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क्या नेपोटिज्म गलत है? 'कुम्हार' और 'मटका' का जिक्र कर विवेक रंजन ने समझाया

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क्या नेपोटिज्म गलत है? 'कुम्हार' और 'मटका' का जिक्र कर विवेक रंजन ने समझाया

सारांश

नेपोटिज्म पर विवेक रंजन अग्निहोत्री का नजरिया जानने के लिए पढ़ें। क्या यह वास्तव में गलत है या इसे सकारात्मक तरीके से देखा जा सकता है? जानें इस बहस में उनकी महत्वपूर्ण बातें।

मुख्य बातें

नेपोटिज्म का मतलब है परिवार या दोस्तों को विशेष अवसर देना।
यह योग्यता को दबा सकता है जब उचित अवसर न मिले।
विवेक रंजन का मानना है कि इसे एक सकारात्मक तरीके से देखना चाहिए।
नेपोटिज्म तभी बुरा होता है जब प्रतिभावान लोगों को अवसर नहीं मिलते।
उदाहरण के रूप में 'कुम्हार और मटका' दिया गया।

मुंबई, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर चर्चा हमेशा से चलती रही है। यह आरोप लगाया जाता है कि स्टार किड्स को बड़े रोल, फिल्में और प्रमोशन आसानी से मिल जाते हैं, जबकि प्रतिभाशाली बाहरी कलाकारों को मेहनत और संघर्ष करना पड़ता है। कई एक्टर्स की पीढ़ियाँ भी इस इंडस्ट्री में राज करती रही हैं।

आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, श्रद्धा कपूर, ऋतिक रोशन और जान्हवी कपूर जैसे कई स्टार किड्स सफल हुए हैं, जबकि कुछ फ्लॉप भी साबित हुए हैं। इसके साथ ही, कई आउटसाइडर कलाकारों ने यह शिकायत की है कि उन्हें काम या उचित ऑफर नहीं मिलते। इस बीच, निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने नेपोटिज्म पर अपनी दृष्टि साझा की और इसे 'कुम्हार और मटका' के उदाहरण से स्पष्ट किया।

विवेक रंजन का मानना है कि नेपोटिज्म को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, लेकिन जब यह मेरिट को दबाता है, तब यह गलत हो जाता है।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "मेरा मानना है कि नेपोटिज्म अपने आप में बुरी चीज नहीं है। उदाहरण के लिए, एक डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, एक शिक्षक का बेटा शिक्षक और एक कारीगर का बेटा कारीगर। इसमें क्या गलत है? यदि कोई कुम्हार है और उसका बेटा मटका बनाना जानता है, तो उसे अच्छा मटका बनाने का अवसर मिलना गलत नहीं है।"

निर्देशक का कहना है कि नेपोटिज्म तब सही है जब व्यक्ति में योग्यता और स्किल हो। यदि परिवार के कारण अवसर मिले लेकिन प्रतिभा न हो, तो यह गलत है और यह इंडस्ट्री में प्रतिभाशाली लोगों को नुकसान पहुंचाता है।

'द बंगाल फाइल्स' के निर्देशक ने बताया कि नेपोटिज्म कब घातक या जहर बन जाता है। विवेक रंजन ने कहा, "समस्या तब होती है जब कुम्हार के बेटे को मटका बनाना नहीं आता। वह जितनी बार कोशिश करता है, मटका टूट जाता है। फिर भी उसे जबरदस्ती मटका बनाने का जिम्मा दिया जाता है, जबकि कतार में खड़े अन्य लोग इससे बेहतर मटका बना सकते हैं। उन्हें मौका नहीं मिलता और सारे पैसे केवल उसी पर लगाए जाते हैं। तब नेपोटिज्म जहर बन जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विवेक रंजन अग्निहोत्री का दृष्टिकोण इसे एक नई दिशा में ले जा सकता है। उनके विचारों से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि इसे हमेशा नकारात्मक तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि योग्यता और अवसर के संदर्भ में इसे समझना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नेपोटिज्म हमेशा गलत है?
नेपोटिज्म हमेशा गलत नहीं होता, यह तब गलत हो जाता है जब यह प्रतिभा और योग्यता को दबाता है।
विवेक रंजन अग्निहोत्री का दृष्टिकोण क्या है?
विवेक का मानना है कि नेपोटिज्म को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, लेकिन यह मेरिट को दबाने पर गलत हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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