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क्या रिकॉर्डिंग के वक्त नुसरत फतेह अली खान की आवाज नहीं निकली और उनकी आंखों से केवल आंसू बहे?

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क्या रिकॉर्डिंग के वक्त नुसरत फतेह अली खान की आवाज नहीं निकली और उनकी आंखों से केवल आंसू बहे?

सारांश

नुसरत फतेह अली खान की गाने सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। क्या आपको पता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान उनका गला रुंध गया था? जानिए कैसे नुसरत ने अपना दर्द भरे गाने को पूरा किया।

मुख्य बातें

नुसरत फतेह अली खान की आवाज़ अद्वितीय है।
उनके गाने आज भी भावनाओं को जगाते हैं।
गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी भावनाएँ गहरे में छिपी थीं।
पिता-बेटी के रिश्ते को दर्शाने वाला गाना।
संगीत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अद्वितीय है।

मुंबई, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुरीली और सूफियाना आवाज के लिए मशहूर गायक नुसरत फतेह अली खान के गाने लोगों के दिलों में गहराई तक बस जाते थे। जैसे कि 'तुम्हें दिल लगीं भूल जानी पड़ेगी,' 'नी मैं जाना जोगी दे नाल', 'सांसों की माला पे सिमरू,' और 'दिल परदेसी हो गया' - ये वे गाने हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया।

जापान में उन्हें 'गाता हुआ बुद्ध' और अमेरिका में 'स्वर्ग की आवाज' के नाम से जाना जाता है। हिंदी सिनेमा में भी उनकी जादुई आवाज ने एक अमिट छाप छोड़ी है, खासकर उस गाने में जो साल 2000 में रिलीज़ हुई फिल्म 'धड़कन' का हिस्सा है।

हम बात कर रहे हैं उस गाने 'दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है' की, जिसे नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। गाने से पहले उन्होंने शर्त रखी थी, लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें खुद गाना गाना बहुत मुश्किल लग रहा था। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे और गले से आवाज नहीं निकल रही थी। मेकर्स को ऐसा गाना चाहिए था जो पिता और बेटी के गहरे रिश्ते को दर्शाता हो।

म्यूजिक डायरेक्टर्स नदीम-श्रवण उनकी आवाज के बड़े प्रशंसक थे और चाहते थे कि वे ही गाना गाएं। नुसरत ने गाने के बोल सुनने के बाद गाने का निर्णय लिया। जब रिकॉर्डिंग का समय आया, तब एक लाइन ने नुसरत को भावुक कर दिया। 'मैं तेरी बाहों के झूले में पली बाबुल' सुनते ही उनका गला रुंध गया।

लगातार प्रयास करने के बावजूद, उन्होंने लगभग 150 बार कोशिश की, लेकिन हर बार विफल रहे। इस लाइन ने उन्हें उनकी बेटियों की याद दिला दी थी और गाना गाना उनके लिए भारी हो रहा था। बुखार में, उन्होंने अंततः गाने को पूरा किया। आज भी यह गाना लोगों के दिलों को छूता है, जिसमें नुसरत की आवाज ने पिता-बेटी के विरह के दर्द को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नुसरत फतेह अली खान का योगदान भारतीय संगीत में अद्वितीय है। उनकी आवाज़ ने न केवल भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक विशेष स्थान हासिल किया है। भारतीय संस्कृति में उनके गाने आज भी लोगों के भावनात्मक संबंधों को दर्शाते हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नुसरत फतेह अली खान के कौन से गाने प्रसिद्ध हैं?
उनके प्रसिद्ध गानों में 'तुम्हें दिल लगीं भूल जानी पड़ेगी', 'नी मैं जाना जोगी दे नाल', 'सांसों की माला पे सिमरू', और 'दिल परदेसी हो गया' शामिल हैं।
नुसरत फतेह अली खान को किस नाम से जाना जाता है?
जापान में उन्हें 'गाता हुआ बुद्ध' और अमेरिका में 'स्वर्ग की आवाज' के नाम से जाना जाता है।
क्या नुसरत ने गाने के लिए कोई शर्त रखी थी?
हाँ, नुसरत ने गाने के बोल सुनने के बाद ही गाने का निर्णय लिया था।
उनकी रिकॉर्डिंग के दौरान क्या हुआ था?
गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान, नुसरत का गला रुंध गया और उन्हें लगभग 150 बार कोशिश करनी पड़ी।
क्या गाना आज भी लोगों के दिलों को छूता है?
जी हाँ, यह गाना आज भी लोगों के दिलों पर गहरा प्रभाव डालता है।
राष्ट्र प्रेस
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