हिमाचल वन्यजीव पार्क प्रवेश शुल्क दोगुना: ₹150 से ₹300, BJP का कांग्रेस सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य के वन्यजीव पार्कों और अभयारण्यों में भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹150 से बढ़ाकर ₹300 कर दिया है — यानी 100 प्रतिशत की वृद्धि। 14 जून 2026 को जारी इस अधिसूचना ने पहाड़ी राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है नई शुल्क व्यवस्था
मुख्य सचिव-सह-अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) के.के. पंत द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क भी दोगुना कर ₹600 कर दिया गया है। इसके अलावा संरक्षित वन क्षेत्रों में पेशेवर फोटोग्राफी और सिनेमैटोग्राफी के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है।
हिमाचल प्रदेश में कुल 28 वन्यजीव अभयारण्य हैं। शिमला जिले में शिमला वाटर कैचमेंट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, दरंगहाटी वाइल्डलाइफ सेंचुरी और तलरा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी स्थित हैं। सोलन जिले में चैल और मजाथल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी हैं, जबकि कुल्लू जिले में तीर्थन, सैंज, कैस, कनावर, खोखन और मनाली क्षेत्र के अभयारण्य आते हैं।
भाजपा की कड़ी आलोचना
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, 'राहुल गांधी का खटाखट इकोनॉमिक मॉडल हिमाचल प्रदेश को अंधेरे में धकेल चुका है और कांग्रेस सरकार राज्य की जनता को लूट रही है।' भाजपा नेताओं का आरोप है कि यह शुल्क वृद्धि एक अलग फैसला नहीं, बल्कि जनता पर आर्थिक बोझ डालने के उस सिलसिले की नई कड़ी है जो कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से जारी है।
विपक्षी नेताओं ने पिछले कदमों की लंबी सूची गिनाई — मई 2025 में बस किराए में 15 प्रतिशत वृद्धि, 2024 में बिजली सब्सिडी वापस लेना, 2023 में बिजली दरों में बढ़ोतरी, 2024 में राशन की कीमतें बढ़ाना और बिजली-पानी पर सेस, तथा 2024 में प्रति यूनिट 10 पैसे का मिल्क सेस लागू करना।
राज्य की वित्तीय स्थिति
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 के अंत तक राज्य पर कुल बकाया कर्ज ₹95,632 करोड़ था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2019 से 2024 के बीच सार्वजनिक ऋण से प्राप्त धनराशि का 52.99% से 74.11% तक हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में खर्च किया गया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधानसभा में स्वयं जानकारी दी थी कि 31 जनवरी 2026 तक राज्य का कुल कर्ज लगभग ₹1.01 लाख करोड़ तक पहुँच चुका है। वर्ष 2025-26 के लिए ₹58,514 करोड़ के बजट अनुमान में कुल बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और कर्ज चुकाने के लिए निर्धारित है।
भ्रष्टाचार के आरोप भी
भाजपा नेताओं ने सुक्खू सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उनके अनुसार, बहु-करोड़ रुपये के खनन घोटाले, फर्जी आयुष्मान भारत कार्ड घोटाले, बागवानी विभाग में फर्जी फलदार पौधों की खरीद और हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड से जुड़े कथित ₹175 करोड़ के टेंडर घोटाले जैसे मामलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब हिमाचल प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। आलोचकों का कहना है कि पर्यटन पर बढ़ता शुल्क-भार उस राज्य के लिए प्रतिकूल संकेत है जिसकी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर बड़े पैमाने पर निर्भर है। सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।