छात्र और स्वतंत्र पत्रकार शामिल हैं, जिन पर संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अनुसार, ये लोग प्रदर्शन में भाग लेने और उसकी कवरेज करने के दौरान हिरासत में लिए गए थे।
अदालत में क्या हुआ
पुलिस ने अदालत के समक्ष सभी 17 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की माँग रखी थी। बचाव पक्ष के वकीलों ने इस माँग का कड़ा विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपियों पर लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात साल से कम है। साथ ही, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गिरफ्तारी के आधार में किसी भी आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है।
अदालत ने सभी 17 आरोपियों को ₹15,000-₹15,000 के जमानती बॉन्ड पर जमानत देने का आदेश दिया। इनमें चार महिला आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलके पर तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए गए, जबकि शेष 13 आरोपियों की रिहाई जमानतदार पेश किए जाने के बाद होगी।
हिरासत में मारपीट और चोट के आरोप
बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ आरोपियों को चोटें आई थीं, फिर भी उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई। इसके अलावा, दो आरोपियों ने कथित तौर पर थाने में हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट किए जाने की शिकायत की है। अदालत ने इन आरोपियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
अदालत का सख्त रुख — DCP से रिपोर्ट तलब
पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए DCP, नई दिल्ली से रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके साथ ही संसद मार्ग थाना क्षेत्र में लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि प्रदर्शन और गिरफ्तारी से जुड़ी घटनाओं की जाँच में उनका उपयोग किया जा सके। यह कदम दर्शाता है कि अदालत पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा करना चाहती है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की दिशा
इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने गिरफ्तार लोगों को छात्र और स्वतंत्र पत्रकार बताते हुए उनकी हिरासत पर सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि यह प्रदर्शन कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर आयोजित था, जिसे IYC राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानती है। 17 आरोपियों को जमानत मिलने के बाद इस मामले में राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों की दिशा और हिरासत में मारपीट के दावों की जाँच आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी — खासकर तब जब अदालत ने DCP स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के संकेत दिए हैं।