तुमकुरू में H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि: 38 गांव निगरानी में, 20,432 लोग प्रभावित
सारांश
Key Takeaways
कर्नाटक के तुमकुरू जिले में मोरों की संदिग्ध मौतों के बाद H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की इकाई राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), भोपाल ने 29 अप्रैल 2026 को मोरों के सैंपल में इस वायरस की मौजूदगी की पुष्टि की। इसके बाद जिला प्रशासन ने तत्काल निगरानी और रोकथाम के उपाय लागू कर दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मृत मोर कोलिहल्ली, बैरासंद्रा, हुल्लेनाहल्ली और तिम्मेगौडनपाल्या गांवों के आसपास पाए गए थे। ये सभी गांव सिद्धगंगा मठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के क्षेत्र में स्थित हैं। NIHSAD की पुष्टि मिलते ही जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में आपात बैठक बुलाई गई और स्थिति की समीक्षा के बाद रोकथाम के उपाय तत्काल प्रभाव से लागू किए गए।
निगरानी और संक्रमित क्षेत्र की सीमाएँ
प्रशासन ने 0 से 3 किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र और 3 से 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र घोषित किया है। अगले 10 दिनों तक इन क्षेत्रों में बुखार, इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी और सांस की गंभीर समस्या वाले मरीजों पर नज़र रखी जाएगी। कुल 38 गांवों की लगभग 20,432 की आबादी इस निगरानी के दायरे में आएगी।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बीमार या मृत पक्षियों के संपर्क से बचें और हाथों को बार-बार साबुन से धोएं। मुर्गी का मांस और अंडे खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह पकाना अनिवार्य बताया गया है। सांस की बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों से उचित दूरी बनाए रखने और किसी भी लक्षण के दिखते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करें। गौरतलब है कि बर्ड फ्लू मुख्य रूप से पक्षियों में फैलने वाली बीमारी है, जो कुछ परिस्थितियों में इंसानों को भी संक्रमित कर सकती है।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति की लगातार निगरानी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सावधानी और सतर्कता ही इस प्रकोप को फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।