क्या भाजपा सरकार पीडीए वर्ग को वोट के अधिकार से वंचित रखना चाहती है?: सपा सांसद अवधेश प्रसाद
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा सरकार पर आरोप कि वह पीडीए वर्ग को वोट से वंचित कर रही है।
- एसआईआर एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए।
- लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष ने कदम उठाए हैं।
नई दिल्ली, 2 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार पीडीए (दलित-पिछड़ा और अल्पसंख्यक) वर्ग के लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
अवधेश प्रसाद ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि एसआईआर केवल एक विषय नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर समस्या है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने वोट का अधिकार दिया है, जो अत्यंत मूल्यवान है। भाजपा सरकार इस अधिकार को छीनना चाहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर के अंतर्गत बीएलओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें पार्टी विशेष और जाति विशेष के लोग शामिल हैं। पीडीए के लोगों को फॉर्म नहीं दिए जा रहे हैं या उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने यह दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अभी तक किसी जिले में 40 प्रतिशत से अधिक फॉर्म वितरित नहीं किए गए हैं। इस प्रक्रिया के लिए कम से कम तीन महीने का समय चाहिए, तभी सही तरीके से काम हो सकेगा।
सरकार से सवाल करते हुए उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में 2027 में चुनाव होने वाले हैं, जबकि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अगले साल चुनाव हैं। फिर भी एसआईआर को लेकर इतनी जल्दी क्यों है?" सपा सांसद ने कहा कि विपक्ष के लोग सदन में इन मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। इस तरह से सत्तापक्ष दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के वोट काटने की कोशिश कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के 'ड्रामा नहीं, डिलीवरी चाहिए' वाले बयान पर भी अवधेश प्रसाद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "सत्तापक्ष से ज्यादा ड्रामा की जानकारी किसी को नहीं हो सकती है। इसलिए यह ड्रामा नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या है। यह लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए विपक्ष की ओर से उठाया गया कदम है।"
उन्होंने कहा कि एसआईआर, किसान और बेरोजगारी जैसे कई ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन्हें प्राथमिकता से सदन में उठाया जाना चाहिए। ये सभी अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।