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क्या ट्रंप हाई टैरिफ वापस ले सकते हैं, भारत में निवेश करना सही होगा? जेफरीज

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क्या ट्रंप हाई टैरिफ वापस ले सकते हैं, भारत में निवेश करना सही होगा? जेफरीज

सारांश

क्या ट्रंप की टैरिफ नीति में बदलाव भारत में निवेश के लिए एक सुनहरा अवसर ला सकता है? जेफरीज फर्म के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में खरीदारी करने का सही समय है, जबकि वैश्विक बाजार में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। जानें इसके पीछे के कारण और भारत की आर्थिक स्थिति के बारे में।

मुख्य बातें

जेफरीज की सलाह के अनुसार, भारत में निवेश का सही समय है।
ट्रंप की नीतियों में बदलाव भारत के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है।
डी-डॉलराइजेशन से ब्रिक्स देशों की स्थिति मजबूत हो सकती है।
भारतीय शेयर बाजार में फॉरवर्ड अर्निंग के अनुपात में सुधार की संभावना है।
वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बावजूद, भारत में दीर्घकालिक निवेश की संभावनाएँ बनी हुई हैं।

मुंबई, 18 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी ब्रोकिंग फर्म जेफरीज ने अपने ग्राहकों को भारत में बिकवाली करने की बजाय खरीदारी करने की सलाह दी है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों में बदलाव होना निश्चित है।

जेफریز के प्रमुख एनालिस्ट क्रिस्टोफर वुड ने बताया कि उनके ग्राहक वर्तमान वैश्विक बाजार की स्थिति और इस संभावना के चलते भारत में निवेश करने की सोच रहे हैं, क्योंकि ट्रंप अंततः अपने रुख में परिवर्तन करेंगे, जो अमेरिका के हित में नहीं है।

वुड ने कहा, "यह केवल कुछ समय की बात है कि ट्रंप अपने रुख से पीछे हट जाएंगे, जो कि अमेरिका के हित में नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अगर कोई ट्रंप के सामने खड़ा होता है तो उसे लाभ होता है।"

वुड ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप द्वारा ब्रिक्स देशों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से डी-डॉलराइजेशन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। ब्रिक्स देशों में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

डी-डॉलराइजेशन उस स्थिति को दर्शाता है, जब देश डॉलर की बजाय अन्य विदेशी या घरेलू मुद्राओं में व्यापार करने लगते हैं।

विश्लेषक ने कहा कि जेफरीज ने भारत पर, विशेष रूप से अपने एशिया (जापान को छोड़कर) लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो में, लगातार सकारात्मक रुख बनाए रखा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 15 वर्षों में वैश्विक उभरते बाजारों की तुलना में, भारत ने पिछले 12 महीनों में सबसे खराब प्रदर्शन किया है।

ब्रोकिंग फर्म ने एशिया (जापान को छोड़कर) में भारत पर "मार्जिनल ओवरवेट" रुख भी बनाए रखा है।

वुड ने कहा, "भारत एशिया में सबसे बेहतरीन दीर्घकालिक संरचनात्मक स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है," हालांकि बाजार "उच्च मूल्यांकन और भारी इक्विटी आपूर्ति का सामना कर रहा है।"

भारतीय शेयर बाजार एक वर्ष की फॉरवर्ड अर्निंग के 20.2 गुना पर कारोबार कर रहे हैं, जो अक्टूबर 2021 के उच्चतम स्तर 22.4 गुना से कम है।

वुड ने कहा कि ब्रिक्स देश मुख्यतः अमेरिकी प्रशासन की विदेश नीति में वैचारिक ढांचे के अभाव के कारण फिर से एकजुट हो रहे हैं।

कई मीडिया रिपोर्टें यह दावा करती हैं कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों की 25 से 29 अगस्त के बीच प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा को पुनर्निर्धारित किया जा सकता है।

अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में कमी आई है। 27 अगस्त से अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लागू होने की धमकी दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना चाहिए कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में परिवर्तन होते रहते हैं। ट्रंप की नीतियों में बदलाव भारत के लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। हमें इस अवसर को समझदारी से लेना चाहिए।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप की टैरिफ नीतियों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
ट्रंप की टैरिफ नीतियों में बदलाव भारत के निर्यात पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे व्यापारिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।
जेफरीज के अनुसार भारत में निवेश करने का सही समय क्या है?
जेफरीज का मानना है कि वर्तमान वैश्विक बाजार की स्थिति के कारण भारत में निवेश करना लाभकारी हो सकता है।
डी-डॉलराइजेशन क्या है?
डी-डॉलराइजेशन उस स्थिति को दर्शाता है, जब देश डॉलर के बजाय अन्य मुद्राओं में व्यापार करने लगते हैं।
ब्रिक्स देशों का क्या महत्व है?
ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, जो वैश्विक आर्थिक ताकत बनते जा रहे हैं।
क्या भारत में निवेश करने से लाभ होगा?
अगर ट्रंप की नीतियों में बदलाव होता है, तो भारत में निवेश से लाभ होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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