सबरीमाला वर्चुअल कतार शुल्क ₹5 से ₹10 होने पर केरल BJP का विरोध, कानूनी चुनौती की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केरल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सबरीमाला वर्चुअल कतार बुकिंग शुल्क को ₹5 से बढ़ाकर ₹10 किए जाने के त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्रस्तावित निर्णय का कड़ा विरोध किया है। पार्टी के प्रदेश महासचिव अनूप एंटनी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में कहा कि यह वृद्धि आगामी तीर्थयात्रा सीजन से पहले श्रद्धालुओं पर अनुचित वित्तीय बोझ डालती है। BJP ने चेतावनी दी है कि यदि बोर्ड ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो पार्टी कानूनी चुनौती के साथ-साथ संगठनात्मक विरोध प्रदर्शन करेगी।
शुल्क वृद्धि का इतिहास
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने शुरुआत में सबरीमाला वर्चुअल कतार बुकिंग सेवा पूरी तरह निःशुल्क रखी थी। बाद में बोर्ड ने इस पर ₹5 प्रति बुकिंग का शुल्क लागू किया, और अब इसे दोगुना कर ₹10 करने का प्रस्ताव है। एंटनी ने कहा कि बोर्ड इस वृद्धि को मुफ्त शौचालय सुविधाएँ उपलब्ध कराने के नाम पर उचित ठहरा रहा है, जो कि तीर्थयात्रियों की आँखों में धूल झोंकने जैसा है।
श्रद्धालुओं पर वित्तीय असर
एंटनी ने तर्क दिया कि सबरीमाला पर अधिकांश भक्त परिवारों या बड़े समूहों में आते हैं, ऐसे में प्रत्येक सदस्य के लिए शुल्क चुकाना संचयी रूप से भारी हो जाता है। उन्होंने कहा, 'यह बढ़ोतरी भविष्य में और अधिक शुल्क वृद्धि की नींव बन सकती है।' गौरतलब है कि अगले महीने से दो महीने का वार्षिक तीर्थयात्रा सीजन शुरू होने वाला है, जिसमें लाखों श्रद्धालु पहाड़ी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
BJP नेता ने आरोप लगाया कि जिन शौचालय सुविधाओं के लिए तीर्थयात्री पहले से भुगतान करते हैं, वे भी अक्सर खराब हालत में और पानी की कमी से जूझती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बोर्ड की सशुल्क सुविधाएँ भी ठीक से संचालित नहीं हो रही हैं, तो वह मुफ्त शौचालय सेवाएँ देने का वादा किस आधार पर कर सकता है। एंटनी ने यह भी उल्लेख किया कि सबरीमाला में सोने और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की कथित चोरी से जुड़े विवाद पहले से बोर्ड की साख पर सवाल खड़े कर चुके हैं।
BJP की चेतावनी और राजनीतिक रुख
एंटनी ने स्पष्ट किया कि यदि बोर्ड यह प्रस्ताव आगे बढ़ाता है, तो भाजपा इसे न्यायालय में चुनौती देगी और जनांदोलन भी करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार आवश्यक सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं, बशर्ते बोर्ड अपनी अक्षमता स्वीकार करे। आलोचकों का कहना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब केरल में अगले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।
आगे क्या
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगामी तीर्थयात्रा सीजन शुरू होने से पहले बोर्ड इस मसले पर अपना अंतिम निर्णय स्पष्ट कर सकता है। भाजपा के संभावित कानूनी कदम और श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए, यह मुद्दा केरल में राजनीतिक रूप से और गरम होने की संभावना है।