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क्या कुरम्बा भगवती मंदिर में मां काली को प्रसन्न करने के लिए भक्त खून की होली खेलते हैं?

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क्या कुरम्बा भगवती मंदिर में मां काली को प्रसन्न करने के लिए भक्त खून की होली खेलते हैं?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि केरल के कुरम्बा भगवती मंदिर में भक्त खून की होली खेलकर मां काली को प्रसन्न करते हैं? यह अनोखी परंपरा सालों से चली आ रही है और भक्त इसे बड़े श्रद्धा से मानते हैं। जानें इस मंदिर के बारे में और भी रोचक बातें।

मुख्य बातें

कुरम्बा भगवती मंदिर में भक्त खून की होली खेलते हैं।
यह परंपरा मां काली को प्रसन्न करने के लिए है।
मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी।
उत्सव मार्च और अप्रैल में मनाया जाता है।
पहले पशुओं की बलि दी जाती थी, लेकिन अब प्रतिबंध है।

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। देश के विभिन्न हिस्सों में देवी मां के विभिन्न रूपों की पूजा के लिए अनूठे तरीके अपनाए जाते हैं। हर मंदिर की अपनी अद्वितीय पूजा विधि और आस्था होती है। केरल के कोडुंगल्लूर स्थित मां भगवती का एक ऐसा मंदिर है, जहां मां के काली स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए खून की होली खेली जाती है। इस परंपरा में भाग लेने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।

कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर, जिसे कुरम्बा भगवती मंदिर भी कहा जाता है, एर्नाकुलम जिले में बस स्टैंड से 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर की स्थापना स्वयं आदि शंकराचार्य ने की थी, और इसमें पांच चक्रों की शक्तियों को सिद्धि के साथ स्थापित किया गया है।

यहां मां भगवती के काली रूप की पूजा एक अनोखे तरीके से की जाती है, जो शायद ही देश के किसी अन्य मंदिर में देखने को मिले।

मंदिर में वार्षिक उत्सव मनाया जाता है, जिसे मलयालम महीने के अनुसार मार्च और अप्रैल में भरणी नक्षत्र के प्रारंभ पर मनाया जाता है। पहले इस उत्सव में पशुओं की बलि दी जाती थी, लेकिन अब इस प्रथा पर रोक लगा दी गई है।

यह उत्सव 7 दिनों तक चलता है, जिसमें भक्त तलवारों और भालों से खुद को नुकसान पहुंचाते हैं और अपना खून मां काली को अर्पित करते हैं। इसके अलावा, वे मां के चरणों में प्रसाद नहीं रखते, बल्कि प्रतिमा पर प्रसाद फेंकते हैं और मां को अपशब्द और शाप देते हैं।

भक्तों का मानना है कि ये अनुष्ठान देवी के निर्देशानुसार किए जाते हैं, और ऐसा करने से मां प्रसन्न होकर हर मनोकामना को पूरा करती हैं। उत्सव के दौरान मंदिर का पूरा परिसर रक्त से लाल हो जाता है और यह मान्यता होती है कि भगवान स्वयं आते हैं। इस समय कोई भी पुजारी या बड़ा शख्स किसी को आशीर्वाद नहीं देता।

यह अजीबोगरीब अनुष्ठान वर्षों से चला आ रहा है और आज भी कायम है। कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर को तंत्र-मंत्र की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां तांत्रिक अपनी तंत्र क्रियाओं को सिद्ध करने के लिए आते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। यह अनुष्ठान अपने आप में एक गहन अनुभव है, जो भक्तों की श्रद्धा को दर्शाता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुरम्बा भगवती मंदिर में खून की होली क्यों खेली जाती है?
यह परंपरा मां काली को प्रसन्न करने के लिए निभाई जाती है, जिसमें भक्त अपने खून को अर्पित करते हैं।
क्या इस मंदिर में पशुओं की बलि दी जाती थी?
पहले इस मंदिर में पशुओं की बलि दी जाती थी, लेकिन अब इस प्रथा को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
कुरम्बा भगवती मंदिर की स्थापना किसने की थी?
इस मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी।
यह उत्सव कब मनाया जाता है?
यह उत्सव हर साल मार्च और अप्रैल में भरणी नक्षत्र के समय मनाया जाता है।
यह अनुष्ठान कब से चल रहा है?
यह अनुष्ठान वर्षों से चला आ रहा है और आज भी कायम है।
राष्ट्र प्रेस
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