23 सितंबर 2026
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तमिलनाडु उपचुनाव: टीवीके उम्मीदवारों पर कार्ति चिदंबरम की आपत्ति, बोले — 'टिकट नहीं मिलना चाहिए था'

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तमिलनाडु उपचुनाव: टीवीके उम्मीदवारों पर कार्ति चिदंबरम की आपत्ति, बोले — 'टिकट नहीं मिलना चाहिए था'

सारांश

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने गठबंधन सहयोगी टीवीके के उम्मीदवार चयन पर खुलकर असहमति जताई — कहा कि एआईएडीएमके से आए नेताओं को तुरंत टिकट देने की बजाय पुराने कार्यकर्ताओं को मौका मिलना चाहिए था। यह बयान धारापुरम और मदुरंतकम उपचुनाव से ठीक पहले गठबंधन के भीतर आंतरिक खींचतान को उजागर करता है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने 23 सितंबर 2026 को मदुरै में कहा कि वह टीवीके के उम्मीदवारों के पक्ष में नहीं हैं।
मरागथम कुमारवेल और पी.
सत्यभामा ने इसी वर्ष एआईएडीएमके के टिकट पर जीत दर्ज की थी, फिर जून में इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हुए।
कार्ति का कहना — टिकट पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और फैन क्लब सदस्यों को मिलना चाहिए था।
धारापुरम में पाँच दलों के बीच मुकाबला; पिछले चुनाव में 88.84% मतदान, सत्यभामा ने 16,727 वोटों से जीत दर्ज की थी।
मुख्यमंत्री विजय की पार्टी के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं — दोनों सीटें जीतना सरकार के लिए ज़रूरी।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने 23 सितंबर 2026 को मदुरै में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के उम्मीदवारों के पक्ष में नहीं हैं। उनकी यह टिप्पणी गठबंधन सहयोगी टीवीके के उम्मीदवार चयन पर खुलकर असहमति जताने के रूप में सामने आई है।

उम्मीदवार चयन पर कार्ति की आपत्ति

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके ने के. मरागथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा को उम्मीदवार घोषित किया है। दोनों ने इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के टिकट पर जीत दर्ज की थी, और बाद में पार्टी से इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो गए।

कार्ति चिदंबरम ने कहा, 'मेरा मानना है कि जिन उम्मीदवारों ने अप्रैल-मई में एआईएडीएमके के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की तथा जून में पार्टी से इस्तीफा दे दिया, उन्हें टिकट नहीं दिया जाना चाहिए था।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'टीवीके को इन उम्मीदवारों से इंतजार करने के लिए कहना चाहिए था और अपने उन कार्यकर्ताओं को टिकट देना चाहिए था, जो पहले से पार्टी, संगठन या उनके फैन क्लब से जुड़े रहे हैं।'

टीवीके की लोकप्रियता पर कार्ति का मत

हालांकि कार्ति ने उम्मीदवार चयन पर आपत्ति जताते हुए भी स्वीकार किया कि टीवीके को जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम उम्मीदवारों की बजाय पार्टी की लोकप्रियता का आईना होंगे। यह बयान गठबंधन के भीतर आंतरिक तनाव को भी उजागर करता है।

धारापुरम उपचुनाव: टीवीके के लिए बड़ी परीक्षा

तिरुप्पुर जिले में यह पहला विधानसभा उपचुनाव है। मुख्यमंत्री विजय की पार्टी के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण इस उपचुनाव का महत्व और बढ़ गया है। दोनों सीटों पर जीत से राज्य सरकार की विधायी स्थिति मज़बूत होगी।

धारापुरम से टीवीके उम्मीदवार पी. सत्यभामा का मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) की सुकन्या, एआईएडीएमके की के. भानुमति, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के पी. लक्ष्मणन और नाम तमिलर काची (एनटीके) की कार्तिका से है। यानी पाँच दलों के बीच सीधा मुकाबला है।

पिछले चुनाव के आँकड़े

इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में धारापुरम में 88.84 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। सत्यभामा ने 81,100 वोट हासिल कर डीएमके उम्मीदवार पी. इंद्राणी को 16,727 वोटों के अंतर से हराया था; इंद्राणी को 64,373 वोट मिले थे। टीवीके की एस. गौरी चित्रा 46,438 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थीं, जो कुल मतों का 23.23 प्रतिशत था। गौरतलब है कि अब सत्यभामा उसी टीवीके के टिकट पर उतरी हैं जिस पार्टी ने उन्हें पहले हराया था — यह राजनीतिक समीकरणों का दिलचस्प पलटाव है।

आगे की राह

यह उपचुनाव टीवीके के लिए केवल सीटें जीतने का नहीं, बल्कि अपनी संगठनात्मक साख साबित करने का भी अवसर है। कार्ति चिदंबरम की आपत्ति गठबंधन के भीतर एक महत्वपूर्ण संकेत है — यदि टीवीके जीतती है, तो पार्टी की लोकप्रियता का डंका बजेगा; हारती है, तो उम्मीदवार चयन पर सवाल और गहरे होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहरे में यह इंडिया गठबंधन के भीतर क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के बीच बढ़ते असंतुलन की झलक है। टीवीके एक नई पार्टी है जो अपनी ज़मीन जल्दी बनाना चाहती है — इसीलिए जीते हुए विधायकों को तुरंत टिकट देना उसकी रणनीतिक मजबूरी थी। लेकिन कांग्रेस के नज़रिए से यह 'दल-बदलुओं को पुरस्कृत करने' की नज़ीर है जो पार्टी की वैचारिक साख को नुकसान पहुँचाती है। असली सवाल यह है कि यदि टीवीके इन विवादास्पद उम्मीदवारों के साथ भी जीत जाती है, तो क्या भविष्य में गठबंधन में कांग्रेस की दावेदारी और कमज़ोर होगी।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्ति चिदंबरम टीवीके के उम्मीदवारों के विरोध में क्यों हैं?
कार्ति चिदंबरम का कहना है कि टीवीके के दोनों उम्मीदवार — के. मरागथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा — ने अप्रैल-मई 2026 में एआईएडीएमके के टिकट पर चुनाव जीता और जून में पार्टी छोड़कर टीवीके में आए। उनका मत है कि ऐसे नेताओं की बजाय पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को अवसर मिलना चाहिए था।
धारापुरम उपचुनाव में कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में हैं?
धारापुरम सीट पर पाँच उम्मीदवार हैं — टीवीके की पी. सत्यभामा, डीएमके की सुकन्या, एआईएडीएमके की के. भानुमति, सीपीआई के पी. लक्ष्मणन और नाम तमिलर काची (एनटीके) की कार्तिका। यह सीट तिरुप्पुर जिले का पहला विधानसभा उपचुनाव है।
टीवीके के लिए यह उपचुनाव इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टीवीके के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं है। धारापुरम और मदुरंतकम दोनों सीटों पर जीत से पार्टी की विधायी स्थिति मज़बूत होगी और सरकार का कामकाज सुचारु होगा।
पिछले विधानसभा चुनाव में धारापुरम का क्या परिणाम रहा था?
इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में धारापुरम में 88.84 प्रतिशत मतदान हुआ था। पी. सत्यभामा ने 81,100 वोट पाकर डीएमके की पी. इंद्राणी को 16,727 वोटों से हराया था। टीवीके की एस. गौरी चित्रा 46,438 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थीं।
क्या कांग्रेस टीवीके को इन उपचुनावों में समर्थन देगी?
कार्ति चिदंबरम ने व्यक्तिगत असहमति जताई है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक गठबंधन नीति पर कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी माना कि टीवीके को जनता का व्यापक समर्थन हासिल है और चुनाव नतीजे पार्टी की लोकप्रियता को दर्शाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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