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हिमाचल CM सुक्खू ने NICDIT बैठक में ऊना और नालागढ़ औद्योगिक पार्कों को शीघ्र मंजूरी की माँग की

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हिमाचल CM सुक्खू ने NICDIT बैठक में ऊना और नालागढ़ औद्योगिक पार्कों को शीघ्र मंजूरी की माँग की

सारांश

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुक्खू ने NICDIT की तीसरी बैठक में वित्त मंत्री सीतारमण से ऊना और नालागढ़ के दो औद्योगिक पार्कों — कुल ₹234.39 करोड़ की लागत — को शीघ्र मंजूरी देने की माँग की। साथ ही बद्दी-नालागढ़ रेलवे विस्तार की दरकार भी रखी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 17 अगस्त 2026 को NICDIT की तीसरी बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया; बैठक की अध्यक्षता निर्मला सीतारमण ने की।
ऊना जिले के बीतन गाँव में 75 एकड़ , ₹80 करोड़ लागत का औद्योगिक पार्क प्रस्तावित।
नालागढ़ (सोलन) के मझोली औद्योगिक क्षेत्र में 150 एकड़ , ₹154.39 करोड़ लागत का दूसरा पार्क प्रस्तावित।
दोनों परियोजनाएँ भव्या योजना के पहले चरण के तहत NICDIT को पहले ही सौंपी जा चुकी हैं।
सुक्खू ने बद्दी-नालागढ़ रेलवे लाइन के विस्तार की भी माँग की, ताकि रसद लागत घटे और निजी निवेश बढ़े।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) के सर्वोच्च निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लेते हुए केंद्र सरकार से राज्य के दो प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने की।

प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों का विवरण

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या) के पहले चरण के अंतर्गत राज्य सरकार ने NICDIT को दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पहले ही सौंप दिए हैं। पहला प्रस्ताव ऊना जिले के बीतन गाँव में 75 एकड़ भूमि पर ₹80 करोड़ की लागत से औद्योगिक पार्क विकसित करने का है। दूसरा प्रस्ताव सोलन जिले के नालागढ़ स्थित मझोली औद्योगिक क्षेत्र में 150 एकड़ भूमि पर ₹154.39 करोड़ की लागत से औद्योगिक पार्क स्थापित करने का है। दोनों पार्कों में आधुनिक प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना सुविधाएँ प्रस्तावित हैं।

रोज़गार और निवेश पर असर

मुख्यमंत्री ने बैठक में रेखांकित किया कि ये परियोजनाएँ राज्य में औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक प्रगति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से दोनों प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की, ताकि ज़मीनी कार्यान्वयन जल्द से जल्द आरंभ हो सके। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश पहाड़ी भूगोल और सीमित औद्योगिक भूमि के कारण मैदानी राज्यों की तुलना में निवेश आकर्षण में पिछड़ता रहा है, और ये पार्क उस अंतर को पाटने का प्रयास हैं।

रेल संपर्क और रसद अवसंरचना की माँग

सुक्खू ने औद्योगिक विस्तार को टिकाऊ बनाने के लिए रसद और परिवहन अवसंरचना को मज़बूत करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से बद्दी-नालागढ़ रेलवे लाइन के विस्तार की माँग की, यह तर्क देते हुए कि बेहतर रेल संपर्क से रसद लागत घटेगी, उद्योगों को बाज़ारों तक सीधी पहुँच मिलेगी, विनिर्माण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निजी निवेश को और प्रोत्साहन मिलेगा।

NICDIT कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम का लक्ष्य देश भर में औद्योगिक गलियारों का एक सुदृढ़ नेटवर्क स्थापित करना है, जो आर्थिक विकास के इंजन के रूप में कार्य करे, औद्योगीकरण को गति दे और रोज़गार के व्यापक अवसर सृजित करे। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी निवेश का विकेंद्रीकरण करने पर ज़ोर दे रही है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री सुक्खू ने आधुनिक अवसंरचना और निवेशक-हितैषी नीतियों के ज़रिये राज्य में एक सशक्त औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। अब केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद ही इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती मंजूरी के बाद की है। पहाड़ी राज्यों में 'प्लग-एंड-प्ले' का वादा अक्सर भूमि अधिग्रहण विवादों और पर्यावरणीय मंजूरियों की लंबी प्रक्रिया में उलझ जाता है। बद्दी-नालागढ़ रेलवे लाइन की माँग दशकों पुरानी है — इसे फिर से उठाना ज़रूरी है, पर केंद्र की प्राथमिकता सूची में इसकी स्थिति अभी अस्पष्ट है। ₹234.39 करोड़ की ये दोनों परियोजनाएँ तभी सार्थक होंगी जब रोज़गार सृजन के सत्यापन-योग्य लक्ष्य तय किए जाएँ — अन्यथा ये भी 'घोषणा से ज़मीन तक' की लंबी यात्रा में खो सकती हैं।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NICDIT की तीसरी बैठक में हिमाचल प्रदेश ने क्या माँग की?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऊना के बीतन गाँव (₹80 करोड़, 75 एकड़) और नालागढ़ के मझोली क्षेत्र (₹154.39 करोड़, 150 एकड़) में प्रस्तावित दो औद्योगिक पार्कों को शीघ्र केंद्रीय मंजूरी देने की माँग की। ये प्रस्ताव भव्या योजना के पहले चरण के तहत NICDIT को पहले ही सौंपे जा चुके हैं।
NICDIT क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
NICDIT यानी राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट, देश भर में औद्योगिक गलियारों का नेटवर्क स्थापित करने वाली केंद्रीय संस्था है। इसका लक्ष्य विश्व स्तरीय अवसंरचना विकसित करना, निवेश आकर्षित करना और रोज़गार के अवसर सृजित करना है।
हिमाचल प्रदेश के प्रस्तावित औद्योगिक पार्क कहाँ बनेंगे?
पहला पार्क ऊना जिले के बीतन गाँव में 75 एकड़ में ₹80 करोड़ की लागत से, और दूसरा सोलन जिले के नालागढ़ स्थित मझोली औद्योगिक क्षेत्र में 150 एकड़ में ₹154.39 करोड़ की लागत से प्रस्तावित है। दोनों में आधुनिक प्लग-एंड-प्ले सुविधाएँ होंगी।
बद्दी-नालागढ़ रेलवे लाइन विस्तार की माँग क्यों की गई?
मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार, बेहतर रेल संपर्क से रसद लागत घटेगी, उद्योगों को बाज़ारों तक सीधी पहुँच मिलेगी और निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। यह माँग हिमाचल के पहाड़ी भूगोल में औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए ज़रूरी मानी जा रही है।
इन परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को क्या फायदा होगा?
मुख्यमंत्री के अनुसार, ये परियोजनाएँ राज्य में औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएँगी। प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना से निवेशकों को तुरंत उत्पादन शुरू करने की सुविधा मिलेगी, जिससे बड़े पैमाने पर निजी पूँजी आकर्षित होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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