16 अक्टूबर 2026
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मध्य प्रदेश OBC आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर, CM मोहन यादव बोले — नीति और नीयत साफ

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मध्य प्रदेश OBC आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर, CM मोहन यादव बोले — नीति और नीयत साफ

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा OBC का 27% आरक्षण रद्द किए जाने के बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की। CM मोहन यादव ने OBC महासभा के प्रतिनिधि मंडलों से मुलाकात में स्पष्ट किया कि सरकार की नीति और नीयत दोनों साफ हैं — अब निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के हाथ।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश सरकार ने OBC 27% आरक्षण मामले में सर्वोच्च न्यायालय में SLP दायर की।
याचिका महाधिवक्ता कार्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा 'स्टेट ऑफ एमपी वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य' के रूप में दायर की गई है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को OBC आरक्षण को 14% से 27% करने वाले 2019 के अध्यादेश को रद्द किया था।
ओबीसी महासभा दिल्ली और ओबीसी महासभा ग्वालियर के प्रतिनिधि मंडलों ने CM मोहन यादव को ज्ञापन सौंपा।
BJP ने कांग्रेस पर कमज़ोर अध्यादेश लाने का आरोप लगाया; कांग्रेस ने BJP पर पिछड़ों से धोखे का आरोप लगाया।

मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर दी है। महाधिवक्ता कार्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा दायर यह याचिका 'स्टेट ऑफ एमपी वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य' के रूप में पंजीकृत की गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 16 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार OBC हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री मोहन यादव से शुक्रवार, 16 अक्टूबर को ओबीसी महासभा के दो प्रतिनिधि मंडलों ने समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास, भोपाल में भेंट की। ओबीसी महासभा दिल्ली ने अधिवक्ता वैभव सिंह और इंजीनियर महेंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में तथा ओबीसी महासभा ग्वालियर ने संस्थापक विजय कुमार, प्रदेश प्रभारी जीतू लोधी और प्रदेशाध्यक्ष गिरिराज धाकड़ के नेतृत्व में अपने-अपने पक्ष रखे।

प्रतिनिधि मंडलों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा, जिसमें 9 अक्टूबर को उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के संदर्भ में अद्यतन आँकड़ों के आधार पर संवैधानिक समाधान निकालने और OBC अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की माँग की गई।

उच्च न्यायालय का निर्णय और उसकी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक अध्यादेश के ज़रिए OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। इस अध्यादेश को न्यायालय में चुनौती दी गई और 9 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में OBC वर्ग की राजनीतिक सक्रियता चरम पर है।

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि उच्च न्यायालय के फैसले का बिंदुवार अध्ययन कर महाधिवक्ता कार्यालय को सर्वोच्च न्यायालय में मज़बूती से पक्ष रखने के निर्देश दे दिए गए थे, जिसके अनुपालन में SLP दायर की गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि OBC आरक्षण का विषय राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार इसे 'टालने की दृष्टि से नहीं, अपितु समुचित हल निकालने के उद्देश्य से' आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी उद्देश्य से पहले एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई थी और सभी OBC संगठनों से वार्ता कर उच्च न्यायालय में पक्ष रखा गया था।

राजनीतिक तकरार

इस मामले को लेकर राज्य की सियासत गरमाई हुई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) का आरोप है कि कांग्रेस के शासनकाल में लाया गया अध्यादेश कानूनी रूप से कमज़ोर था, इसीलिए वह टिक नहीं सका। दूसरी ओर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का कहना है कि BJP ने पिछड़ा वर्ग के साथ धोखा किया है और वर्षों तक सत्ता में रहते हुए आरक्षण की रक्षा नहीं की।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में SLP की सुनवाई के बाद तय होगा कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण बहाल होगा या नहीं। यह फैसला मध्य प्रदेश के लाखों OBC अभ्यर्थियों की सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश की संभावनाओं को सीधे प्रभावित करेगा। मामले की अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि लाखों OBC अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है। SLP एक ज़रूरी कदम है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृति और अंतरिम राहत बिना ठोस पिछड़ापन सर्वे डेटा के मिलना आसान नहीं — यही वह खाई है जो सरकार के 'नीयत साफ है' के दावे को परीक्षा में डालती है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश OBC आरक्षण मामले में SLP क्या है?
SLP यानी स्पेशल लीव पिटीशन वह याचिका है जो राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए दायर की है। यह याचिका 'स्टेट ऑफ एमपी वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य' के नाम से महाधिवक्ता कार्यालय, मध्य प्रदेश ने दायर की है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने OBC आरक्षण पर क्या फैसला दिया?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को 2019 के उस अध्यादेश को रद्द कर दिया जिसके जरिए OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। यह अध्यादेश तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लाया गया था और बाद में इसे न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
CM मोहन यादव ने OBC आरक्षण पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 16 अक्टूबर को ओबीसी महासभा के प्रतिनिधि मंडलों से मुलाकात में कहा कि राज्य सरकार की OBC आरक्षण पर नीति और नीयत दोनों स्पष्ट हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार इस विषय को टालने के बजाय समुचित हल निकालने के उद्देश्य से काम कर रही है।
इस मामले में BJP और कांग्रेस की क्या स्थिति है?
BJP का आरोप है कि कांग्रेस ने 2019 में कानूनी रूप से कमज़ोर अध्यादेश लाया जो न्यायालय में टिक नहीं सका। कांग्रेस का पलटवार है कि BJP ने वर्षों सत्ता में रहते हुए OBC आरक्षण की संवैधानिक रक्षा नहीं की और पिछड़ा वर्ग के साथ धोखा किया।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय में SLP की सुनवाई के बाद तय होगा कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण बहाल किया जाएगा या नहीं। इस फैसले का मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के इच्छुक लाखों OBC अभ्यर्थियों पर सीधा असर पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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