6 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर गिरफ्तारी: पटियाला हाउस कोर्ट ने 17 छात्रों-पत्रकारों को दी जमानत, DCP से रिपोर्ट तलब

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जंतर-मंतर गिरफ्तारी: पटियाला हाउस कोर्ट ने 17 छात्रों-पत्रकारों को दी जमानत, DCP से रिपोर्ट तलब

सारांश

जंतर-मंतर पर कथित 'वोट चोरी' को लेकर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 17 छात्रों और पत्रकारों को पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत दी। कोर्ट ने DCP से रिपोर्ट तलब की और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया — हिरासत में मारपीट के आरोपों के बीच यह मामला अब न्यायिक निगरानी में है।

मुख्य बातें

पटियाला हाउस कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर प्रदर्शन में गिरफ्तार 17 आरोपियों को ₹15,000-₹15,000 के जमानती बॉन्ड पर जमानत दी।
चार महिला आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलके पर तत्काल रिहाई का आदेश; शेष 13 जमानतदार पेश होने के बाद रिहा होंगे।
बचाव पक्ष का तर्क — आरोपों में अधिकतम सजा 7 साल से कम और किसी की व्यक्तिगत भूमिका गिरफ्तारी आधार में स्पष्ट नहीं।
दो आरोपियों ने कथित तौर पर थाने में हिरासत के दौरान मारपीट की शिकायत की; अदालत ने चिकित्सा सुविधा देने का निर्देश दिया।
अदालत ने DCP, नई दिल्ली से रिपोर्ट तलब की और संसद मार्ग क्षेत्र की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अनुसार गिरफ्तार लोग कथित 'वोट चोरी' मुद्दे पर प्रदर्शन और उसकी कवरेज कर रहे थे।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 17 लोगों को पटियाला हाउस कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को जमानत दे दी। गिरफ्तार लोगों में छात्र और स्वतंत्र पत्रकार शामिल हैं, जिन पर संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अनुसार, ये लोग प्रदर्शन में भाग लेने और उसकी कवरेज करने के दौरान हिरासत में लिए गए थे।

अदालत में क्या हुआ

पुलिस ने अदालत के समक्ष सभी 17 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की माँग रखी थी। बचाव पक्ष के वकीलों ने इस माँग का कड़ा विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपियों पर लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात साल से कम है। साथ ही, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गिरफ्तारी के आधार में किसी भी आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है।

अदालत ने सभी 17 आरोपियों को ₹15,000-₹15,000 के जमानती बॉन्ड पर जमानत देने का आदेश दिया। इनमें चार महिला आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलके पर तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए गए, जबकि शेष 13 आरोपियों की रिहाई जमानतदार पेश किए जाने के बाद होगी।

हिरासत में मारपीट और चोट के आरोप

बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ आरोपियों को चोटें आई थीं, फिर भी उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई। इसके अलावा, दो आरोपियों ने कथित तौर पर थाने में हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट किए जाने की शिकायत की है। अदालत ने इन आरोपियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

अदालत का सख्त रुख — DCP से रिपोर्ट तलब

पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए DCP, नई दिल्ली से रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके साथ ही संसद मार्ग थाना क्षेत्र में लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि प्रदर्शन और गिरफ्तारी से जुड़ी घटनाओं की जाँच में उनका उपयोग किया जा सके। यह कदम दर्शाता है कि अदालत पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा करना चाहती है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की दिशा

इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने गिरफ्तार लोगों को छात्र और स्वतंत्र पत्रकार बताते हुए उनकी हिरासत पर सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि यह प्रदर्शन कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर आयोजित था, जिसे IYC राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानती है। 17 आरोपियों को जमानत मिलने के बाद इस मामले में राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों की दिशा और हिरासत में मारपीट के दावों की जाँच आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी — खासकर तब जब अदालत ने DCP स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के संकेत दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह मामला जवाबदेही की दृष्टि से कहीं बड़ा रूप ले सकता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि स्वतंत्र पत्रकारों की गिरफ्तारी — चाहे अंततः आरोप साबित हों या नहीं — प्रेस की पहुँच पर एक ठंडा प्रभाव डालती है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हो रहा था?
इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अनुसार, यह प्रदर्शन कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे को लेकर आयोजित था। गिरफ्तार लोग या तो इस प्रदर्शन में भाग ले रहे थे या पत्रकार के रूप में इसकी कवरेज कर रहे थे।
पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत किस आधार पर दी?
बचाव पक्ष की दलील थी कि आरोपियों पर लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा 7 साल से कम है और गिरफ्तारी के आधार में किसी भी आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट नहीं बताई गई। अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए ₹15,000-₹15,000 के जमानती बॉन्ड पर जमानत दी।
हिरासत में मारपीट के आरोप क्या हैं और अदालत ने क्या कार्रवाई की?
दो आरोपियों ने कथित तौर पर संसद मार्ग थाने में हिरासत के दौरान मारपीट किए जाने की शिकायत की है। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए DCP, नई दिल्ली से रिपोर्ट तलब की और संसद मार्ग क्षेत्र की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
क्या सभी 17 आरोपी तुरंत रिहा हो गए?
नहीं। चार महिला आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलके पर तत्काल रिहाई का आदेश दिया गया, जबकि शेष 13 आरोपियों की रिहाई जमानतदार पेश किए जाने के बाद होगी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अदालत ने DCP, नई दिल्ली से रिपोर्ट तलब की है और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। पुलिस की एफआईआर में लगाए गए आरोपों की दिशा और हिरासत में मारपीट के दावों की जाँच आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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