केरल कांग्रेस में गुटबाजी: उन्नीथन ने सुधाकरन माथर पर कार्रवाई की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
केरल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का अंदरूनी कलह एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर आ गया है। कासरगोड के सांसद राजमोहन उन्नीथन ने 22 अक्टूबर 2026 को लोकसभा सदस्य के. सुधाकरन और राज्यसभा सदस्य जेबी माथर के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की। यह माँग केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) अध्यक्ष सनी जोसेफ की उस अपील के कुछ ही दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने पार्टी नेताओं से आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक बयान न देने को कहा था।
ताज़ा विवाद की पृष्ठभूमि
KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ — जो राज्य सरकार में ऊर्जा मंत्री भी हैं — ने हाल ही में पार्टी नेताओं को आंतरिक मतभेद सार्वजनिक न करने का निर्देश दिया था। लेकिन इस निर्देश का उल्लंघन करते हुए के. सुधाकरन ने KPCC अध्यक्ष पद से हटाए जाने पर खुलकर नाराजगी जताई, और जेबी माथर ने भी पार्टी के आंतरिक मसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी की।
इस पर उन्नीथन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पार्टी में किसी को भी विशेष छूट नहीं मिली हुई है — न सुधाकरन को, न माथर को। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतृत्व के निर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी नेता के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्नीथन का सीधा प्रहार
उन्नीथन ने सुधाकरन पर निशाना साधते हुए कहा कि KPCC अध्यक्ष पद में बदलाव रातों रात नहीं हुआ था और उनके पास अपनी शिकायतें रखने के कई मौके थे। उनके अनुसार, "लिखित बयान तैयार करके उसे सार्वजनिक रूप से पढ़ना अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है।"
माथर के दखल को भी उन्होंने खारिज कर दिया और कहा कि महिला कांग्रेस की पिछली अध्यक्षाओं ने कभी पार्टी मामलों पर इस तरह सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या उन्हें ऐसा करने का कोई विशेष अधिकार प्राप्त है।
उन्नीथन की चेतावनी: पलटवार की धमकी
इस पूरे प्रकरण में सबसे तीखा पहलू उन्नीथन की यह चेतावनी रही कि अगर इन उल्लंघनों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वे और अन्य नेता भी सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है और वे नतीजों की परवाह किए बिना बोलेंगे।
यह चेतावनी नेतृत्व पर सीधा दबाव है — या तो अनुशासन को समान रूप से लागू करें, या फिर और अधिक विवादों के लिए तैयार रहें।
पुरानी परंपरा, नया एपिसोड
गौरतलब है कि इस सिलसिले की शुरुआत लोकसभा सदस्य और UDF संयोजक अडूर प्रकाश ने की थी और तब से यह कड़ी लगातार जुड़ती जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में और भी उल्लेखनीय है जब केरल में कांग्रेस सत्ता में है — एक ऐसा दौर जिसमें माना जाता है कि शासन की जिम्मेदारियों के सामने आंतरिक मतभेद गौण हो जाने चाहिए।
इसके बजाय, वही पुराना नजारा दोहराया जा रहा है: नेतृत्व की संयम बरतने की अपील और उसके तुरंत बाद एक नए नेता की ओर से उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग, जिन्होंने उस अपील को अनसुना कर दिया। केरल कांग्रेस की असली चुनौती कमियाँ पहचानना नहीं, बल्कि सभी को इस पर राजी करना है कि इन्हें सार्वजनिक मंच के बजाय पार्टी के भीतर ही सुलझाया जाए।