क्या वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हो रही तोड़फोड़ भाजपा के नास्तिक होने का प्रमाण है?
सारांश
Key Takeaways
- मणिकर्णिका घाट का सांस्कृतिक महत्व
- अजय राय का भाजपा पर आरोप
- घाट की रक्षा की मांग
- सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
- धार्मिक नेताओं से बातचीत की आवश्यकता
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रही कार्रवाई के संदर्भ में यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग नास्तिक हैं और इस पवित्र स्थल की महत्ता केवल काशी और कांग्रेस के लोग ही समझते हैं।
नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में अजय राय ने कहा कि काशी के लोग बेहद नाराज हैं, क्योंकि यह उनकी पारंपरिक भूमि है। यहां हर साल दुनियाभर से लोग आते हैं और इसकी अपनी विशेष मान्यता है। अंतिम इच्छा होती है कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर हो, लेकिन आज इस पवित्र जगह को बर्बाद किया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि मणिकर्णिका घाट पर चल रही कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। काशी के धार्मिक नेताओं से बातचीत कर आगे की प्रक्रिया तय की जाए। दालमंडी को बर्बाद करने से रोका जाए और उसके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। कांग्रेस पार्टी बनारस में किसी भी गलत कार्य को होने नहीं देगी। हम लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं और इस सरकार का सामना करेंगे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 2023 में मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हुआ था, लेकिन इसके नाम पर घाट को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। मणिकर्णिका घाट का वैश्विक महत्व है। हिंदू समाज के लोग चाहते हैं कि उनकी अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट पर हो। यहां तक कि विदेश में रह रहे लोग भी यही इच्छा रखते हैं। लेकिन जिस मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी ने किया, भाजपा सरकार ने उनकी मूर्तियों को और महादेव के शिवलिंग के साथ माता पार्वती की मणि को भी तोड़ दिया है। हर साल मणिकर्णिका घाट पर 'पंचकोशी यात्रा' होती है, जिसमें करोड़ों लोग शामिल होते हैं और संकल्प लेते हैं।
कांग्रेस नेता अभय दुबे ने कहा कि काशी वह अद्भुत भूमि है, जिसका निर्माण स्वयं भगवान शंकर ने किया और जिसे उन्होंने अपना दिव्य निवास बनाया। उसी पवित्र भूमि पर भाजपा सरकार ने ऐसा विध्वंस किया है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।