कुलसेकरपट्टिनम सूरसंहारम 2026: 8 लाख श्रद्धालुओं के लिए 4,000 पुलिसकर्मी तैनात, यूनेस्को मान्यता की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में स्थित कुलसेकरपट्टिनम का ऐतिहासिक मुथारम्मन मंदिर 20 अक्टूबर 2026 को होने वाले 'सूरसंहारम' अनुष्ठान के लिए पूरी तरह तैयार है, जहाँ अनुमानतः आठ लाख श्रद्धालु समुद्र तट पर उमड़ने की उम्मीद है। 11 अक्टूबर से शुरू हुए इस 11 दिवसीय दशहरा उत्सव में कुल मिलाकर 12 लाख से अधिक तीर्थयात्री मंदिर के दर्शन करते हैं, जो पूरे दक्षिण भारत से यहाँ पहुँचते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
इस साल का उत्सव प्रशासनिक और सांस्कृतिक — दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। 20 अक्टूबर को समुद्र तट पर होने वाला 'सूरसंहारम' अनुष्ठान इस उत्सव का केंद्रबिंदु है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने 2018 में इस आयोजन में आठ लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति दर्ज की थी।
गौरतलब है कि यह तटीय गाँव अपनी संकरी सड़कों और सीमित बुनियादी ढाँचे के बावजूद प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है — जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था
भीड़, यातायात और परिवहन को सुचारु रखने के लिए 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। निगरानी के लिए 90 स्थायी सीसीटीवी कैमरे पहले से लगे हैं, और उत्सव के दौरान 175 अतिरिक्त अस्थायी कैमरे भी लगाए गए हैं।
मंदिर, समुद्र तट और पार्किंग क्षेत्रों की निगरानी तीन संयुक्त आयुक्त कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास को व्यवस्थित करने के लिए दो नई सड़कें निर्माणाधीन हैं।
स्वच्छता और नागरिक सुविधाएँ
स्थानीय निकाय और मंदिर प्रशासन ने पीने के पानी की समुचित व्यवस्था की है। 175 स्थायी और 180 अस्थायी शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं। पंचायत की सफाई टीमों की सहायता के लिए 200 अतिरिक्त सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि जरूरी सुविधाओं की निरंतर निगरानी की जा रही है और लाखों श्रद्धालुओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढाँचे में सुधार किया जा रहा है।
यूनेस्को मान्यता और प्रशासनिक सुझाव
उत्सव समिति इस आयोजन को यूनेस्को की 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' सूची में शामिल कराने के प्रयास कर रही है। समिति इस उत्सव के पारंपरिक महत्व, कलात्मक अभिव्यक्ति और पर्यटन आकर्षण को रेखांकित कर रही है। एक अधिकारी ने कहा कि मान्यता के तरीकों पर विचार किया जाएगा और इससे उत्सव की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।
इसके साथ ही, राजस्व अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार इस उत्सव को आधिकारिक रूप से अधिसूचित करे और तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर के उत्सवों की तर्ज पर इसे जिला प्रशासन की देखरेख में लाए। अधिकारियों का मानना है कि इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित होगा।
आगे की राह
यह उत्सव ग्राम पंचायत के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, परंतु अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सड़कें और ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। यदि यूनेस्को मान्यता और सरकारी अधिसूचना का प्रयास सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में इस उत्सव की तैयारी और संसाधन आवंटन में उल्लेखनीय बदलाव आ सकता है।