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क्या वारिस पठान का संघ पर वार सही है, क्या प्यार के लिए अनुमति की जरूरत है?

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क्या वारिस पठान का संघ पर वार सही है, क्या प्यार के लिए अनुमति की जरूरत है?

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 'लव जिहाद' बयान पर वारिस पठान की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक माहौल में उथल-पुथल मचा दी है। उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। जानिए इस विवाद की पूरी कहानी और वारिस पठान का दृष्टिकोण।

मुख्य बातें

‘लव जिहाद’ का कोई आधिकारिक डाटा नहीं है।
18 वर्ष से ऊपर के लोगों को शादी का अधिकार है।
भाजपा पर नफरत की राजनीति करने का आरोप।
संविधान का सम्मान आवश्यक है।
अंतर-जातीय शादियों की परंपरा पुरानी है।

मुंबई, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के ‘लव जिहाद’ पर दिए गए बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने इस बयान को भ्रामक बताते हुए भाजपा और संघ परिवार पर समाज में विभाजन और संविधान की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है।

वारिस पठान ने भाजपा और संघ परिवार पर झूठे नैरेटिव गढ़ने और समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया है। राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ‘लव जिहाद’ की परिभाषा क्या है और इसके कितने मामले देश में दर्ज हुए हैं।

उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि ‘लव जिहाद’ एक संगठित साजिश है, तो भाजपा और संघ के नेता बताएं कि किस राज्य में इसके कितने मामले सामने आए हैं और उसका आधिकारिक डाटा कहाँ है। वारिस पठान ने कहा कि देश में अंतर-जातीय और अंतर-सामुदायिक शादियां होती रही हैं, यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भाजपा नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने गैर-मुस्लिम या दूसरी जातियों में शादियां नहीं की हैं।

एआईएमआईएम नेता ने कहा कि यदि लड़का और लड़की दोनों 18 वर्ष से अधिक हैं, तो भारतीय कानून उन्हें अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने का पूरा अधिकार देता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्यार करने या जीवनसाथी चुनने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता है और कौन यह तय करेगा कि कोई किससे प्यार करे।

वारिस पठान ने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ परिवार ने ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘वोट जिहाद’ और ‘स्काई जिहाद’ जैसे शब्द गढ़कर पूरे देश में लोगों को भ्रमित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे झूठे नैरेटिव के जरिए समाज में डर और नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए, एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि उन्होंने संविधान की शपथ लेकर मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि वे संविधान को नजरअंदाज कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि मेयर कौन बनेगा या कैसे बनेगा। पठान ने दोहराया कि वह संविधान का सम्मान करते हैं और उसी के अनुसार देश चलना चाहिए।

भाजपा पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए, एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि पार्टी ने अपने कुछ नफरत फैलाने वाले नेताओं को खुली छूट दे रखी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का एकमात्र एजेंडा महाराष्ट्र में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाना, हिंदू-मुस्लिम मुद्दों का राजनीतिकरण करना, समाज में फूट डालना और लोगों का ध्यान वास्तविक विकास के मुद्दों से भटकाना है। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि विकास, पर्यावरण और किसानों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार ने क्या ठोस काम किया है। वारिस पठान ने आरोप लगाया कि इन सवालों के जवाब भाजपा के पास नहीं हैं और राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है।

भाजपा की सहयोगी पार्टी एनसीपी के नेता अजीत पवार का जिक्र करते हुए वारिस पठान ने कहा कि उन्होंने खुले मंच पर स्वीकार किया था कि 70 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है, फिर भी वह भाजपा के साथ सत्ता में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़ते ही करोड़ों के घोटाले करने वाले नेता पाक-साफ हो जाते हैं। पठान ने कहा कि जिन अजीत पवार पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोटाले के आरोप लगाए थे, आज वही सत्ता की मलाई खा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या प्यार करने के लिए अनुमति की आवश्यकता है?
भारतीय कानून के अनुसार, यदि दोनों पक्ष 18 वर्ष से अधिक हैं, तो उन्हें अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने का अधिकार है।
'लव जिहाद' का क्या मतलब है?
'लव जिहाद' एक विवादास्पद शब्द है जिसका उपयोग कुछ लोग अंतर-धार्मिक शादियों को संदर्भित करने के लिए करते हैं, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है।
भाजपा पर वारिस पठान ने क्या आरोप लगाए हैं?
वारिस पठान ने भाजपा पर समाज में नफरत फैलाने और झूठे नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया है।
क्या संविधान में मेयर के चुनाव के बारे में कुछ लिखा है?
संविधान में मेयर के चुनाव की प्रक्रिया के बारे में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
वारिस पठान का राजनीतिक दृष्टिकोण क्या है?
वारिस पठान का राजनीतिक दृष्टिकोण समाज में एकता और संविधान के प्रति सम्मान पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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