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कच्छ कॉपर की स्मेल्टिंग क्षमता दोगुनी करने की योजना, 10 लाख टन के साथ बनेगा विश्व का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन स्मेल्टर

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कच्छ कॉपर की स्मेल्टिंग क्षमता दोगुनी करने की योजना, 10 लाख टन के साथ बनेगा विश्व का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन स्मेल्टर

सारांश

अदाणी समूह की कच्छ कॉपर लिमिटेड ने मुंद्रा में अपनी स्मेल्टिंग क्षमता दोगुनी कर 10 लाख टन प्रतिवर्ष करने की घोषणा की है। 1.2 अरब डॉलर के निवेश वाली यह परियोजना, ESG प्रतिबद्धताओं और 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के साथ, भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को समर्थन देने का दावा करती है।

मुख्य बातें

कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) की स्मेल्टिंग क्षमता 5 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना है।
विस्तार पूर्ण होने पर मुंद्रा संयंत्र विश्व का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टर बन सकता है।
अदाणी समूह ने इस परियोजना में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है।
कंपनी अपने परिचालन में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ने और 99.8% सल्फर उत्सर्जन उपचार का दावा करती है।
कंपनी लगभग 100% डिसैलिनेटेड पानी का उपयोग और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति अपनाने की बात कहती है।
यह विस्तार भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप बताया जा रहा है।

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) ने अपनी कॉपर स्मेल्टिंग क्षमता को मौजूदा 5 लाख टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 10 लाख टन प्रतिवर्ष करने की महत्वाकांक्षी योजना सार्वजनिक की है। गुजरात के मुंद्रा में स्थित इस ग्रीनफील्ड कॉपर रिफाइनरी का यह विस्तार पूर्ण होने पर इसे विश्व का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टर बनाने का दावा किया जा रहा है।

विस्तार योजना का खाका

कंपनी ने अपनी पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में इस विस्तार की रूपरेखा प्रस्तुत की है। रिपोर्ट के अनुसार, KCL अपने परिचालन में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ने की तैयारी में है, जिससे उत्पादन गतिविधियों का कार्बन फुटप्रिंट घटेगा। डीकार्बोनाइजेशन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सुचारु उपयोग को इस रणनीति की धुरी बनाया गया है।

अदाणी समूह ने इस समग्र परियोजना में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसका उद्देश्य घरेलू कॉपर उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत के औद्योगिक तंत्र को सुदृढ़ करना है। कंपनी के अनुसार, पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ESG) सिद्धांत अब कारोबारी रणनीति का अभिन्न हिस्सा हैं।

जल संरक्षण और उत्सर्जन नियंत्रण

जल प्रबंधन के मोर्चे पर कंपनी का दावा है कि वह अपने संचालन में लगभग 100 प्रतिशत डिसैलिनेटेड (समुद्री जल शुद्धिकृत) पानी का उपयोग करती है और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति का पालन कर रही है। इससे मीठे पानी पर निर्भरता कम होने और पर्यावरणीय प्रभाव घटने की उम्मीद है।

औद्योगिक उत्सर्जन के मामले में कंपनी ने दावा किया है कि वह वर्तमान में 99.8 प्रतिशत सल्फर उत्सर्जन का उपचार उन्नत पर्यावरणीय तकनीकों के माध्यम से कर रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

कॉपर की बढ़ती माँग और भारत की ज़रूरत

यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब बिजली ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में कॉपर की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। कंपनी का तर्क है कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बिजली ट्रांसमिशन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में कॉपर की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होती जाएगी।

गौरतलब है कि भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में घरेलू कॉपर उत्पादन क्षमता में वृद्धि ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है।

सामुदायिक विकास पहल

औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ कंपनी आसपास के क्षेत्रों में सामुदायिक विकास कार्यक्रमों में भी निवेश कर रही है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका संवर्धन और सामाजिक विकास से जुड़ी पहलें शामिल हैं, जिनका लक्ष्य स्थानीय समुदायों को दीर्घकालिक लाभ पहुँचाना बताया गया है।

आगे की राह

कच्छ कॉपर की यह क्षमता विस्तार योजना अदाणी समूह की व्यापक औद्योगिक महत्वाकांक्षा का हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू कॉपर उत्पादन में आत्मनिर्भरता भारत की ऊर्जा और बुनियादी ढाँचा नीतियों के लिए दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण होगी। यह देखना बाकी है कि ESG लक्ष्यों की पूर्ति की स्वतंत्र निगरानी किस तंत्र के ज़रिए होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ESG दावों की विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सत्यापन का कोई ठोस तंत्र सार्वजनिक न हो। 99.8% सल्फर उत्सर्जन उपचार और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसे दावे कंपनी की अपनी सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट पर आधारित हैं, जो स्वाभाविक रूप से पक्षपातपूर्ण हो सकती है। भारत में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर की माँग वास्तविक है और कॉपर उत्पादन में आत्मनिर्भरता रणनीतिक रूप से ज़रूरी भी, लेकिन औद्योगिक विस्तार और पर्यावरणीय जवाबदेही के बीच संतुलन की असली परीक्षा क्षमता चालू होने के बाद ही होगी।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कच्छ कॉपर लिमिटेड की विस्तार योजना क्या है?
कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) अपनी मौजूदा 5 लाख टन प्रतिवर्ष कॉपर स्मेल्टिंग क्षमता को बढ़ाकर 10 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना बना रही है। यह विस्तार गुजरात के मुंद्रा स्थित ग्रीनफील्ड रिफाइनरी में होगा और पूर्ण होने पर इसे विश्व का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टर बताया जा रहा है।
अदाणी समूह ने इस परियोजना में कितना निवेश किया है?
अदाणी समूह ने कच्छ कॉपर परियोजना में कुल 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है। इसका उद्देश्य घरेलू कॉपर उत्पादन बढ़ाना और भारत के औद्योगिक एवं ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को समर्थन देना है।
कच्छ कॉपर की ESG और सस्टेनेबिलिटी प्रतिबद्धताएँ क्या हैं?
कंपनी ने अपनी पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ने, लगभग 100% डिसैलिनेटेड पानी के उपयोग, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति और 99.8% सल्फर उत्सर्जन उपचार का दावा किया है। ये दावे कंपनी की स्वयं की रिपोर्ट पर आधारित हैं।
भारत में कॉपर की माँग क्यों बढ़ रही है?
बिजली ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, इलेक्ट्रिक वाहनों और बुनियादी ढाँचे के विस्तार में कॉपर की अनिवार्य भूमिका के चलते इसकी माँग तेज़ी से बढ़ रही है। भारत का 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य भी घरेलू कॉपर उत्पादन को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
मुंद्रा की कच्छ कॉपर रिफाइनरी कहाँ स्थित है और इसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
कच्छ कॉपर लिमिटेड की रिफाइनरी गुजरात के कच्छ जिले के मुंद्रा में स्थित है। वर्तमान में इसकी स्मेल्टिंग क्षमता 5 लाख टन प्रतिवर्ष है, जिसे भविष्य में दोगुना करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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