क्या सरकार पर वोट चोरी के आरोप लगाकर विपक्ष को कोई फायदा मिलेगा? मनोहर लाल का जवाब
सारांश
Key Takeaways
- वोट चोरी के आरोप बेबुनियाद हैं।
- 91 फीसदी लोगों ने ईवीएम पर संतोष जताया है।
- सरकार घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
- राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाए जा रहे हैं।
- जनता अब इन आरोपों की सच्चाई समझ चुकी है।
करनाल, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने विपक्ष द्वारा लगाए गए वोट चोरी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि इनमें कोई सच्चाई नहीं है। यह आरोप राजनीतिक दुर्भावना से उत्पन्न हुए हैं और इससे विपक्ष को कोई लाभ नहीं होने वाला है।
मनोहर लाल ने शनिवार को पत्रकारों से चर्चा में कहा कि यह समझ से परे है कि ये लोग वोट चोरी और ईवीएम में गड़बड़ी जैसे मुद्दों का सामना करके हमारे ऊपर आरोप क्यों लगा रहे हैं, जबकि हाल ही में कर्नाटक में हुए सर्वे में 91 फीसदी लोगों ने ईवीएम से कोई शिकायत नहीं की है। वोट चोरी का आरोप भ्रामक है। यह दुखद है कि राजनीतिक दुर्भावना के चलते ये लोग ऐसे आरोप लगा रहे हैं। इस सर्वे ने इनकी पोल खोल दी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में चुनाव आने से पहले ये लोग हमेशा ईवीएम या वोट चोरी का जिक्र करने लगते हैं। ऐसा वे राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं। हम सब को पता है कि बिहार में चुनावी बिगुल बजने से पहले भी इन्हें इसी तरह के आरोप लगाने पड़े थे, और बाद में क्या हुआ, हम सभी जानते हैं। अब तो देश की जनता भी समझ चुकी है कि इन आरोपों में कोई सत्यता नहीं है।
घुसपैठियों पर भी मनोहर लाल ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार निरंतर घुसपैठियों के खिलाफ कदम उठा रही है। अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर किया जा रहा है, और यही इन लोगों को परेशान कर रहा है। हम अपने देश में दूसरे देश के नागरिकों को अवैध रूप से क्यों रहने देंगे? विपक्ष के लोग चाहते हैं कि ये लोग रहें ताकि उन्हें इससे राजनीतिक लाभ मिल सके।
मनोहर लाल ने कहा कि विपक्ष के लोग घुसपैठियों का उपयोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए करना चाहते हैं। वास्तविकता में तो वोट चोरी विपक्ष के लोग ही कर रहे हैं। अब इस पर रोक लगाने की प्रक्रिया हमारी सरकार ने शुरू की है। हमारी सरकार ने फर्जी मतदाताओं की पहचान का काम भी शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया में अवैध रूप से भारत में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर किया जा रहा है। ऐसे लोगों को हम अपने देश में कैसे स्वीकार कर सकते हैं?