क्या शिवसेना के नवनिर्वाचित पार्षद होटल में हैं? संजय निरुपम ने किया खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- शिवसेना के नवनिर्वाचित पार्षद होटल में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
- एकनाथ शिंदे ने प्रशिक्षण का आयोजन किया है।
- विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं।
- संजय निरुपम ने एकजुटता पर जोर दिया।
- भाजपा और कांग्रेस की तुलना भी की गई।
मुंबई, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में शिवसेना के नवनिर्वाचित पार्षद होटल में उपस्थित हैं, इस पर विपक्ष ने कई सवाल उठाए हैं। अब इन सभी सवालों पर शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने स्पष्टता प्रदान की है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि एकनाथ शिंदे होटल में सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
संजय निरुपम ने मंगलवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में पूरी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान नवनिर्वाचित पार्षदों को यह बताया जा रहा है कि उन्हें किन कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। आम नागरिकों को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एक पार्षद के नाते आप उनके हित में कैसे कार्य कर सकते हैं। इन्हीं बिंदुओं पर एकनाथ शिंदे होटल में सभी नवनिर्वाचित पार्षदों की बैठक आयोजित कर रहे हैं, जबकि इस पर कुछ लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है।
संजय निरुपम ने कहा कि जो लोग हमारे पार्षदों की एकजुटता पर संदेह कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उनके अपने पार्षद ही नियंत्रण में नहीं हैं और वे हमारे पार्षदों की एकजुटता पर सवाल उठा रहे हैं। हमारे पार्षद हर परिस्थिति में एकजुट हैं और आगे भी रहेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए। हम सभी महाराष्ट्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस प्रतिबद्धता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
संजय निरुपम ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नबीन के चयन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैं नितिन नबीन को ढेर सारी शुभकामनाएं देना चाहूंगा। उनके जैसे कर्मठ नेता को इस तरह का पद मिलने से संगठन में नई ऊर्जा का संचार होगा। कांग्रेस की स्थिति आज की तारीख में किसी से छुपी नहीं है। उसके अध्यक्ष दक्षिण भारत से आते हैं, जहां की जनसंख्या कम है, जबकि भाजपा के अध्यक्ष उत्तर भारत से आते हैं, जहां की जनसंख्या अधिक है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बुजुर्ग हैं, जबकि भाजपा के नेता युवा हैं, जो हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष पद के जरिए जातिगत समीकरण साधने की कोशिश की, जबकि भाजपा ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया।
उन्होंने कहा कि नितिन नबीन कायस्थ समुदाय से आते हैं। पूरे बिहार में सिर्फ 70 लाख लोग इस समुदाय से हैं। वहीं, यदि उत्तर प्रदेश और राजस्थान को जोड़ा जाए तो कुल 1 करोड़ कायस्थ समुदाय के लोग बन जाएंगे। भाजपा ने एक युवा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी है, जबकि कांग्रेस ने एक थके-हारे को इस पद के लिए चुना है।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि महाराष्ट्र के भिवंडी जैसे क्षेत्र जिहादी मुसलमानों का अड्डा बनते जा रहे हैं। ऐसे अड्डों को नष्ट किया जाना चाहिए। दंगाई प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसे लोग देश के लिए खतरा हो सकते हैं। यदि समय रहते इन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो हमारे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश में चांद कभी नहीं आएगा, क्योंकि यह हमारे अशोक सम्राट का चिन्ह है। चाहे कोई नाक रगड़कर भी मर जाए, तब भी हम ऐसा नहीं होने देंगे। आज इसी अशोक चक्र के कारण हमारे देश की ऐतिहासिकता से लोग परिचित हैं।