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क्या सरकारी अधिकारियों को अंधविश्वासों और गलत धारणाओं के आगे नहीं झुकना चाहिए?: मद्रास हाईकोर्ट

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क्या सरकारी अधिकारियों को अंधविश्वासों और गलत धारणाओं के आगे नहीं झुकना चाहिए?: मद्रास हाईकोर्ट

सारांश

तमिलनाडु के एनोर जिले में एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जहाँ न्यायालय ने सरकारी अधिकारियों को अंधविश्वासों के आगे झुकने से मना किया है। यह कहानी विश्वास, पूजा और सरकारी कार्रवाई के बीच के संघर्ष को उजागर करती है।

मुख्य बातें

न्यायालय का आदेश महत्वपूर्ण है।
सरकारी अधिकारियों को अंधविश्वासों के आगे नहीं झुकना चाहिए।
सामाजिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए सही दृष्टिकोण आवश्यक है.
साइंस और तर्क का महत्व समझना चाहिए।

चेन्नई, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के एनोर जिले से एक महत्वपूर्ण खबर आई है। यहाँ नेट्टुकुप्पम में भजन कोविल स्ट्रीट के निवासी कार्तिक अपने निवास पर शिवशक्ति दक्षेश्वरी, विनायगर और वीरभद्र स्वामी की मूर्तियों की पूजा करते थे। उनके पड़ोसी भी इस पूजा में भाग लेते थे।

मूर्तियों की स्थापना और पूजा के बाद, क्षेत्र में कुछ लोगों की कथित तौर पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। इस पर स्थानीय निवासियों ने अधिकारियों से शिकायत की, जिसके बाद मूर्तियों को जब्त कर लिया गया।

इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में आदेश दिया कि मूर्तियाँ याचिकाकर्ता को वापस की जाएं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि लाउडस्पीकर का उपयोग इस तरह से न किया जाए जिससे आम जनता को परेशानी हो। इसके साथ ही, अदालत ने कहा कि किसी से भी धन नहीं लिया जाना चाहिए।

इस आदेश के बावजूद, अधिकारियों द्वारा अब तक मूर्तियाँ वापस न किए जाने का आरोप लगाते हुए कार्तिक ने अदालत की अवमानना की याचिका दायर की।

अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति भरत चक्रवर्ती ने याचिकाकर्ता को तिरुवोट्टियूर तालुक तहसीलदार कार्यालय जाकर मूर्तियाँ वापस लाने का निर्देश दिया।

जब याचिकाकर्ता ने मूर्तियाँ वापस ले लीं, तो न्यायाधीश ने अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि लाउडस्पीकर के उपयोग से जनता को असुविधा होती है, तो पुलिस कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। यदि याचिकाकर्ता के घर में बिना अनुमति के मंदिर का निर्माण किया गया है, तो अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।

न्यायाधीश ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि यदि कोई दान पेटी (हुंडियाल) रखी गई है, तो कार्रवाई करें।

न्यायाधीश ने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति पर स्थापित मूर्तियों की शांतिपूर्वक पूजा करता है, तो आम जनता, बहुमत होने के नाम पर, कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकती। सरकारी अधिकारियों को अंधविश्वासों और झूठी मान्यताओं के आगे नहीं झुकना चाहिए।

जज ने यह भी कहा कि न तो भगवान और न ही मूर्तियाँ मनुष्यों को कोई नुकसान पहुँचाती हैं, और इस तरह की मान्यताएँ अंधविश्वास हैं और इन्हें भक्ति नहीं माना जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे नागरिकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा हो सके।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हाईकोर्ट ने मूर्तियाँ वापस करने का आदेश दिया?
हाँ, हाईकोर्ट ने मूर्तियाँ याचिकाकर्ता को वापस करने का आदेश दिया था।
क्या अधिकारियों ने आदेश का पालन किया?
अधिकारी अभी तक आदेश का पालन नहीं कर पाए हैं, जिसके कारण अवमानना याचिका दायर की गई।
न्यायालय ने लोगों को क्या निर्देश दिया?
न्यायालय ने लाउडस्पीकर के उपयोग में सावधानी बरतने और किसी से धन न लेने का निर्देश दिया।
राष्ट्र प्रेस
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