एलसीएच ‘प्रचंड’ का नया ऑर्डर: 2027-2028 से शुरू होगी डिलीवरी
सारांश
Key Takeaways
- ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर भारतीय थलसेना और वायुसेना में शामिल हो चुका है।
- 156 हेलिकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
- डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी।
- यह हेलिकॉप्टर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेट कर सकता है।
- इसमें कई उन्नत तकनीकी सुविधाएँ हैं।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने हेलिकॉप्टर निर्माण के क्षेत्र में स्वदेशी आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। लाइट अटैक हेलिकॉप्टर बनाकर, भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास अटैक हेलिकॉप्टर बनाने की क्षमता है। लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ को भारतीय थलसेना और वायुसेना में शामिल किया जा चुका है।
सरकार ने सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 156 ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी थी, जिसके तहत रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच 62,700 करोड़ रुपए की डील पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इस पर तेजी से काम चल रहा है।
एचएएल के सीएमडी डॉ. डीके सुनील ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में डिलीवरी की समय सीमा का खुलासा किया। उन्होंने कहा, “ऑर्डर से संबंधित लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो गई हैं। हम 2027–28 से एयरक्राफ्ट की डिलीवरी शुरू करेंगे। पार्ट्स डेवलपमेंट, उपकरण, स्ट्रक्चरल पार्ट्स और रॉ मटेरियल के अधिकांश ऑर्डर दिए जा चुके हैं।”
अब तक सीमित श्रृंखला उत्पादन के तहत 15 ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर सेना में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें वायुसेना को 10 और थलसेना को 5 हेलिकॉप्टर प्रदान किए गए हैं। कुल 156 हेलिकॉप्टरों में से 90 थलसेना और 66 वायुसेना को दिए जाएंगे।
‘एलसीएच प्रचंड’ की विशेषताओं की बात करें तो इसे विशेष रूप से भारतीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसमें 20 मिमी की मशीन गन है और 70 मिमी के रॉकेट दो रॉकेट पॉड्स से लैस हैं, जिनसे लगातार फायरिंग की जा सकती है। यह एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल ‘हेलिना’ दागने में सक्षम है और एयर-टू-एयर मिसाइल भी फायर कर सकता है।
यह हेलिकॉप्टर 21,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। एलएसी पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को यह अटैक सपोर्ट प्रदान करेगा, जो पहले उपलब्ध नहीं था। यह लद्दाख और पूर्वोत्तर के कठिन इलाकों में आसानी से ऑपरेट कर सकता है।
‘प्रचंड’ हल्का है और इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह संकरी घाटियों में भी आसानी से लो-फ्लाइंग और मैन्युवरिंग कर सके। खास बात यह है कि यह सियाचिन जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी ऑपरेट करने में सक्षम है।
इस हेलिकॉप्टर में पायलट के लिए हेलमेट-माउंटेड साइट और इंफ्रारेड साइटिंग सिस्टम है, जिससे जमीन और हवा में किसी भी टारगेट को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। यह हेलिकॉप्टर सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट से लैस है और इसमें रडार व लेजर मिसाइल वार्निंग सिस्टम भी है। यह कम दृश्यता में दिन और रात दोनों समय ऑपरेट कर सकता है।