26 जुलाई 2026
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लखनऊ में नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़: ₹13.95 लाख के जाली नोटों के साथ तीन गिरफ्तार, सरगना फरार

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लखनऊ में नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़: ₹13.95 लाख के जाली नोटों के साथ तीन गिरफ्तार, सरगना फरार

सारांश

लखनऊ के घैला पुल के पास देर रात पुलिस ने ₹13.95 लाख के जाली नोटों के साथ तीन युवकों को दबोचा। तीनों आज़मगढ़ के रहने वाले हैं और गिरोह के सरगना मंजीत के इशारे पर लखनऊ आए थे। मंजीत और उसका साथी संतोष अभी फरार हैं।

मुख्य बातें

9 जून 2026 को लखनऊ के मड़ियांव थाना क्षेत्र में नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़।
आरोपियों के पास से 500 रुपए के 1,402 और 100 रुपए के 6,946 जाली नोट बरामद; कुल कीमत ₹13,95,600 ।
गिरफ्तार तीनों आरोपी — आलोक सिंह (21) , सोनू गौंड उर्फ गोलू (25) , बृजेश विश्वकर्मा (35) — आज़मगढ़ के निवासी।
गिरोह का सरगना मंजीत और उसका सहयोगी संतोष फरार; पुलिस की विशेष टीमें तलाश में जुटीं।
डीसीपी नॉर्थ गोपाल कृष्ण चौधरी ने मामले की पुष्टि की; आरोपियों पर मुकदमा दर्ज।

लखनऊ के मड़ियांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने 9 जून 2026 को नकली करेंसी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से ₹13,95,600 के जाली नोट बरामद हुए। गिरोह का मुख्य सरगना और उसका एक सहयोगी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

डीसीपी नॉर्थ गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि सोमवार को मड़ियांव पुलिस को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति असली नोटों के बदले बड़ी मात्रा में नकली नोट खपाने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई और संदिग्धों की गतिविधियों पर नज़र रखी जाने लगी।

देर रात घैला पुल के निकट एक खाली मैदान में बने टीन शेड के पास तीन युवक संदिग्ध परिस्थितियों में किसी का इंतज़ार करते पाए गए। पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर तीनों को हिरासत में ले लिया।

बरामदगी का ब्योरा

तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 500 रुपए के 1,402 जाली नोट तथा 100 रुपए के 6,946 जाली नोट बरामद हुए। इस तरह बरामद नकली करेंसी की कुल अंकित कीमत ₹13,95,600 आँकी गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार तीनों आरोपी आज़मगढ़ ज़िले के रहने वाले हैं। इनमें आलोक सिंह (21), निवासी जहानागंज; सोनू गौंड उर्फ गोलू (25), निवासी मुबारकपुर; तथा बृजेश विश्वकर्मा (35), निवासी सिधारी शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे नकली नोटों को असली मुद्रा में बदलने के एवज़ में कमीशन लेते थे।

सरगना की तलाश जारी

आरोपियों के बयान के अनुसार, आज़मगढ़ निवासी मंजीत इस गिरोह का मुखिया है और उसका सहयोगी संतोष भी इस नेटवर्क से जुड़ा है। दोनों फिलहाल फरार हैं। आरोपियों ने बताया कि मंजीत ने ही उन्हें नकली नोटों की खेप देकर लखनऊ भेजा था, जहाँ उन्हें एक निर्धारित व्यक्ति को यह रकम सौंपनी थी।

आगे की कार्रवाई

पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है। डीसीपी नॉर्थ के अनुसार फरार सरगना मंजीत और संतोष को पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में नकली करेंसी के नेटवर्क के विरुद्ध पुलिस की सक्रियता बढ़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि बिना मुखिया की गिरफ्तारी के ऐसे रैकेट नए चेहरों के साथ फिर सक्रिय हो जाते हैं। नकली करेंसी के मामलों में अक्सर देखा गया है कि निचले पायदान के वाहक पकड़े जाते हैं जबकि आपूर्ति श्रृंखला बरकरार रहती है। जाँच की असली कसौटी यह होगी कि पुलिस इस बार आपूर्ति के स्रोत तक पहुँच पाती है या नहीं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
मड़ियांव पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध असली नोटों के बदले जाली नोट खपाने की योजना बना रहे हैं। इस सूचना के आधार पर घैला पुल के पास देर रात घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
बरामद नकली नोटों की कुल कीमत कितनी है?
आरोपियों के पास से 500 रुपए के 1,402 और 100 रुपए के 6,946 जाली नोट मिले, जिनकी कुल अंकित कीमत ₹13,95,600 बताई गई है।
इस नकली करेंसी गिरोह का सरगना कौन है और वह कहाँ का रहने वाला है?
पूछताछ में आरोपियों के बयान के अनुसार गिरोह का सरगना आज़मगढ़ निवासी मंजीत है और उसका सहयोगी संतोष भी इस नेटवर्क से जुड़ा है। दोनों फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
गिरफ्तार तीनों आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में आलोक सिंह (21) निवासी जहानागंज, सोनू गौंड उर्फ गोलू (25) निवासी मुबारकपुर, और बृजेश विश्वकर्मा (35) निवासी सिधारी शामिल हैं — तीनों आज़मगढ़ ज़िले के रहने वाले हैं।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। फरार सरगना मंजीत और संतोष को पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और अभियान तेज कर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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