30 जुलाई 2026
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हिमाचल वन्यजीव पार्क प्रवेश शुल्क दोगुना: ₹150 से ₹300, BJP का कांग्रेस सरकार पर हमला

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हिमाचल वन्यजीव पार्क प्रवेश शुल्क दोगुना: ₹150 से ₹300, BJP का कांग्रेस सरकार पर हमला

सारांश

कर्ज में डूबी हिमाचल कांग्रेस सरकार ने वन्यजीव पार्कों की एंट्री फीस दोगुनी की — भारतीयों के लिए ₹150 से ₹300। BJP ने ₹1.01 लाख करोड़ के कर्ज और CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए इसे जनता पर बोझ डालने की आदत बताया। चुनावी साल में यह फैसला सियासी आग में घी का काम कर रहा है।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन्यजीव अभयारण्यों में भारतीय पर्यटकों की प्रवेश फीस ₹150 से बढ़ाकर ₹300 और विदेशी पर्यटकों की ₹600 कर दी।
पंत , मुख्य सचिव-सह-अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन), द्वारा 14 जून 2026 को जारी की गई।
CAG रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 के अंत तक राज्य पर ₹95,632 करोड़ का कर्ज था; मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक यह ₹1.01 लाख करोड़ हो गया।
2025-26 के ₹58,514 करोड़ के बजट का लगभग 70% वेतन, पेंशन, ब्याज और कर्ज चुकाने में जाता है।
BJP ने मई 2025 में बस किराया वृद्धि, बिजली सब्सिडी कटौती, राशन मूल्य वृद्धि सहित कई पिछले फैसलों को जोड़कर सरकार पर निरंतर आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया।
BJP नेताओं ने खनन घोटाले, फर्जी आयुष्मान कार्ड और कथित ₹175 करोड़ के HPSEBL टेंडर घोटाले का भी उल्लेख किया।

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य के वन्यजीव पार्कों और अभयारण्यों में भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹150 से बढ़ाकर ₹300 कर दिया है — यानी 100 प्रतिशत की वृद्धि। 14 जून 2026 को जारी इस अधिसूचना ने पहाड़ी राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है नई शुल्क व्यवस्था

मुख्य सचिव-सह-अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) के.के. पंत द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क भी दोगुना कर ₹600 कर दिया गया है। इसके अलावा संरक्षित वन क्षेत्रों में पेशेवर फोटोग्राफी और सिनेमैटोग्राफी के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है।

हिमाचल प्रदेश में कुल 28 वन्यजीव अभयारण्य हैं। शिमला जिले में शिमला वाटर कैचमेंट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, दरंगहाटी वाइल्डलाइफ सेंचुरी और तलरा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी स्थित हैं। सोलन जिले में चैल और मजाथल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी हैं, जबकि कुल्लू जिले में तीर्थन, सैंज, कैस, कनावर, खोखन और मनाली क्षेत्र के अभयारण्य आते हैं।

भाजपा की कड़ी आलोचना

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, 'राहुल गांधी का खटाखट इकोनॉमिक मॉडल हिमाचल प्रदेश को अंधेरे में धकेल चुका है और कांग्रेस सरकार राज्य की जनता को लूट रही है।' भाजपा नेताओं का आरोप है कि यह शुल्क वृद्धि एक अलग फैसला नहीं, बल्कि जनता पर आर्थिक बोझ डालने के उस सिलसिले की नई कड़ी है जो कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से जारी है।

विपक्षी नेताओं ने पिछले कदमों की लंबी सूची गिनाई — मई 2025 में बस किराए में 15 प्रतिशत वृद्धि, 2024 में बिजली सब्सिडी वापस लेना, 2023 में बिजली दरों में बढ़ोतरी, 2024 में राशन की कीमतें बढ़ाना और बिजली-पानी पर सेस, तथा 2024 में प्रति यूनिट 10 पैसे का मिल्क सेस लागू करना।

राज्य की वित्तीय स्थिति

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 के अंत तक राज्य पर कुल बकाया कर्ज ₹95,632 करोड़ था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2019 से 2024 के बीच सार्वजनिक ऋण से प्राप्त धनराशि का 52.99% से 74.11% तक हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में खर्च किया गया।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधानसभा में स्वयं जानकारी दी थी कि 31 जनवरी 2026 तक राज्य का कुल कर्ज लगभग ₹1.01 लाख करोड़ तक पहुँच चुका है। वर्ष 2025-26 के लिए ₹58,514 करोड़ के बजट अनुमान में कुल बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और कर्ज चुकाने के लिए निर्धारित है।

भ्रष्टाचार के आरोप भी

भाजपा नेताओं ने सुक्खू सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उनके अनुसार, बहु-करोड़ रुपये के खनन घोटाले, फर्जी आयुष्मान भारत कार्ड घोटाले, बागवानी विभाग में फर्जी फलदार पौधों की खरीद और हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड से जुड़े कथित ₹175 करोड़ के टेंडर घोटाले जैसे मामलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब हिमाचल प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। आलोचकों का कहना है कि पर्यटन पर बढ़ता शुल्क-भार उस राज्य के लिए प्रतिकूल संकेत है जिसकी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर बड़े पैमाने पर निर्भर है। सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लक्षण है। असली सवाल यह है कि जब बजट का 70% प्रतिबद्ध व्यय में जाता है, तो विकास और पर्यटन बुनियादी ढाँचे के लिए गुंजाइश कहाँ बचती है। BJP के आरोप राजनीतिक रूप से तीखे हैं, लेकिन वे उस ढाँचागत राजकोषीय समस्या को नहीं छूते जो पिछली सरकारों के दौर में भी पनपती रही।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश में वन्यजीव पार्क की प्रवेश फीस कितनी बढ़ी है?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹150 से बढ़ाकर ₹300 और विदेशी पर्यटकों के लिए ₹600 कर दिया है — दोनों में 100% की वृद्धि। यह अधिसूचना 14 जून 2026 को जारी की गई।
हिमाचल प्रदेश पर कुल कितना कर्ज है?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में बताया कि 31 जनवरी 2026 तक राज्य का कुल कर्ज लगभग ₹1.01 लाख करोड़ है। CAG रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 के अंत में यह ₹95,632 करोड़ था।
BJP ने इस फैसले पर क्या कहा?
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार जनता को लूट रही है और यह फीस वृद्धि वित्तीय कुप्रबंधन का नतीजा है। BJP नेताओं ने बस किराया, बिजली और राशन मूल्य वृद्धि सहित पिछले कई फैसलों का हवाला देते हुए इसे एक निरंतर पैटर्न बताया।
हिमाचल प्रदेश में कितने वन्यजीव अभयारण्य हैं और कहाँ हैं?
राज्य में कुल 28 वन्यजीव अभयारण्य हैं। शिमला जिले में तीन (शिमला वाटर कैचमेंट, दरंगहाटी, तलरा), सोलन में दो (चैल, मजाथल) और कुल्लू जिले में तीर्थन, सैंज, कैस, कनावर, खोखन व मनाली क्षेत्र के अभयारण्य शामिल हैं।
हिमाचल के बजट का इतना बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में क्यों जाता है?
2025-26 के ₹58,514 करोड़ के बजट का लगभग 70% वेतन, पेंशन, ब्याज और कर्ज चुकाने में निर्धारित है। CAG रिपोर्ट के अनुसार 2019-2024 के बीच सार्वजनिक ऋण से मिली राशि का 52.99% से 74.11% तक हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में खर्च हुआ, जो एक गहरे राजकोषीय दबाव को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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