लाल किला ब्लास्ट केस: NIA कोर्ट ने 11 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 नवंबर तक बढ़ाई, चार्ज फ्रेमिंग पर अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट स्थित स्पेशल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को लाल किला ब्लास्ट मामले के सभी 11 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी है। अदालत में सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया, जिसके बाद यह आदेश सुनाया गया।
मुख्य घटनाक्रम
गुरुवार की सुनवाई में कोर्ट ने न केवल हिरासत विस्तार का आदेश दिया, बल्कि 21 नवंबर 2026 को आरोपियों के विरुद्ध चार्ज फ्रेम करने पर अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी। इससे पूर्व की सुनवाई में अदालत ने NIA द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।
जाँच एजेंसी ने इस मामले में 75,000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कुल 12 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं।
धमाके की पृष्ठभूमि
10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के समीप हुए इस विस्फोट ने पूरी राजधानी को हिलाकर रख दिया था। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हुई थी और 24 से अधिक लोग घायल हुए थे।
NIA के अनुसार, इस धमाके का मुख्य साजिशकर्ता उमर उन नबी था, जो स्वयं आत्मघाती हमलावर के रूप में इस विस्फोट में मारा गया। उसका नाम भी चार्जशीट में दर्ज किया गया है।
आरोपियों की सूची
चार्जशीट में उमर उन नबी के अतिरिक्त जिन आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं, वे हैं — जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट्ट, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद, जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश, डॉ. आदिल अहमद, यासिर अहमद डार, डॉ. मुजम्मिल शकील, आमिर राशिद अली, अहमद डार और शोएब।
गौरतलब है कि इनमें से 11 जीवित आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि मुख्य साजिशकर्ता उमर उन नबी धमाके में मारा जा चुका है।
जाँच की स्थिति और आगे की राह
NIA इस मामले की गहन जाँच जारी रखे हुए है। 75,000 पन्नों की चार्जशीट को इस मामले की जटिलता और साजिश के व्यापक दायरे का संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में सुरक्षा एजेंसियाँ आतंकी गतिविधियों के प्रति विशेष सतर्कता बरत रही हैं। 21 नवंबर 2026 की सुनवाई में अदालत द्वारा चार्ज फ्रेम करने की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।