जबलपुर हाईकोर्ट का OBC आरक्षण फैसला: कांग्रेस ने MP भाजपा सरकार पर लगाया 'विश्वासघात' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने के मामले में जबलपुर उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने 10 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) को अपना निर्णय सुनाया, जिसमें OBC को 14 प्रतिशत आरक्षण ही बरकरार रखा गया। इस फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने OBC समुदाय की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है।
मुख्य घटनाक्रम
जबलपुर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 1996–97 और 2019–20 की सिफारिशें 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर आधारित थीं। अदालत ने पाया कि इन सिफारिशों के लिए इस उद्देश्य से नए, स्वतंत्र आँकड़े एकत्र नहीं किए गए थे, जिससे आरक्षण बढ़ाने का कानूनी आधार कमज़ोर साबित हुआ। गौरतलब है कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का अध्यादेश तत्कालीन कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने लाया था।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से प्रदेश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले OBC समाज की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि समुदाय को आशा थी कि 27 प्रतिशत आरक्षण से बच्चों को शिक्षा और रोज़गार में नए अवसर मिलेंगे।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार से सीधा सवाल किया कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के समर्थन में सरकार ने नए, व्यापक और विश्वसनीय आँकड़े क्यों नहीं जुटाए। उनका तर्क था कि अदालत ने कानून और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया, किन्तु सरकार की ज़िम्मेदारी थी कि वह अपने पक्ष में मज़बूत तथ्य प्रस्तुत करती।
भाजपा का पक्ष
दूसरी ओर, BJP ने मामले में पूर्ण ज़िम्मेदारी लेने से परहेज करते हुए उस अध्यादेश की वैधता पर ही सवाल उठाए, जो कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पारित किया था। पार्टी का तर्क है कि आरक्षण विस्तार की कानूनी बुनियाद पहले ही कमज़ोर थी। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में OBC राजनीति अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
आम जनता पर असर
इस फैसले का सीधा असर मध्य प्रदेश के उन लाखों OBC परिवारों पर पड़ेगा जो सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण की प्रतीक्षा कर रहे थे। फिलहाल 14 प्रतिशत का ही दावा बरकरार रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ केंद्र सरकार वोट की राजनीति करती है, दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की सरकार ने OBC आरक्षण को न्यायालय में प्रभावी तरीके से नहीं बचाया।
क्या होगा आगे
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस फैसले के बाद राज्य सरकार के पास उच्चतम न्यायालय में अपील का विकल्प खुला है। कांग्रेस ने सरकार पर दबाव बनाते हुए माँग की है कि वह तत्काल नए और प्रामाणिक आँकड़े जुटाकर सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे। मध्य प्रदेश की सियासत में OBC आरक्षण का यह मसला आगामी चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।