क्या मुंबई का मेयर वही बनेगा जो शहर की सेवा करेगा?: क्लाईड क्रास्टो
सारांश
Key Takeaways
- बीएमसी चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के दावे।
- क्लाईड क्रास्टो का स्पष्ट दृष्टिकोण।
- लोगों की सेवा करने वाले नेताओं की आवश्यकता।
- चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर प्रश्न।
- भाजपा की चुनावी रणनीति पर आरोप।
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव में मेयर पद को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। जहां कुछ दल मुस्लिम मेयर बनने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मराठी समाज से आने वाले मेयर के दावे भी किए जा रहे हैं। इन सब दावों के बीच, एनसीपी (एसपी) नेता क्लाईड क्रास्टो ने कहा कि मुंबई का मेयर वही बनेगा जो वास्तव में शहर की सेवा करना चाहता हो।
क्लाईड क्रास्टो ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "मुंबई का मेयर वही बनेगा जो सचमुच शहर की सेवा करना चाहता हो। मेयर का मराठी होना या फिर मुस्लिम होना, यह सब बातें कुछ नहीं बदलेंगी। मुंबई की सेवा करने वाला मेयर बनेगा।" विभिन्न राजनीतिक दलों के दावों में यह नहीं देखा जाता कि लोगों की सेवा करने वाला ही मेयर बनेगा।
बीएमसी चुनाव के संबंध में एनसीपी (एसपी) की रणनीति पर उन्होंने कहा, "हमारी रणनीति ऐसी है कि हमें इसे सबको बताने की जरूरत नहीं है। हम इसे अपनी जरूरत के अनुसार लागू करते हैं। मुंबई में बीएमसी चुनाव हुए 6-7 साल हो गए हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने बीएमसी में अपना मिनी ऑफिस खोल लिया था। लोग समझ गए हैं कि भाजपा क्या कर रही है। हमारी पार्टी का मकसद साफ है कि आगे चलकर हमें लोगों के हित में काम करना है।
उन्होंने यूपी में एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने पर कहा कि एसआईआर के बारे में हमने कई बार सवाल उठाए हैं कि चुनाव आयोग असल में क्या कर रहा है। आप अवैध वोटर्स के नाम हटा रहे हैं, लेकिन हमने पूछा है कि यह कैसे किया जा रहा है और कोई जवाब नहीं दिया गया है। यूपी में अब इतनी बड़ी तादाद में वोटर हटाए जा रहे हैं, तो वे कौन लोग हैं? वे वोटर लिस्ट में थे तो कैसे आए? सुधार कैसे किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर बार-बार सवाल उठाए जाते हैं और जो मुद्दे हैं, उनके जवाब नहीं मिल रहे हैं। वोटर लिस्ट में वे वोटर थे, जिन्हें अब आयोग द्वारा हटाया जा रहा है। 2014, 2019 और 2024 में जब वोटिंग हुई, तब यह क्यों नहीं देखा गया? यह सब चीजें चुनाव आयोग को देखना होगा और जवाब देना होगा।