क्या कश्मीर की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने फरार महिला तस्कर को गिरफ्तार किया?
सारांश
Key Takeaways
- महिला ड्रग तस्कर की गिरफ्तारी से नशीले पदार्थों की तस्करी में कमी आएगी।
- एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई से सुरक्षा बलों की तत्परता का पता चलता है।
- यह गिरफ्तारी आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने में सहायक होगी।
श्रीनगर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्ती और मुहिम को जारी रखते हुए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) कश्मीर ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। टीम ने एनडीपीएस एक्ट के एक गंभीर मामले में पिछले तीन वर्षों से फरार चल रही महिला ड्रग तस्कर को पकड़ लिया है।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए प्रेस नोट में इस कार्रवाई की जानकारी दी गई है। प्रेस नोट में कहा गया है कि गिरफ्तार की गई तस्कर की पहचान तमन्ना अशरफ, पुत्री मोहम्मद अशरफ, निवासी बटमालू श्रीनगर के रूप में हुई है। वह एफआईआर नंबर 10/2023 के तहत धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के मामले में वांछित थी, जो एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स जम्मू में दर्ज किया गया था।
टास्क फोर्स ने बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए यह महिला तस्कर पिछले तीन वर्षों से लगातार विभिन्न राज्यों में छिपी हुई थी। जांच के दौरान पता चला है कि तमन्ना अशरफ सात किलोग्राम से अधिक चरस की तस्करी में शामिल थी, जिसे कूरियर सेवाओं के माध्यम से मुंबई भेजा जा रहा था।
इस मामले की जांच शुरू होने के बाद से वह कानून के हाथों से बचती रही और लगातार ठिकाने बदल रही थी। हालांकि, एएनटीएफ जम्मू-कश्मीर की सतत निगरानी, सशक्त खुफिया सूचना और रणनीतिक योजना के चलते उसे गुरुवार को उसके निवास स्थान बटमालू, श्रीनगर से पकड़ लिया गया। इस पूरी कार्रवाई को बेहद सतर्कता और गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया।
प्रेस नोट में आगे कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के निरंतर प्रयासों और इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशन के चलते यह गिरफ्तारी सफल हुई, जो उनके नारकोटिक्स अपराधों को रोकने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ज्ञात हो कि सुरक्षा बल आतंकवाद के समर्थन तंत्र को समाप्त करने के लिए आतंकवादियों, उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और समर्थकों के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहे हैं। सुरक्षा बलों की निगरानी में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले, ड्रग पेडलर और हवाला रैकेट में शामिल लोग भी हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इन अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन का उपयोग अंततः जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। अदालती आदेशों के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध वित्तीय गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर रही है।