अंजू बॉबी जॉर्ज: विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट की कहानी
सारांश
Key Takeaways
- अंजू बॉबी जॉर्ज ने विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट होने का गौरव प्राप्त किया।
- उनका जन्म 19 अप्रैल, 1977 को केरल के कोट्टायम में हुआ।
- उन्होंने 2003 में पेरिस में कांस्य पदक जीता और 2002 में एशियाई खेलों में स्वर्ण भी जीता।
- भारत सरकार ने उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है, जिनमें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री शामिल हैं।
- उनका करियर और संघर्ष हर महिला एथलीट के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अंजू बॉबी जॉर्ज भारत की एक प्रतिष्ठित एथलीट मानी जाती हैं। ऊंची कूद में, उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत का नाम ऊँचा किया है।
अंजू का जन्म 19 अप्रैल, 1977 को केरल के कोट्टायम जिले के चीरनचीरा नामक छोटे कस्बे में हुआ। उन्होंने मात्र पाँच वर्ष की आयु में एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भाग लेना आरंभ किया। अंजू को अपने माता-पिता से इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भरपूर समर्थन मिला। स्कूल के दिनों में ही वह ऊंची कूद की एक प्रतिभाशाली एथलीट के रूप में उभरीं।
अंजू बॉबी जॉर्ज का करियर सफलताओं से भरा रहा है। उन्होंने पी.टी. उषा को अपना आदर्श मानते हुए, अथक मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ एथलेटिक्स में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया और लाखों महिला एथलीटों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में पदक जीतकर भारत का नाम गौरवान्वित किया।
उनकी कुछ प्रमुख उपलब्धियों में वे विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं। 2003 में पेरिस में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 1999 में दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक और 2001 में लम्बी कूद में 6.74 मीटर की छलांग लगाते हुए रिकॉर्ड बनाया। उनकी विश्व रैंकिंग 13वीं रही है, और विश्व चैंपियनशिप में उन्हें 7वीं रैंकिंग प्राप्त हुई।
2002 में मैनचेस्टर में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता। उसी वर्ष बुसान में आयोजित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक भी जीते। 2004 में एथेंस ओलंपिक में उन्हें ध्वजवाहक बनने का सम्मान मिला। 2005 में वर्ल्ड एथलेटिक्स फाइनल में स्वर्ण पदक जीतना उन्होंने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना। 2008 में तीसरी दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
एथलेटिक्स में उनके योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2002 में अर्जुन पुरस्कार, 2003 में 'खेल रत्न', और 2004 में पद्मश्री से सम्मानित किया।