क्या केंद्रीय बजट से पहले शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री की मुलाकात महत्वपूर्ण है?
सारांश
Key Takeaways
- शिक्षा मंत्री ने स्कूल और उच्च शिक्षा के मुद्दों पर चर्चा की।
- आगामी बजट में शिक्षा के लिए आवंटन की उम्मीद जताई गई।
- स्कूल प्रबंधन समितियां शिक्षा में सुधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- मोदी सरकार के अनुसार शिक्षा में बड़े निवेश की संभावनाएं हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार विद्यालय प्रशासन में सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। यह मुलाकात केंद्रीय बजट से पहले हुई थी और इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है।
इस बैठक में, शिक्षा मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र से संबंधित महत्वाकांक्षाओं को वित्त मंत्री के साथ साझा किया। उन्होंने स्कूली और उच्च शिक्षा के मुद्दों पर बातचीत की और शिक्षा के इकोसिस्टम के समग्र विकास के लिए विभिन्न विचारों और प्रस्तावों पर चर्चा की।
गौरतलब है कि पिछले वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बजटीय घोषणाएं की गई हैं। बजट में शोध और बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर सीखने के लिए कई प्रावधान किए गए थे। इस बैठक के बाद, धर्मेंद्र प्रधान ने बजट में शिक्षा के लिए अच्छे आवंटन की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि मोदी सरकार की परंपरा के अनुसार बजट 2026-27 में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में पहले से कहीं अधिक बड़े और साहसिक निवेश देखने को मिलेंगे। ये निवेश रोजगार-आधारित विकास को तेजी देंगे।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि शिक्षा में यह निवेश विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक के दौरान, स्कूल प्रबंधन विकास समिति–2026 के गठन से संबंधित मसौदा दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की गई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार, सरकार विद्यालय प्रशासन को अधिक सहभागी बनाने और स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने शैक्षणिक उद्देश्यों की प्राप्ति, विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को सशक्त बनाने और विद्यालयी इकोसिस्टम को मजबूत करने का भी उल्लेख किया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी) प्रभावी स्कूल प्रशासन की महत्वपूर्ण उत्प्रेरक हैं, जो शैक्षणिक परिणामों में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने में मदद करती हैं।
इसके अलावा, ये समितियां शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने और अभिभावकों और समुदाय की आवाज़ को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने का कार्य भी करती हैं। साथ ही, स्कूल प्रबंधन समितियां विद्यालयी शिक्षा को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।