20 अक्टूबर 2026
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कुलसेकरपट्टिनम मुथरम्मन मंदिर दशहरा 2026: 'महिषासुर संहार' आज आधी रात समुद्र तट पर

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कुलसेकरपट्टिनम मुथरम्मन मंदिर दशहरा 2026: 'महिषासुर संहार' आज आधी रात समुद्र तट पर

सारांश

मैसूर के बाद देश का दूसरा सबसे प्रसिद्ध दशहरा — कुलसेकरपट्टिनम मुथरम्मन मंदिर का महापर्व — आज रात अपने चरम पर पहुँचेगा, जब 'महिषासुर संहार' का दिव्य मंचन समुद्र तट पर आधी रात को होगा। देशभर से उमड़ती भीड़ इस आयोजन को एक अनूठी सांस्कृतिक पहचान देती है।

मुख्य बातें

कुलसेकरपट्टिनम स्थित अरुलमिगु मुथरम्मन मंदिर में दस दिवसीय दशहरा महोत्सव 11 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के साथ प्रारंभ हुआ।
उत्सव का मुख्य कार्यक्रम 'महिषासुर संहार' आज 20 अक्टूबर 2026 की आधी रात को समुद्र तट पर आयोजित होगा।
19 अक्टूबर को देवी अंबल 'अन्ना वाहन' (हंस वाहन) पर सवार होकर शोभायात्रा में निकलीं और भक्तों को आशीर्वाद दिया।
नौवें दिन विशेष पंचामृत अभिषेक और महादीपाराधना का आयोजन हुआ।
मंदिर प्रशासन ने देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यापक सुविधाएँ सुनिश्चित की हैं।

तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के कुलसेकरपट्टिनम स्थित अरुलमिगु मुथरम्मन मंदिर में दशहरा महोत्सव इस वर्ष भी अपूर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो रहा है। उत्सव का सबसे भव्य और प्रतीक्षित आयोजन — 'महिषासुर संहार' — 20 अक्टूबर 2026 की आधी रात को मंदिर के निकट समुद्र तट पर आयोजित किया जाएगा, जिसे देखने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होते हैं।

उत्सव की पृष्ठभूमि और महत्त्व

मैसूर दशहरे के बाद कुलसेकरपट्टिनम का दशहरा उत्सव विश्व प्रसिद्ध माना जाता है। श्री ज्ञानमूर्तिश्वरार समेथा मुथरम्मन मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह दस दिवसीय महापर्व 11 अक्टूबर 2026 को प्रातःकाल ध्वजारोहण के साथ प्रारंभ हुआ था। उत्सव के दौरान देवी अंबल प्रतिदिन भिन्न-भिन्न दिव्य रूपों में भक्तों को दर्शन देती हैं।

नौवें दिन का विशेष आयोजन

19 अक्टूबर को उत्सव के नौवें दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का भव्य आयोजन हुआ। देवी अंबल का दूध, हल्दी, चंदन, कुमकुम और पंचामृत से विशेष अभिषेक किया गया और भव्य दीपाराधना संपन्न हुई। इसके पश्चात रात्रि में देवी अंबल कलाईमगल दिव्य 'तिरुक्कोला' रूप में भक्तों के समक्ष प्रकट हुईं, जिस अवसर पर महादीपाराधना की गई।

इसके बाद देवी 'अन्ना वाहन' अर्थात हंस वाहन पर सवार होकर नगर की सड़कों पर निकलीं और भक्तों को आशीर्वाद दिया। इस शोभायात्रा के दौरान मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ उमड़ी।

आज रात 'महिषासुर संहार' — मुख्य आकर्षण

दशहरा उत्सव का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और प्रतीक्षित कार्यक्रम 'महिषासुर संहार' आज — 20 अक्टूबर — की आधी रात को मंदिर के निकट समुद्र तट पर आयोजित होगा। यह दृश्य देवी की महिषासुर पर विजय का प्रतीकात्मक मंचन है और इसे देखने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। यह आयोजन बुराई पर सत्य की विजय के सनातन संदेश को जीवंत करता है।

भक्तों की भागीदारी और मन्नतें

इस पावन अवसर पर जिन भक्तों ने व्रत पूर्ण किए हैं और विशेष वेशभूषा धारण की है, वे सड़कों से प्राप्त भेंट और दान को मंदिर के खजाने में समर्पित कर अपनी मन्नतें पूरी कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में उत्सव का वातावरण है और भक्त मंदिर परिसर व आसपास के इलाकों में नृत्य और भजन-कीर्तन के साथ उल्लास मना रहे हैं।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। यह महोत्सव तिरुचेंदूर और थूथुकुडी क्षेत्र को नवरात्रि के दौरान देश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान का एक जीवंत प्रतीक है जिसे राष्ट्रीय मीडिया में अपेक्षित स्थान नहीं मिलता। मैसूर दशहरे की भाँति इसका उल्लेख राष्ट्रीय पर्यटन एजेंडे में दुर्लभ है, जबकि इसका आकर्षण और श्रद्धालुओं की संख्या उसके समकक्ष है। 'महिषासुर संहार' का समुद्र तट पर मध्यरात्रि आयोजन अपने आप में एक अद्वितीय अनुभव है जो इसे देश के अन्य दशहरा आयोजनों से अलग करता है — इस विरासत को केंद्रीय पर्यटन नीति में समुचित स्थान मिलना चाहिए।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुलसेकरपट्टिनम मुथरम्मन मंदिर का दशहरा उत्सव क्यों प्रसिद्ध है?
मैसूर दशहरे के बाद यह उत्सव विश्व प्रसिद्ध माना जाता है। थूथुकुडी जिले के कुलसेकरपट्टिनम स्थित अरुलमिगु मुथरम्मन मंदिर में नवरात्रि के दौरान दस दिनों तक देवी अंबल अलग-अलग दिव्य रूपों में दर्शन देती हैं और अंतिम रात 'महिषासुर संहार' का भव्य मंचन समुद्र तट पर होता है।
'महिषासुर संहार' कार्यक्रम क्या है और कब होता है?
'महिषासुर संहार' दशहरा उत्सव का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आयोजन है, जिसमें देवी की महिषासुर पर विजय का प्रतीकात्मक मंचन किया जाता है। यह 20 अक्टूबर की आधी रात को मंदिर के निकट समुद्र तट पर आयोजित होता है।
इस वर्ष दशहरा उत्सव कब से शुरू हुआ?
2026 में यह दस दिवसीय उत्सव 11 अक्टूबर को प्रातःकाल ध्वजारोहण के साथ आरंभ हुआ और 20 अक्टूबर की आधी रात 'महिषासुर संहार' के साथ समापन होगा।
उत्सव के नौवें दिन क्या विशेष हुआ?
19 अक्टूबर को उत्सव के नौवें दिन देवी अंबल का दूध, हल्दी, चंदन, कुमकुम और पंचामृत से विशेष अभिषेक और महादीपाराधना हुई। रात में देवी 'अन्ना वाहन' (हंस वाहन) पर सवार होकर शोभायात्रा में निकलीं और भक्तों को आशीर्वाद दिया।
मंदिर में श्रद्धालु मन्नतें कैसे पूरी करते हैं?
जो भक्त अपना व्रत पूर्ण कर विशेष वेशभूषा धारण करते हैं, वे सड़कों से प्राप्त भेंट और दान को मंदिर के खजाने में समर्पित कर अपनी मन्नतें पूरी करते हैं। मंदिर प्रशासन ने इस प्रक्रिया और अन्य सुविधाओं के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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