17 अक्टूबर 2026
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केरल वक्फ बोर्ड पुनर्गठन: यूडीएफ सरकार ने एमसी मयिन हाजी को बनाया नया चेयरपर्सन

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केरल वक्फ बोर्ड पुनर्गठन: यूडीएफ सरकार ने एमसी मयिन हाजी को बनाया नया चेयरपर्सन

सारांश

केरल की UDF सरकार ने पुराने LDF-नियुक्त बोर्ड को हटाकर IUML नेता एमसी मयिन हाजी के नेतृत्व में नया वक्फ बोर्ड बनाया। दो अनिवार्य गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश पर टिकी है — नए वक्फ कानून और पुराने बोर्ड पर लंबित याचिका इस फेरबदल की असली वजह।

मुख्य बातें

केरल की UDF सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को केरल राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया।
IUML नेता एमसी मयिन हाजी को नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया; IUML विधायक कुरुक्कोली मोइदीन सदस्य बने।
नए बोर्ड में दो पद रिक्त हैं; नए वक्फ कानून के तहत अनिवार्य दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश तक लंबित।
पिछला बोर्ड LDF सरकार का बनाया हुआ था और उसका चार वर्ष का कार्यकाल शेष था, परंतु केरल उच्च न्यायालय में सदस्यों की योग्यता को लेकर याचिका लंबित थी।
UDF ने मई 2026 के केरल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद सत्ता संभाली थी।

केरल की यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को केरल राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के वरिष्ठ नेता एमसी मयिन हाजी को बोर्ड का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया है। यह निर्णय पिछले बोर्ड से जुड़ी अनसुलझी कानूनी कार्यवाही और नए वक्फ कानूनी प्रावधानों को लागू करने की आवश्यकता के बीच लिया गया है।

नए बोर्ड की संरचना

IUML विधायक कुरुक्कोली मोइदीन को भी नए बोर्ड में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त बोर्ड के अन्य सदस्यों में सिराज डी. कापसी (बोहरा समुदाय के प्रतिनिधि), थोडीयूर मुहम्मद कुंजू मौलवी, सजना फिरोज, जसीम सबाह सी, एमपी मुस्तफा फैजी, डॉ. अब्दुल मजीद स्वालाही और मदीना बेगम ए. शामिल हैं।

गौरतलब है कि बोर्ड में अभी दो सदस्यों के पद रिक्त हैं। नए वक्फ कानून के तहत बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी शामिल किया जाना अनिवार्य है, लेकिन उनकी नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश की प्रतीक्षा में लंबित है।

पुराने बोर्ड को क्यों भंग किया गया

पिछला वक्फ बोर्ड तत्कालीन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार द्वारा गठित किया गया था और उसका कार्यकाल अभी चार वर्ष शेष था। हालाँकि, उस बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति-योग्यता को चुनौती देने वाली एक याचिका केरल उच्च न्यायालय में लंबित थी। यूडीएफ सरकार ने इस कानूनी अनिश्चितता और नए वक्फ कानूनी ढाँचे की अनुपालना को आधार बनाकर नया बोर्ड गठित करने का निर्णय लिया।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन से जुड़े मामले सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, और राज्यों पर नई वैधानिक अपेक्षाओं के अनुरूप बोर्ड संरचना को अद्यतन करने का दबाव है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

मई 2026 में हुए केरल विधानसभा चुनाव में UDF ने जीत हासिल कर राज्य की सत्ता में वापसी की थी। इस गठबंधन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), केरल कांग्रेस और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) सहित अन्य दल शामिल हैं। वक्फ बोर्ड पुनर्गठन को इस गठबंधन के भीतर IUML की भूमिका और प्राथमिकताओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

दो रिक्त पदों — विशेष रूप से दो अनिवार्य गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति — के लिए सर्वोच्च न्यायालय के अगले निर्देशों का इंतजार किया जाएगा। नए बोर्ड पर राज्य की वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और लंबित विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी होगी। आलोचकों का कहना है कि जब तक बोर्ड की पूर्ण संरचना नहीं बनती, कार्यकारी निर्णयों की वैधता पर प्रश्न उठ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अभी भी अधूरा है, वक्फ संपत्तियों के विवादों का निपटारा पारदर्शी तरीके से कर पाता है या नहीं। दो अनिवार्य गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनुपस्थिति — जो नए केंद्रीय वक्फ कानून की माँग है — बोर्ड की कार्यवाही को संभावित कानूनी चुनौती के घेरे में रखती है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन क्यों किया गया?
पिछले LDF सरकार द्वारा बनाए गए बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति-योग्यता को लेकर केरल उच्च न्यायालय में याचिका लंबित थी, और नए वक्फ कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की आवश्यकता थी। इन दोनों कारणों से UDF सरकार ने नया बोर्ड गठित करने का निर्णय लिया।
एमसी मयिन हाजी कौन हैं और उन्हें क्यों चुना गया?
एमसी मयिन हाजी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के वरिष्ठ नेता हैं। IUML, UDF गठबंधन का प्रमुख घटक है और इसी राजनीतिक भागीदारी के तहत उन्हें वक्फ बोर्ड का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।
नए वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति कब होगी?
नए वक्फ कानून के अनुसार बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य है, लेकिन उनकी नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश के बाद ही की जाएगी। फिलहाल बोर्ड में दो पद रिक्त हैं।
केरल में UDF सरकार कब से है?
मई 2026 में हुए केरल विधानसभा चुनाव में UDF ने जीत हासिल कर सत्ता में वापसी की। इस गठबंधन में कांग्रेस, IUML, केरल कांग्रेस और RSP सहित कई दल शामिल हैं।
पुराने वक्फ बोर्ड का क्या हुआ?
पिछला वक्फ बोर्ड LDF सरकार द्वारा गठित था और उसका चार वर्ष का कार्यकाल अभी शेष था। बोर्ड सदस्यों की योग्यता को चुनौती देने वाली याचिका उच्च न्यायालय में लंबित होने और नई कानूनी अनुपालना आवश्यकताओं के चलते उसे बदलकर नया बोर्ड बनाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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