21 अक्टूबर 2026
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ग्रेटर नोएडा: यमुना प्राधिकरण की ओर जा रहे तीन दर्जन से अधिक किसान हिरासत में, महिलाओं से अभद्र व्यवहार का आरोप

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ग्रेटर नोएडा: यमुना प्राधिकरण की ओर जा रहे तीन दर्जन से अधिक किसान हिरासत में, महिलाओं से अभद्र व्यवहार का आरोप

सारांश

यमुना प्राधिकरण कार्यालय की ओर शांतिपूर्ण महापड़ाव देने जा रहे तीन दर्जन से अधिक किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही हिरासत में ले लिया। 10% विकसित प्लॉट, 64.7% अतिरिक्त मुआवज़े और आबादी भूमि विवाद जैसी वर्षों पुरानी माँगें फिर टकराव की वजह बनीं — इस बार महिला किसानों से अभद्र व्यवहार और लाठीचार्ज के आरोपों के साथ।

मुख्य बातें

21 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण कार्यालय जा रहे तीन दर्जन से अधिक किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान शांतिपूर्ण महापड़ाव देने जा रहे थे।
भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने महिला किसानों से अभद्र व्यवहार , बुजुर्गों पर लाठीचार्ज और अधिवक्ताओं की पिटाई का आरोप लगाया।
किसानों की प्रमुख माँगों में 10% विकसित प्लॉट , 64.7% अतिरिक्त मुआवज़ा और आबादी भूमि का निस्तारण शामिल है।
संगठन ने न्यायिक जाँच , दोषी अधिकारियों का निलंबन और यमुना प्राधिकरण सीईओ से तत्काल वार्ता की माँग की।

पुलिस ने 21 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में यमुना प्राधिकरण कार्यालय की ओर मार्च कर रहे किसानों को रास्ते में ही रोककर तीन दर्जन से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया और बसों के माध्यम से वहाँ से हटाया। किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान अपनी वर्षों से लंबित माँगों के समर्थन में शांतिपूर्ण महापड़ाव देने का इरादा रखते थे। किसान संगठनों ने इस पुलिस कार्रवाई को 'किसानों की आवाज़ दबाने का प्रयास' करार दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

किसानों के अनुसार, भारी पुलिस बल पहले से मौके पर तैनात था। किसानों के प्राधिकरण कार्यालय पहुँचने से पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया और बसों में बैठाकर हटा दिया। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति की ओर से जारी बयान में पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई है।

संगठन का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान महिला किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें घसीटकर बसों में बैठाया गया। इसके अलावा, घटनास्थल पर वीडियो बना रहे युवाओं के मोबाइल फोन छीने गए तथा कथित तौर पर बुजुर्ग किसानों पर लाठियाँ चलाई गईं।

अधिवक्ताओं के साथ मारपीट का आरोप

किसान संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रदर्शन का समर्थन कर रहे अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की गई। उनके मुताबिक, कुछ अधिवक्ताओं को कई पुलिसकर्मियों ने घेरकर पीटा। संगठन का कहना है कि बातचीत के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उल्लेखनीय है कि पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

किसानों की प्रमुख माँगें

किसानों की माँगों में मुख्य रूप से तीन विषय शामिल हैं — अधिग्रहित ज़मीन के बदले 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट दिया जाना, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवज़े का भुगतान और किसानों की आबादी से जुड़े मामलों का पूर्ण निस्तारण। गौरतलब है कि ये माँगें यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद की उपज हैं।

किसान संगठनों की चार सूत्री माँगें

पुलिस कार्रवाई के विरोध में भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख माँगें रखी हैं। इनमें पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जाँच, दोषी अधिकारियों का निलंबन, कथित रूप से घायल किसानों व अधिवक्ताओं के उपचार और मुआवज़े की व्यवस्था तथा हिरासत में लिए गए सभी किसानों की तत्काल रिहाई शामिल हैं।

संगठन ने यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) से किसानों के साथ तत्काल वार्ता करने की भी माँग की है। साथ ही किसान, मज़दूर, खाप पंचायतों, छात्रों और सामाजिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की गई है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, अतिरिक्त मुआवज़े और विकसित प्लॉट की माँगें लंबे समय से किसान आंदोलनों का मुख्य मुद्दा रही हैं। यदि प्रशासन ने शीघ्र वार्ता का रास्ता नहीं अपनाया, तो किसान संगठनों द्वारा और अधिक व्यापक आंदोलन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि किसान संगठन बातचीत की माँग कर रहे थे। महिला किसानों से अभद्र व्यवहार और अधिवक्ताओं की पिटाई के आरोप — यदि सत्यापित होते हैं — तो यह मामला भूमि विवाद से बड़ा, नागरिक अधिकारों का सवाल बन जाता है। प्रशासन की चुप्पी और वार्ता से बचना ही वह ईंधन है जो ऐसे आंदोलनों को क्षेत्रीय से राष्ट्रीय मुद्दा बनाता है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा में किसानों को हिरासत में क्यों लिया गया?
किसान 21 अक्टूबर 2026 को यमुना प्राधिकरण कार्यालय में शांतिपूर्ण महापड़ाव देने जा रहे थे, जिसे पुलिस ने रास्ते में ही रोककर तीन दर्जन से अधिक किसानों को हिरासत में लिया। किसान संगठनों के अनुसार उन्हें प्राधिकरण तक पहुँचने का मौका ही नहीं दिया गया।
किसानों की मुख्य माँगें क्या हैं?
किसानों की तीन प्रमुख माँगें हैं — अधिग्रहित ज़मीन के बदले 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवज़े का भुगतान, और आबादी भूमि से जुड़े मामलों का पूर्ण निस्तारण। ये माँगें वर्षों से लंबित बताई जा रही हैं।
भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने क्या माँगें रखी हैं?
संगठन ने चार माँगें रखी हैं — पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जाँच, दोषी अधिकारियों का निलंबन, घायल किसानों और अधिवक्ताओं के उपचार व मुआवज़े की व्यवस्था, तथा हिरासत में लिए गए सभी किसानों की तत्काल रिहाई। संगठन ने यमुना प्राधिकरण सीईओ से तत्काल वार्ता की भी माँग की है।
क्या पुलिस ने महिला किसानों और अधिवक्ताओं पर कार्रवाई की?
भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के अनुसार, महिला किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें घसीटकर बसों में बैठाया गया। कथित तौर पर बुजुर्ग किसानों पर लाठियाँ चलाई गईं और प्रदर्शन का समर्थन कर रहे कुछ अधिवक्ताओं को भी पुलिसकर्मियों ने पीटा — हालाँकि पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि क्या है?
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, अतिरिक्त मुआवज़े और विकसित प्लॉट की माँगें लंबे समय से किसान आंदोलनों का प्रमुख मुद्दा रही हैं। किसान संगठनों का कहना है कि बार-बार आवाज़ उठाने के बावजूद प्राधिकरण और प्रशासन ने अपेक्षित समाधान नहीं दिया, जिससे वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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