ग्रेटर नोएडा: यमुना प्राधिकरण की ओर जा रहे तीन दर्जन से अधिक किसान हिरासत में, महिलाओं से अभद्र व्यवहार का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पुलिस ने 21 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण कार्यालय की ओर मार्च कर रहे किसानों को रास्ते में ही रोककर तीन दर्जन से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया और बसों के माध्यम से वहाँ से हटाया। किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान अपनी वर्षों से लंबित माँगों के समर्थन में शांतिपूर्ण महापड़ाव देने का इरादा रखते थे। किसान संगठनों ने इस पुलिस कार्रवाई को 'किसानों की आवाज़ दबाने का प्रयास' करार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
किसानों के अनुसार, भारी पुलिस बल पहले से मौके पर तैनात था। किसानों के प्राधिकरण कार्यालय पहुँचने से पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया और बसों में बैठाकर हटा दिया। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति की ओर से जारी बयान में पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई है।
संगठन का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान महिला किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें घसीटकर बसों में बैठाया गया। इसके अलावा, घटनास्थल पर वीडियो बना रहे युवाओं के मोबाइल फोन छीने गए तथा कथित तौर पर बुजुर्ग किसानों पर लाठियाँ चलाई गईं।
अधिवक्ताओं के साथ मारपीट का आरोप
किसान संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रदर्शन का समर्थन कर रहे अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की गई। उनके मुताबिक, कुछ अधिवक्ताओं को कई पुलिसकर्मियों ने घेरकर पीटा। संगठन का कहना है कि बातचीत के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उल्लेखनीय है कि पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
किसानों की प्रमुख माँगें
किसानों की माँगों में मुख्य रूप से तीन विषय शामिल हैं — अधिग्रहित ज़मीन के बदले 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट दिया जाना, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवज़े का भुगतान और किसानों की आबादी से जुड़े मामलों का पूर्ण निस्तारण। गौरतलब है कि ये माँगें यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद की उपज हैं।
किसान संगठनों की चार सूत्री माँगें
पुलिस कार्रवाई के विरोध में भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख माँगें रखी हैं। इनमें पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जाँच, दोषी अधिकारियों का निलंबन, कथित रूप से घायल किसानों व अधिवक्ताओं के उपचार और मुआवज़े की व्यवस्था तथा हिरासत में लिए गए सभी किसानों की तत्काल रिहाई शामिल हैं।
संगठन ने यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) से किसानों के साथ तत्काल वार्ता करने की भी माँग की है। साथ ही किसान, मज़दूर, खाप पंचायतों, छात्रों और सामाजिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की गई है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, अतिरिक्त मुआवज़े और विकसित प्लॉट की माँगें लंबे समय से किसान आंदोलनों का मुख्य मुद्दा रही हैं। यदि प्रशासन ने शीघ्र वार्ता का रास्ता नहीं अपनाया, तो किसान संगठनों द्वारा और अधिक व्यापक आंदोलन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।