11 अगस्त 2026
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श्रावण शिवरात्रि पर महाकाल का अनूठा शृंगार: वैष्णव तिलक, ओम और श्री राम की माला से सजे बाबा

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श्रावण शिवरात्रि पर महाकाल का अनूठा शृंगार: वैष्णव तिलक, ओम और श्री राम की माला से सजे बाबा

सारांश

श्रावण शिवरात्रि पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का शृंगार इस बार अनूठा रहा — वैष्णव तिलक, ओम और श्री राम की माला ने शैव-वैष्णव परंपराओं का दुर्लभ समागम प्रस्तुत किया। हज़ारों श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष के बीच इस दिव्य दर्शन का लाभ उठाया।

मुख्य बातें

11 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (शिवरात्रि) पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल के मस्तक पर वैष्णव तिलक और ओम का विशेष शृंगार किया गया; श्री राम की माला पहनाई गई।
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और फलों का रस उपयोग किया गया।
बाबा ने चंद्रमा धारण किया और कपूर आरती के बाद नवीन मुकुट पहना।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य रहा।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 11 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (शिवरात्रि) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य अवसर पर बाबा के मस्तक पर वैष्णव तिलक और ओम का विशेष शृंगार किया गया तथा उन्हें श्री राम की माला पहनाई गई — जो शैव और वैष्णव परंपराओं के दुर्लभ समन्वय का प्रतीक है। हज़ारों श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर इस अलौकिक दर्शन की प्रतीक्षा में थे।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने की परंपरा के पश्चात ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया और दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा का अभिषेक संपन्न कराया।

अभिषेक के उपरांत बाबा महाकाल ने मस्तक पर चंद्रमा धारण किया। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने नवीन मुकुट धारण किया। इसके पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूँज के बीच भस्म आरती संपन्न की गई।

शृंगार की विशेषता

श्रावण मास की शिवरात्रि के इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल को वैष्णव तिलक और ओम से सुसज्जित किया गया — यह शृंगार सामान्य दिनों से भिन्न और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। श्री राम की माला धारण कराना इस शृंगार को और भी विशिष्ट बनाता है, क्योंकि यह शिव और राम की भक्ति-धाराओं का एक साथ दर्शन कराता है। बाबा ने इस दिन निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए।

भक्तों की आस्था

जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भस्म आरती के दौरान पारंपरिक नियमों के अनुसार पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य रहा।

आगे क्या

श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में इसी प्रकार के भव्य शृंगार और भस्म आरती का आयोजन होता रहेगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद रखी जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ शिव और राम की उपासना धाराएँ एक-दूसरे में विलीन हो जाती हैं। श्रावण मास में उज्जैन में श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ यह भी दर्शाती है कि धार्मिक पर्यटन और आस्था-आधारित अर्थव्यवस्था मध्य प्रदेश के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण है। मंदिर प्रशासन के लिए असली चुनौती इस बढ़ती भीड़ के बीच अनुशासन, सुरक्षा और परंपरा का संतुलन बनाए रखना है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावण शिवरात्रि पर बाबा महाकाल का शृंगार सामान्य दिनों से कैसे अलग था?
इस बार बाबा महाकाल के मस्तक पर वैष्णव तिलक और ओम का विशेष शृंगार किया गया तथा उन्हें श्री राम की माला पहनाई गई, जो शैव और वैष्णव परंपराओं का दुर्लभ समन्वय है। सामान्य दिनों में ऐसा संयुक्त शृंगार नहीं होता।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान क्या नियम होते हैं?
भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। यह परंपरा मंदिर की पवित्रता और अनुशासन को बनाए रखने के लिए है।
11 अगस्त 2026 को महाकाल की भस्म आरती में क्या विशेष हुआ?
श्रावण कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (शिवरात्रि) पर बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ, वैष्णव तिलक और ओम से शृंगार किया गया, और श्री राम की माला पहनाई गई। कपूर आरती के बाद बाबा ने नवीन मुकुट धारण किया और भस्म आरती संपन्न हुई।
महाकाल मंदिर में पंचामृत अभिषेक में क्या-क्या शामिल होता है?
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया जाता है। यह अभिषेक मंदिर के पट खुलने के बाद मंत्रोच्चार के बीच संपन्न कराया जाता है।
श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कब जाएँ?
श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य शृंगार और भस्म आरती होती है। भस्म आरती तड़के होती है और श्रद्धालु रात से ही कतार में लग जाते हैं, इसलिए पहले से योजना बनाकर जाना उचित है।
राष्ट्र प्रेस
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