9 अक्टूबर 2026
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मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 14% पर बरकरार, जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले पर कांग्रेस-भाजपा में तीखी जुबानी जंग

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मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 14% पर बरकरार, जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले पर कांग्रेस-भाजपा में तीखी जुबानी जंग

सारांश

जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 14% पर सीमित रख दिया — 2019 का कमलनाथ सरकार का 27% वाला कानून खारिज। कांग्रेस ने भाजपा की 'कमज़ोर पैरवी' पर हमला बोला, भाजपा ने कांग्रेस के 'कमज़ोर कानून' को ज़िम्मेदार ठहराया। सर्वोच्च न्यायालय में अपील की संभावना।

मुख्य बातें

जबलपुर उच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 14 प्रतिशत पर बनाए रखने का आदेश दिया।
न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायाधीश विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा कि 27% आरक्षण से कुल आरक्षण 63% हो जाता, जो संवैधानिक सीमा से 13% अधिक है।
न्यायालय ने 1992 के सर्वोच्च न्यायालय के इंदिरा साहनी फैसले का हवाला देते हुए 50% की सीमा से अधिक जाने का आधार नहीं माना।
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर 'कमज़ोर पैरवी' का आरोप लगाया; भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने 2019 के कमलनाथ सरकार के कानून को 'कानूनी रूप से कमज़ोर' बताया।
सरकार ने 2019 से 2022 के बीच की नियुक्तियों को संरक्षण दिलाने का दावा किया; सर्वोच्च न्यायालय में अपील पर विचार जारी।

जबलपुर उच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को 14 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का आदेश दिया। न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायाधीश विनय सराफ की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आरक्षण को 27 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियाँ सिद्ध नहीं हो सकीं। इस फैसले ने राज्य में राजनीतिक तापमान को एकाएक बढ़ा दिया है।

न्यायालय का तर्क

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि 1992 में सर्वोच्च न्यायालय के इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का संदर्भ दिया, जिसमें यह सिद्धांत तय किया गया था कि आरक्षण सामान्यतः 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया जाता, तो राज्य का कुल आरक्षण 63 प्रतिशत हो जाता — जो संवैधानिक सीमा से 13 प्रतिशत अधिक होता। इस अतिरिक्त वृद्धि को उचित ठहराने वाली कोई ठोस असाधारण परिस्थिति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जा सकी।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला। उनका कहना है कि यह प्रदेश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की कमज़ोर पैरवी और ओबीसी वर्ग के सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े पर्याप्त तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण आरक्षण की लड़ाई को बड़ा झटका लगा है।

पटवारी ने स्मरण दिलाया कि वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाने के उद्देश्य से आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का कानून बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने बीते वर्षों में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को कानूनी उलझनों में फंसा रहने दिया और ओबीसी आरक्षण को रोकने के लिए वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का दावा भी सामने आया है। पटवारी ने माँग की कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश की जनता के सामने अपनी भूमिका स्पष्ट करें।

भाजपा का पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा लाए गए कानून में आरक्षण बढ़ाने के लिए आवश्यक विशेष परिस्थितियों का पर्याप्त कानूनी आधार ही प्रस्तुत नहीं किया गया था, इसीलिए वह कानून न्यायालय में टिक नहीं सका। उनका कहना है कि कांग्रेस के कमज़ोर कानून के कारण पिछड़े वर्ग का नुकसान हुआ।

अजय सिंह यादव ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने इस कानून को बचाने के लिए बड़े विधि विशेषज्ञों और वरिष्ठ वकीलों से सलाह ली तथा न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखा। सरकार उच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है और फैसले की विधिक समीक्षा कर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप 2019 से 2022 के बीच की नियुक्तियों को संरक्षण मिला है, जिससे संबंधित अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहे।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के अपने संकल्प को दोहराया है। सरकार ने संकेत दिया है कि सभी आवश्यक कानूनी और संवैधानिक विकल्पों पर विचार किया जाएगा, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील की संभावना भी शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में OBC आरक्षण और जातिगत जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। गौरतलब है कि यह मामला राज्य में पिछले कई वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था, और अब इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों के लिए ओबीसी वोट बैंक को साधने की चुनौती और बढ़ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल कांग्रेस और भाजपा दोनों से पूछा जाना चाहिए। दोनों दल एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में व्यस्त हैं, लेकिन असली नुकसान उस OBC समाज का हुआ है जिसके नाम पर दोनों राजनीति करते रहे हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि देशभर में OBC जनगणना और आरक्षण विस्तार की माँग जोर पकड़ रही है, ऐसे में यह फैसला राष्ट्रीय बहस को और तीखा कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय में अपील की राह खुली है, लेकिन बिना पुख्ता सामाजिक-शैक्षणिक सर्वेक्षण डेटा के वही कमज़ोरी दोहराई जाने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर क्या फैसला दिया?
जबलपुर उच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया कि मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 14 प्रतिशत पर ही बनाए रखा जाएगा। न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायाधीश विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा कि आरक्षण को 27 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियाँ सिद्ध नहीं हुईं।
OBC आरक्षण को 27 प्रतिशत करने का प्रयास क्यों खारिज हुआ?
न्यायालय के अनुसार, 27% OBC आरक्षण से मध्य प्रदेश का कुल आरक्षण 63% हो जाता, जो सर्वोच्च न्यायालय के 1992 के इंदिरा साहनी फैसले में निर्धारित 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से 13% अधिक है। इस सीमा को पार करने के लिए कोई ठोस असाधारण परिस्थिति प्रमाणित नहीं की जा सकी।
कांग्रेस और भाजपा के बीच इस फैसले पर विवाद क्यों है?
कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने न्यायालय में कमज़ोर पैरवी की और पर्याप्त सामाजिक-शैक्षणिक आँकड़े प्रस्तुत नहीं किए। वहीं, भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव का कहना है कि 2019 में कमलनाथ सरकार का बनाया कानून ही कानूनी रूप से कमज़ोर था, इसीलिए वह न्यायालय में टिक नहीं सका।
2019 से 2022 के बीच OBC कोटे से नियुक्त उम्मीदवारों का क्या होगा?
भाजपा सरकार का दावा है कि उसके प्रयासों के परिणामस्वरूप 2019 से 2022 के बीच की नियुक्तियों को न्यायालय से संरक्षण मिला है। इससे उस दौरान नियुक्त अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे।
क्या मध्य प्रदेश सरकार इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी?
भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा है कि सरकार फैसले की विधिक समीक्षा करेगी और आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने OBC को 27% आरक्षण दिलाने के अपने संकल्प को दोहराया है।
राष्ट्र प्रेस
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