केरल विधानसभा चुनाव: प्रचार का शोर थमा, अब मतदान की बारी

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केरल विधानसभा चुनाव: प्रचार का शोर थमा, अब मतदान की बारी

सारांश

केरल विधानसभा चुनावों में प्रचार का शोर समाप्त हो गया है और अब मतदाताओं की बारी है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में हैं। जानिए चुनावी माहौल की विशेषताएँ और मतदाता की भूमिका।

Key Takeaways

  • प्रचार का समापन, अब मतदान की बारी।
  • राज्यभर में राजनीतिक गतिविधियों का चरम।
  • मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की चुनावी चुनौती।
  • भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला।
  • कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

तिरुवनंतपुरम, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा चुनाव के लिए तीन हफ्तों से अधिक समय तक चले जोरदार और हाई-वोल्टेज चुनाव प्रचार का मंगलवार शाम 6 बजे समापन हो गया। इसके साथ ही राज्य में उत्साह और राजनीतिक गतिविधियों का स्तर चरम पर पहुंच गया है।

प्रचार के अंतिम दिन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कार्यकर्ता और उम्मीदवार सड़कों पर उतरे और शक्ति प्रदर्शन किया। रोड शो, ढोल-नगाड़े, रंग-बिरंगे जुलूस और नारेबाजी के दौरान पूरे राज्य में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

यह केरल की चुनावी संस्कृति का अनूठा दृश्य रहा, जहां प्रचार के अंतिम दिन को किसी बड़े आयोजन की तरह मनाया जाता है। कई लोगों के लिए यह किसी राजनीतिक नाटक का अंतिम दृश्य जैसा अनुभव हुआ।

अब बुधवार को “शांत प्रचार” (साइलेंट कैंपेन) का दिन होगा, जब सभी राजनीतिक दलों को प्रचार से विराम लेना होगा। इस दौरान नेता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रहकर अंतिम रणनीति तैयार करेंगे।

गुरुवार को मतदान होगा, जहां 2.71 करोड़ से अधिक मतदाता ईवीएम के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग कर राज्य की अगली सरकार का निर्णय करेंगे।

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच माना जा रहा है। विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश में हैं।

वहीं, कांग्रेस की ओर से स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी ने वायनाड में प्रचार करते हुए दावा किया है कि यूडीएफ इस बार बड़ी जीत हासिल कर सरकार बनाएगी।

उधर, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भरोसा जताया है कि पार्टी इस बार विधानसभा में अपना खाता खोलने के साथ कई सीटें जीत सकती है।

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान तीखे बयान, बड़े रोड शो और नेताओं के बीच जुबानी हमले भी देखने को मिले, जिससे माहौल और अधिक गरमाया रहा। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए राज्यभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

अब जब प्रचार का शोर थम गया है, केरल एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। दावे और भरोसे अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब मतदाताओं के हाथ में है।

Point of View

और अब मतदाता अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह चुनावी प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहां सभी दल अपनी ताकत दिखाने में जुटे हुए थे।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

केरल विधानसभा चुनाव कब हैं?
केरल विधानसभा चुनाव का मतदान 6 अप्रैल को होगा।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन किस पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं?
पिनाराई विजयन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
कांग्रेस की स्टार प्रचारक कौन हैं?
कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी हैं।
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन का क्या महत्व है?
चुनाव प्रचार का अंतिम दिन राजनीतिक दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन का अवसर होता है।
मतदाता कितने हैं इस चुनाव में?
इस चुनाव में 2.71 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
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