जंतर-मंतर मारपीट मामला: पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को दी नियमित जमानत
सारांश
मुख्य बातें
पटियाला हाउस कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुई मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को नियमित जमानत दे दी है। यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता निशु आज़ाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले से जुड़ा है। जमानत की विस्तृत शर्तों का उल्लेख करते हुए अदालत का विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। आरोप है कि स्वतंत्र भारद्वाज ने उस प्रदर्शन में कार्यकर्ता निशु आज़ाद के पिता संजय कुमार पर शारीरिक हमला किया। दिल्ली पुलिस ने प्रारंभ में कहा था कि संजय कुमार को लगी चोटें मामूली थीं और स्टील के कंगन से लगी थीं।
गिरफ्तारी और अंतरिम जमानत
दिल्ली पुलिस ने 4 सितंबर को स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद 15 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें शर्तों के साथ तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। कोर्ट ने तब स्पष्ट किया था कि अंतरिम जमानत के दौरान आरोपी के व्यवहार की समीक्षा के बाद नियमित जमानत पर विचार किया जाएगा।
धाराओं का विस्तार और नई एफआईआर
प्रारंभिक एफआईआर में बाद में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी की धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके अतिरिक्त, एक नाबालिग कार्यकर्ता की शिकायत पर यौन अपराधों से बाल संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत भारद्वाज के खिलाफ एक अलग एफआईआर भी दर्ज की गई, जिसमें ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है।
वायरल वीडियो और विवाद
पुलिस के अनुसार, यह पूरा विवाद एक कथित वायरल वीडियो के बाद सुर्खियों में आया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि उसने प्रदर्शन के दौरान निशु आज़ाद के पिता पर हमला किया था। वीडियो में उसने कथित तौर पर यह भी शेखी बघारी थी कि अपने 'राजनीतिक संबंधों' के कारण उसे छोड़ दिया गया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।
अन्य कानूनी कार्यवाही
गौरतलब है कि सितंबर माह की शुरुआत में अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने पटियाला हाउस कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी, जिसमें संजय आज़ाद और उनकी नाबालिग बेटी निशु आज़ाद के खिलाफ हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध कथित तौर पर अपमानजनक भाषा के उपयोग और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की माँग की गई थी। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इस प्रकरण में आगे की सुनवाई और नियमित जमानत की शर्तों पर विस्तृत आदेश का इंतज़ार किया जा रहा है।