पवन बंसल का केजरीवाल पर हमला: 'सत्याग्रह हास्यास्पद, न्यायपालिका के खिलाफ, इतिहास में पहली बार जज चुनने की माँग'
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने 29 अप्रैल को चंडीगढ़ में केजरीवाल के सत्याग्रह को "हास्यास्पद और बेतुका" बताया।
- बंसल के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश को पत्र लिखकर जज चुनने की माँग न्यायपालिका के खिलाफ है और इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।
- AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के BJP में विलय को बंसल ने "संविधान पर हमला" और राज्यसभा सभापति का फैसला गलत बताया।
- RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'हिंदू राष्ट्र' बयान पर बंसल ने भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान और विविधता को देश की ताकत बताया।
- बंसल ने कहा कि AAP सांसदों का पार्टी छोड़ना "अनैतिक" है और AAP को इस मामले को अदालत में चुनौती देनी चाहिए।
कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद पवन कुमार बंसल ने 29 अप्रैल को चंडीगढ़ में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के 'सत्याग्रह' को "हास्यास्पद और पूरी तरह बेतुका" करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम न्यायपालिका के खिलाफ है और इतिहास में पहली बार किसी आरोपी ने अपने केस के लिए जज चुनने की माँग की है।
केजरीवाल के सत्याग्रह पर बंसल की तीखी प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को लिखे पत्र और 'सत्याग्रह' की घोषणा पर बंसल ने कहा, "मुझे यह हास्यास्पद और पूरी तरह से बेतुका लगता है। यह न्यायपालिका के खिलाफ है।" उन्होंने आगे कहा कि केजरीवाल खुद को आम लोगों से ऊपर समझते हैं और उनकी पार्टी ने सिविल सोसायटी आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाया है।
बंसल ने स्पष्ट किया कि जज चुनने का अधिकार मुख्य न्यायाधीश का होता है, किसी आरोपी पक्ष का नहीं। उनके अनुसार, "अगर जज चुनने की आजादी मिलने लगेगी तो देश में अफरातफरी का माहौल हो जाएगा। इतिहास में पहली बार ऐसा किसी आरोपी ने अपने केस के लिए जज चुनने की माँग की होगी।"
AAP सांसदों के भाजपा में विलय पर कड़ा रुख
पश्चिम बंगाल चुनाव और AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय के मुद्दे पर बंसल ने कहा कि भाजपा केंद्र और सभी राज्यों में अपनी सरकार बनाने की कोशिश में हर तरह के हथकंडे अपना रही है। उन्होंने इस विलय को "संविधान पर हमला" बताया और कहा कि इस मामले में राज्यसभा सभापति का फैसला उनके अनुसार गलत है।
बंसल ने यह भी कहा कि AAP को इस मामले को अदालत में चुनौती देनी चाहिए और इस प्रकरण में राष्ट्रपति की कोई भूमिका नहीं हो सकती। उन्होंने AAP सांसदों के पार्टी छोड़ने को "अनैतिक" करार देते हुए कहा, "आम धारणा यह है कि AAP एक पार्टी नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल एक खास माहौल बनाने के लिए किया गया था, जिसे भाजपा उस समय आकार दे रही थी।"
हिंदू राष्ट्र बयान पर धर्मनिरपेक्षता की दलील
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के 'हिंदू राष्ट्र' संबंधी बयान पर बंसल ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और इसकी विविधता ही इसकी असली ताकत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखते हुए बेहतर शासन पर ध्यान दिया जाए।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली उच्च न्यायालय में केजरीवाल से जुड़े मामलों की सुनवाई जारी है और विपक्षी दलों के बीच AAP की भूमिका को लेकर बहस तेज हो रही है। बंसल के बयान संकेत देते हैं कि कांग्रेस और AAP के बीच की खाई राजनीतिक स्तर पर और गहरी हो रही है। आने वाले चुनावों में यह तनाव विपक्षी एकता की परीक्षा लेगा।