क्या राहुल गांधी की उदासीनता से कर्नाटक कांग्रेस में ज्वालामुखी जैसी स्थिति बनी है?
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद बढ़ रहा है।
- डीके शिवकुमार की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- राहुल गांधी की उदासीनता से स्थिति और बिगड़ सकती है।
- सत्ता खोने का खतरा कांग्रेस के सामने है।
पटना, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार में मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीति का तापमान बढ़ता जा रहा है। डीके शिवकुमार को राज्य की बागडोर सौंपने की मांग जोर पकड़ रही है। इस बीच, जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने राहुल गांधी की उदासीनता को कर्नाटक कांग्रेस में चल रहे विवाद का मुख्य कारण बताया।
राजीव रंजन ने राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि 2023 के कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की उल्लेखनीय जीत में डीके शिवकुमार का प्रबंधन कौशल महत्वपूर्ण था। यह संभव है कि राहुल गांधी और पार्टी के उच्च नेतृत्व ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने पर विश्वास जताया हो।"
उन्होंने आगे कहा, "कर्नाटक में वर्तमान स्थिति बताती है कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच संघर्ष चल रहा है। राहुल गांधी की उदासीनता के कारण यहां एक ज्वालामुखी जैसी स्थिति बन गई है, जो कभी भी फट सकती है। इसका परिणाम कांग्रेस के लिए और एक राज्य में सत्ता खोने का कारण बन सकता है।"
राजीव रंजन ने बंगाल की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर ममता बनर्जी पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि जैसे बिहार में एसआईआर के बाद शांति से चुनाव हुए, वैसे ही पश्चिम बंगाल में भी होंगे।
जेडीयू प्रवक्ता ने कहा, "कुछ वीडियो वायरल हुए हैं, जिसमें टीएमसी नेता बीएलओ को धमका रहे हैं। बिहार में एसआईआर समय पर समाप्त हुआ था।" राजीव रंजन ने कहा कि औसतन एक मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता होते हैं। बिहार में तो बीएलओ लगभग 250 परिवारों तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं महसूस कर रहे थे।
उन्होंने कहा, "बिहार में शुरुआत में कई आरोप लगे, लेकिन समयसीमा के भीतर एसआईआर पूरा हुआ और उसी पर चुनाव हुए। ऐसे में पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर हल्ला मचाने का कोई औचित्य नहीं है।"